• अल्बर्ट आइंस्टाईन (महान वैज्ञानिक) पर्यावरण सब कुछ है जो मैं नहीं हूं। 
  • जॉन मुइर (लेखक, पर्यायवरणविद्)– इन पेड़ों के लिए भगवान ध्यान देता है, इन्हें सूखे, बीमारी, हिम्स्खलन और एक हजार तूफानों और बाढ़ से बचाता है। लेकिन वो इन्हें बेवकूफों से नहीं बचा सकता। अच्छे जल और हवा में एक प्रवाह लें; और प्रकृति के जीवंत युवा में आप इसे खुद से नया कर सकते हैं। शांति से जाएं, अकेले; तुम्हारा कोई नुकसान नहीं होगा।
  • हेनरी डेविड थोरियु (कवि, दार्शनिक, उन्मूलनवादी, प्रकृतिवादी)– भगवान का शुक्र है कि इंसान उड़ नहीं सकता, नहीं तो पृथ्वी के साथ ही आकाश को भी बरबाद कर देता।
  • मार्गरेट मीड (लेखक एवं वक्ता) हमारे पास एक समाज नहीं होगा अगर हम पर्यावरण का नाश करेंगे।
  • अंसेल एड्म्स (फोटोग्राफर और पर्यावरणविद्) ये भयावह है कि पर्यावरण को बचाने के लिए हमें अपने सरकार से लड़ना पड़े।
  • रॉबर्ट रेडफोर्ट (अभिनेता, निर्देशक)– मैं सोचता हूं पर्यावरण को राष्ट्रीय सुरक्षा की श्रेणी में रखना चाहिए। अपने संसाधनों की रक्षा करना सीमा की सुरक्षा के समान ही जरूरी है। अन्यथा वहां क्या है रक्षा करने को?
  • रोजर टोरी पीटर्सन (प्रकृतिवादी, पक्षी विज्ञानी, कलाकार और शिक्षक)– पक्षी पर्यावरण की संकेतक होती है। अगर वो परेशानी में है, हम जानते हैं कि हमलोग जल्दी ही परेशानी में होंगे।
  • जोसेफ वुड क्रच (लेखक, आलोचक और प्रकृतिवादी)– अगर हम पृथ्वी को सुंदरता और खुशी पैदा करने की अनुमति नहीं देते, अंत में ये भोजन पैदा नहीं करेगा, दोनों में से एक।
  • फ्रैंकलिन डी रूजवेल्ट (अमेरिकी राष्ट्रपति)– एक देश जो अपनी मिट्टïी को नष्ट कर देता है वह खुद को नष्ट कर लेता है। जंगल हमारी भूमि के फेफड़े हैं, वे हमारी हवा को शुद्ध करते हैं और लोगों को नयी ताकत देते हैं।
  • महात्मा गांधी (राष्टपिता, विचारक, राजनीतिक)– पृथ्वी हर मनुष्य की जरूरत को पूरा करता है, लेकिन हर व्यक्ति के लालच को नहीं। विश्व के जंगलों से हम क्या रहें हैं केवल एक शीशे का प्रतिबिंब है जो हम अपने और एक-दूसरे के साथ कर रहे हैं।

यह भी पढ़ें –डिस्लेक्सिया कारण, लक्षण एवं निवारण