Summary: बच्चों की मानसिक सुरक्षा पर संसद में गूंजी आवाज, स्कूलों में काउंसलर की मांग
राज्यसभा में सुधा मूर्ति ने यौन शोषण और भावनात्मक आघात झेल चुके बच्चों के लिए मानसिक सहारे की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हर स्कूल में पर्याप्त संख्या में पेशेवर काउंसलर होना बच्चों की सुरक्षा और विकास के लिए बेहद जरूरी है।
Sudha Murty: ऐसा लगने लगा है कि दुनिया में अब वाकई में बदलाव आने लगा है। अगर बच्चों को लेकर कोई मुद्दा उठाया जाता है तो वह हमेशा उनके स्कूली पाठ्यक्रम, ग्रेड, नंबर, करियर, परीक्षा से जुड़ा होता है। अब एक बहुत ही गंभीर मुद्दे पर चर्चा की गई, जो है बच्चों की मानसिक सुरक्षा।
राज्यसभा में अपने हालिया भाषण में सुधा मूर्ति को इस बारे में बात करते हुए देखा गया। उन्होंने स्कूलों में काउंसलर के जरिए दुर्व्यवहार झेल चुके बच्चों को सहारा देने की अपील की है। चलिए जान लेते हैं उन्होंने क्या कहा।
सुधा मूर्ति ने उठाया मानसिक सुरक्षा का मुद्दा
अपने भाषण में सुधा मूर्ति को यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण करने वाले अधिनियम के संबंध में बात करते हुए देखा गया। उन्होंने कहा कि “पूरे भारत के स्कूलों में बच्चों के लिए पेशेवर रूप से प्रशिक्षित मनोवैज्ञानिकों को काउंसलर के तौर पर नियुक्त करने की जरूरत है। यह इसलिए जरूरी है ताकि जिन बच्चों ने यौन शोषण या फिर भावनात्मक आघात झेला है उन्हें सहारा मिल सके।”
संसद में हुई बहस के दौरान उन्होंने यह साफ किया कि जिन बच्चों ने यौन शोषण झेला है। उन्हें भावनात्मक सहारे की जरूरत होती है जो कई स्कूलों में नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कहा कि “ऐसे बच्चों को जिस चीज की सबसे ज्यादा जरूरत होती है वह है ऐसे व्यक्ति का आश्वासन जो उनसे यह कहे कि इसमें तुम्हारी कोई गलती नहीं है।” यह आश्वासन माता-पिता शिक्षा की आप पेशेवर मनोवैज्ञानिक से मिल सकता है जो हर स्कूल में होना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि कई बच्चे अपने साथ हुए घटनाक्रम के बारे में बात करना मुश्किल समझते हैं। ऐसा भी हो सकता है कि वह अपने माता-पिता या शिक्षक से बात करने की जगह तीसरे व्यक्ति से बात करना और आश्वासन पाना ज्यादा ठीक समझे। सुधा ने कहा कि स्कूलों को छात्रों और काउंसलरों के बीच सही अनुपात बनाए रखने की जरूरत है। 2000 छात्रों के लिए एक काउंसलर काम नहीं कर सकता इसके लिए और लोगों की जरूरत है।
इतना ही नहीं उन्होंने यह सुझाव भी दिया कि यदि स्कूल बच्चों को शारीरिक और भावनात्मक रूप से सहायता प्रदान नहीं कर पा रहे हैं तो उनके खिलाफ दंडात्मक कदम उठाने जाना चाहिए। इसमें स्कूल का पंजीकरण रद्द किए जाने जैसे नियम भी शमिल होने चाहिए।
VIDEO | Rajya Sabha MP Sudha Murty draws Parliament's attention to the need to spread awareness among children, parents and society about crime against minors. She says, "Parents come to school, they see the school building is beautiful and that it is English medium. They say… pic.twitter.com/Ns9XQHqI6P
— Press Trust of India (@PTI_News) March 13, 2026
सोशल मीडिया पर हुई चर्चा
सांसद की इस बात ने सोशल मीडिया पर लोगों के लिए चर्चा का विषय खड़ा कर दिया है। उन्होंने यौन शोषण के शिकार बच्चों को प्रशिक्षित पेशवरों से मदद ना मिल पाने की पहले कड़ी आलोचना की थी और अब एक बार फिर उन्होंने इसे जरूरी बताया है। उनकी इस बात को सुनने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों के बीच यह सहमति देखने को मिली है कि यह बहस का मुद्दा नहीं है बल्कि स्कूलों के बच्चों के लिए काउंसलिंग की सेवा उपलब्ध करवाना जरूरी है।
लोगों का क्या कहना
यह मुद्दा सामने आने के बाद लोग इस पर अपनी अपनी राय देते हुए दिखाई दे रहे हैं। कुछ लोगों का यह कहना है कि ‘किसी बच्चे का सदमा उसका राज बनकर नहीं रहना चाहिए सुधा मूर्ति बिल्कुल सही कह रही हैं, स्कूलों में काउंसलर होना कोई लग्जरी नहीं है बल्कि लाइफलाइन है।’ एक ने कहा ‘हमारे स्कूल में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े सेवाओं के कर्मचारियों की बहुत कमी है।’ एक व्यक्ति ने कहा कि ‘स्कूलों में एक विषय के लिए कई टीचर होते हैं लेकिन सैकड़ो बच्चों के बीच सिर्फ एक काउंसलर होता है।’
एक व्यक्ति ने यह कहा कि ‘सुरक्षित जगह केवल शोषण झेल चुके बच्चों के लिए ही नहीं बल्कि स्कूल से जुड़े सभी सदस्यों के लिए फायदेमंद होती है।’ एक ने कहा ‘एक सुरक्षित जगह हर किसी को एक व्यक्ति के तौर पर विकसित होने में मदद कर सकती है।’ वहीं लोग यह कहते हुए भी दिखाई दिए कि ‘काउंसलिंग का काम पेशेवर काउंसलर ही करें ना कि किसी शिक्षक को यह सौंप दिया जाए।’ एक नहीं कई यूजर ने कहा कि ‘काउंसलिंग को शिक्षक के काम का हिस्सा न माने हमारे बच्चों को यह सेवा देने के लिए योग्य और अच्छी तरह से प्रशिक्षित काउंसलर को नियुक्त करें।’

