Summary: करण जौहर बनाम CarryMinati मामला, सोशल मीडिया कंटेंट पर कोर्ट का सख्त संदेश
फिल्ममेकर करण जौहर को उस समय बड़ी राहत मिली जब मुंबई की एक अदालत ने यूट्यूबर CarryMinati और अन्य संबंधित पक्षों के खिलाफ अंतरिम रोक का आदेश जारी किया। विवाद एक रोस्ट वीडियो को लेकर था, जिसे करण ने मानहानिकारक और आपत्तिजनक बताया।
CarryMinati and Karan Johar: फिल्ममेकर करण जौहर के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर आई है। मुंबई की एक अदालत ने पॉपुलर यूट्यूबर अजय नागर, जिन्हें CarryMinati नाम से जाना जाता है, और Meta Platforms सहित अन्य जुड़े पक्षों को करण जौहर के खिलाफ आपत्तिजनक सामग्री प्रकाशित या प्रसारित करने से अंतरिम रोक लगाने का आदेश दिया है।
करण जौहर बनाम CarryMinati
फ़ेम यूट्यूबर CarryMinati ने अपने यूट्यूब चैनल पर एक रोस्ट वीडियो अपलोड किया था, जिसका शीर्षक था “कॉफी विद जलन”। फिल्म निर्माता करण जौहर ने आरोप लगाया कि यह वीडियो उनके फ़ेमस शो “कॉफी विद करण” की नकल करते हुए अपमानजनक होने के साथ ही बॉलीवुड, नेपोटिज्म और खास रूप से उन्हें निशाना बनाता है।
क्या कहा अदालत ने?
सोमवार, 9 फरवरी को अदालत ने यूट्यूबर CarryMinati यानी अजय नागर तथा अन्य प्रतिवादी पक्षों के खिलाफ अंतरिम रोक लगा दी। मामले की सुनवाई के दौरान जज पांडुरंग भोसले ने कहा कि वीडियो में दी गई सामग्री मानहानिकारक प्रतीत होती है और इसमें तत्काल हस्तक्षेप की आवश्यकता है। जज ने अपने अंतरिम आदेश में कहा, “प्राथमिक तौर पर यह प्रतीत होता है कि अजय नागर और दीपक चार (CarryMinati चैनल के मैनेजर) ने अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया है। इन वीडियो को तुरंत हटाया जाना चाहिए। उन सभी लोगों के खिलाफ निषेधाज्ञा होनी चाहिए, जो इस वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित करते हैं।”
अदालत ने न केवल यूट्यूबर और उनके सहयोगियों को बल्कि उन सभी लोगों को भी रोका है, जो सोशल मीडिया पर इन वीडियो को शेयर कर सकते हैं। इसे जॉन डो आदेश कहते हैं, जिसका उद्देश्य अज्ञात उपयोगकर्ताओं को भी रोकना है।
CarryMinati का बचाव और करण का पक्ष
अजय नागर की ओर से दलील दी गई कि उक्त विवादित वीडियो पहले ही हटाया जा चुका है। हालांकि उनका यह तर्क था कि वीडियो अब मौजूद नहीं है, लेकिन करण जौहर ने अदालत में यह जोर देकर कहा कि नुकसान पहले ही हो चुका है। उनका कहना था कि इस क्लिप को लाखों बार देखा जा चुका था और इसके हट जाने के बावजूद यह रील्स, शॉर्ट वीडियो और अन्य फॉर्मेट्स में सोशल मीडिया पर दिख ही रहा है।
करण का मुद्दा यह था कि जिस स्तर पर इस कंटेन्ट को शेयर किया जा चुका है, वह उनके प्रोफेशनल और पर्सनल जीवन को प्रभावित कर रहा था। यही वजह है कि उन्होंने अदालत से सिर्फ वीडियो हटाने नहीं, बल्कि इसके बार-बार सर्कुलेट होने से रोकने की भी अपील की।
सोशल मीडिया पर रिएक्शन
सोशल मीडिया पर यह मामला बहस का हिस्सा बन गया है। कुछ लोगों ने यूट्यूबर की क्रिएटिव आजादी और रोस्ट कंटेंट के अधिकार की बात की, वहीं कई उपयोगकर्ताओं ने यूट्यूब पर फैल रही भाषा और टोन को लेकर चिंता जताई। इस बीच, करण जौहर के सपोर्टर्स ने अदालत के फैसले का स्वागत किया है।
क्या है आगे?
अंतरिम रोक लगने के बाद आगे की सुनवाई में अदालत यह तय करेगी कि यह मामला लंबी अवधि के लिए कितनी कठोर रोकों का हकदार है। यूट्यूबर, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और कानूनी विशेषज्ञों की निगाहें इस पर टिकी हैं कि डिजिटल स्पेस में अभिव्यक्ति की सीमा और ज़िम्मेदारी के बीच संतुलन कैसे स्थापित किया जाएगा।

