Summary: बजट 2026: क्या हुआ सस्ता, क्या हुआ महंगा — आम आदमी की जेब पर पूरा असर
बजट 2026 में सरकार ने कैंसर की दवाओं, ग्रीन एनर्जी, घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स और विदेश यात्रा को सस्ता कर आम लोगों को राहत दी है। वहीं शराब और शेयर बाजार की ट्रेडिंग पर बढ़े टैक्स से कुछ वर्गों का खर्च बढ़ सकता है।
Union Budget 2026 Key Highlights: केंद्रीय बजट 2026 पेश होते ही सबसे बड़ा सवाल यही है कि इसका असर आम आदमी की जेब पर कैसा पड़ेगा। हर साल की तरह इस बार भी सरकार ने टैक्स और ड्यूटी में कई बदलाव किए हैं, जिनका सीधा असर रोज़मर्रा की जरूरतों, इलाज, यात्रा और निवेश पर पड़ेगा।
इस बजट में एक तरफ सरकार ने इलाज, ग्रीन एनर्जी और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को सस्ता बनाने की कोशिश की है, वहीं दूसरी तरफ कुछ सेक्टर्स में टैक्स बढ़ाकर अतिरिक्त राजस्व जुटाने का रास्ता भी चुना गया है। आसान भाषा में समझते हैं कि बजट 2026 में क्या हुआ सस्ता, क्या हुआ महंगा और इसका आपकी जिंदगी पर क्या मतलब निकलता है।
हेल्थ सेक्टर में बजट की सबसे बड़ी राहत
बजट 2026 का सबसे मजबूत और मानवीय पहलू स्वास्थ्य से जुड़ा फैसला है। सरकार ने कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली 17 लाइफ सेविंग दवाओं पर बेसिक कस्टम ड्यूटी पूरी तरह खत्म कर दी है। इसके अलावा सात दुर्लभ बीमारियों के इलाज के लिए विदेश से मंगवाई जाने वाली दवाओं और स्पेशल न्यूट्रिशन फूड पर भी अब कोई टैक्स नहीं लगेगा।
भारत में गंभीर बीमारियों का इलाज पहले ही बेहद महंगा है और कई परिवार इलाज के खर्च के चलते आर्थिक संकट में फंस जाते हैं। ऐसे में यह फैसला न सिर्फ इलाज को सस्ता करेगा, बल्कि मरीजों और उनके परिवारों को मानसिक राहत भी देगा।

स्वास्थ्य सेक्टर में क्या हुआ सस्ता
कैंसर की 17 जरूरी दवाएं
7 दुर्लभ बीमारियों की दवाएं
खास मेडिकल न्यूट्रिशन और स्पेशल फूड
कुछ मेडिकल डिवाइस और इम्पोर्टेड उपकरण
घर और किचन का बजट
बजट 2026 में घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने पर खास जोर दिया गया है। इसी कड़ी में माइक्रोवेव ओवन बनाने में इस्तेमाल होने वाले कुछ खास पार्ट्स पर कस्टम ड्यूटी घटा दी गई है।
इसका सीधा मतलब यह है कि भारत में माइक्रोवेव बनाने की लागत कम होगी। हालांकि इसका असर बाजार में तुरंत न दिखे, लेकिन आने वाले महीनों में माइक्रोवेव ओवन की कीमतों में कमी आने की उम्मीद है।
घर के सामान में राहत
माइक्रोवेव ओवन (कीमतें धीरे-धीरे घट सकती हैं)
घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स का लोकल प्रोडक्शन बढ़ेगा
ग्रीन एनर्जी पर बड़ा दांव, EV और सोलर होंगे किफायती

सरकार ने साफ संकेत दिया है कि आने वाले सालों में ग्रीन एनर्जी उसकी प्राथमिकता रहेगी। बजट 2026 में इलेक्ट्रिक व्हीकल और सोलर एनर्जी सेक्टर को बड़ी राहत दी गई है।
लिथियम-आयन बैटरी और बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम से जुड़े कच्चे माल और मशीनों पर टैक्स छूट का दायरा बढ़ाया गया है। इसके साथ ही सोलर पैनल बनाने में इस्तेमाल होने वाले सोडियम एंटीमोनेट पर कस्टम ड्यूटी हटा दी गई है।
इससे इलेक्ट्रिक गाड़ियां, सोलर पैनल और एनर्जी स्टोरेज सिस्टम की लागत घटेगी और लंबे समय में ये तकनीकें आम लोगों की पहुंच में आ सकेंगी।
ग्रीन एनर्जी में क्या सस्ता होगा:
EV बैटरी
बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम
सोलर पैनल और उससे जुड़े उत्पाद
जूते और कपड़े…महंगाई पर लगाम की कोशिश

एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने लेदर, टेक्सटाइल और सी-फूड सेक्टर को टैक्स में राहत दी है। कच्चे माल पर ड्यूटी घटने से कंपनियों की उत्पादन लागत कम होगी।
अगर कंपनियां इस बचत का फायदा ग्राहकों तक पहुंचाती हैं, तो लेदर शूज़, स्पोर्ट्स शूज़ और कपड़ों के दाम कम हो सकते हैं या कम से कम उनमें तेज बढ़ोतरी नहीं होगी।
फैशन और रोज़मर्रा का सामान
जूते और स्पोर्ट्स शूज़
लेदर से बने उत्पाद
कपड़े और टेक्सटाइल आइटम
ट्रैवल लवर्स के लिए राहत
बजट 2026 में विदेश यात्रा करने वालों के लिए भी अच्छी खबर है। सरकार ने विदेशी टूर पैकेज पर लगने वाले TCS को घटाकर 2% कर दिया है। पहले यह खर्च की रकम के हिसाब से 5% से 20% तक था।
इस बदलाव से इंटरनेशनल ट्रैवल की कुल लागत कम होगी और विदेश घूमने का प्लान बनाना थोड़ा आसान हो जाएगा।
ट्रैवल से जुड़ी राहत:
विदेशी टूर पैकेज सस्ते
विदेश में पढ़ाई और यात्रा का खर्च कम
हवाई सफर के पीछे की लागत घटेगी
नागरिक उड्डयन को मजबूत करने के लिए सरकार ने एयरक्राफ्ट के पार्ट्स और कंपोनेंट्स पर कस्टम ड्यूटी खत्म कर दी है। डिफेंस और सिविल एविएशन दोनों के लिए MRO यानी मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल सस्ता होगा।
लंबे समय में इसका फायदा एयरलाइंस को मिलेगा और उम्मीद की जा रही है कि भविष्य में हवाई टिकटों पर भी इसका असर दिख सकता है।
निजी इस्तेमाल के लिए विदेशी सामान हुआ सस्ता
अब अपने निजी इस्तेमाल के लिए विदेश से सामान मंगवाना पहले से सस्ता हो जाएगा। सरकार ने ऐसे आयात पर लगने वाला टैक्स 20% से घटाकर 10% कर दिया है। यह फैसला ऑनलाइन इंटरनेशनल शॉपिंग करने वालों और विदेश से गैजेट या पर्सनल आइटम मंगाने वालों के लिए राहत भरा है।
अब बात महंगाई की…कहां बढ़ेगा खर्च
जहां एक तरफ बजट में राहत दी गई है, वहीं कुछ फैसले ऐसे भी हैं जो खर्च बढ़ा सकते हैं। शराब पर TCS को 1% से बढ़ाकर 2% कर दिया गया है। दुकानदार यह अतिरिक्त बोझ ग्राहकों पर डाल सकते हैं, जिससे शराब की कीमतें बढ़ सकती हैं।
इसके अलावा शेयर बाजार में फ्यूचर और ऑप्शन ट्रेडिंग पर लगने वाला सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) बढ़ा दिया गया है। इससे निवेशकों को हर सौदे पर ज्यादा टैक्स देना होगा।
महंगा क्या होगा:
शराब
फ्यूचर ट्रेडिंग
ऑप्शन ट्रेडिंग
GST और कीमतें

ज्यादातर चीज़ों की कीमतें सीधे बजट से नहीं, बल्कि GST काउंसिल के फैसलों से तय होती हैं। सितंबर 2025 से GST के चार स्लैब घटाकर सिर्फ दो कर दिए गए हैं—5% और 18%। इसका फायदा पहले ही कई रोज़मर्रा की चीज़ों पर दिख चुका है और आगे भी कीमतें स्थिर रहने की उम्मीद है।
बजट 2026 साफ तौर पर यह दिखाता है कि सरकार का फोकस इलाज को सस्ता करने, ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग मजबूत करने पर है। हालांकि शराब और शेयर ट्रेडिंग जैसे सेक्टर्स में टैक्स बढ़ा है, लेकिन रोज़मर्रा की जरूरतों और स्वास्थ्य से जुड़े फैसले आम लोगों के लिए राहत लेकर आते हैं।
