Happy family indoors, parents pushing their two young daughters sitting inside cardboard boxes on a wooden floor.
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Summary: गलतियाँ करने की आज़ादी क्यों ज़रूरी है

हेलिकॉप्टर पेरेंटिंग छोड़कर बच्चों को स्वतंत्रता और निर्णय लेने की आज़ादी देना उनकी आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास को मजबूत बनाता है। सीमित निगरानी, भरोसा और अनुभवों से सीखने का अवसर उन्हें जीवन में ऊंची उड़ान भरने में मदद करता है।

Independent Parenting: आज की तेज़ रफ़्तार दुनिया में माता-पिता अक्सर अपने बच्चों की सुरक्षा और सफलता को लेकर इतना चिंतित हो जाते हैं कि वे उनके हर काम के बीच में आने लगते हैं। इसे ही हेलीकॉप्टर पेरेंटिंग कहा जाता है। माता-पिता की ये आदतें बच्चे को असुरक्षित, दूसरों पर निर्भर और निर्णय लेने में कमजोर बना देती हैं। इसलिए ज़रूरी है कि माता-पिता ठीक तरह से संतुलन बनाते हुए बच्चों को सीखने और गलतियाँ करने की थोड़ी आज़ादी दें, ताकि वे

आत्मनिर्भर और मजबूत व्यक्तित्व के साथ बड़े हो सकें।

a mother sitting with her kid in lighteing tent
Balanced Parenting for Kids

स्वतंत्रता की शुरुआत घर से होती है। बच्चे की उम्र के अनुसार उसे घर के आसान से काम सौंपें। बच्चों के लिए अपना बैग तैयार करना, स्कूल की यूनिफ़ॉर्म ठीक तरह से रखना , खिलौने समेटना जैसे काम आसान होते हैं। उम्र बढ़ने के साथ कामों की कठिनाई को बढ़ाएं ताकि बच्चा हर तरह के काम को आसानी से कर सके। इस तरह बच्चों में निर्णय लेने की क्षमता विकसित होती है।

कई बार हम बच्चों को गलतियाँ करने से रोकते हैं, पर वही गलतियाँ उनके लिए जीवन का सबसे बड़ा पाठ बन सकती हैं। बच्चा अपना होमवर्क भूल जाए तो अगली बार वह खुद सावधान रहेगा। जब बच्चे छोटी उम्र से फैसले लेना और उनके परिणामों का सामना करना सीखते हैं, तो वे आगे चलकर आत्मविश्वासी और समझदार बनते हैं। माता-पिता की भूमिका मार्गदर्शन की होनी चाहिए, नियंत्रण की नहीं।

हर समय बच्चे पर नज़र रखना, उसकी हर बात में रोक-टोक करना या बार-बार निर्देश देने से उसे महसूस होता है कि आप उस पर भरोसा नहीं करते। ऐसा करने की जगह उसके अच्छे कामों की तारीफ़ करें विश्वास जताएँ कि वह काम संभाल सकता है। याद रखें, ज्यादा देख-रेख बच्चे को कमजोर बनती  है, जबकि तय सीमा में दी गयी आजादी उसे मजबूत बनाती है।

स्वतंत्रता का मतलब बच्चे को अकेला छोड़ देना नहीं है। इसका अर्थ है उसे अपने विचार रखने का मौका दें और उसकी भावनाओं को समझें। रोज़ उससे बातचीत करें, उसकी राय पूछें,उसकी समस्याओं का हल साथ मिलकर निकालें। जब बच्चे को लगता है कि उसके माता-पिता उसे समझते हैं और गलती करने पर भी साथ देंगे, तब वह आत्मविश्वास से भरा हुआ निर्णय लेता है।

a family of three cheering up
Raise thinkers, not followers

हेलीकॉप्टर पेरेंटिंग से बचना और बच्चे को स्वतंत्र बनाना एक समझदारी भरा फैसला है। बच्चे को हमेशा अवसर दें, अलग-अलग जिम्मेदारियाँ दें, निर्णय लेने की आजादी दें और सबसे ज़रूरी है हर तरह से उस पर भरोसा दिखाएँ। यही वह नींव है जो उसे जीवनभर आत्मनिर्भर, सक्षम और खुशहाल बनाये रखेगी और साथ ही माता-पिता की अहमियत भी समझाएगी।

नई जगह पर जाना, खेलना, दोस्तों से मिलना, प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना, नयी चीजें सीखना। ये सारे अनुभव बच्चों को मजबूत बनाते हैं। उन्हें हर डर से बचाने के बजाय उन्हें डर का सामना करना सिखाना ज्यादा अच्छा है। इस तरह बच्चा निडर बनता है।

जब बच्चे को अपने विचार रखने, निर्णय लेने और नई चीजें आज़माने की आज़ादी मिलती है, तो उसका दिमाग रचनात्मक चीजें करना सीखता है। वह नए-नए विचार सोचता है, समस्याओं का हल ढूंढता है और खुद को आजाद महसूस करता है।

उत्तराखंड से ताल्लुक रखने वाली तरूणा ने 2020 में यूट्यूब चैनल के ज़रिए अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद इंडिया टीवी के लिए आर्टिकल्स लिखे और नीलेश मिश्रा की वेबसाइट पर कहानियाँ प्रकाशित हुईं। वर्तमान में देश की अग्रणी महिला पत्रिका...