Summary: टीनएज में झूठ की बढ़ती वजहें
किशोरावस्था में झूठ बोलना स्वतंत्रता की चाह, डाँट के डर, पहचान की तलाश और प्राइवेसी की जरूरत के कारण बढ़ता है। संवाद, विश्वास और संतुलित नियम इससे निपटने में मदद करते हैं।
Why Teens Lie and how parents can fix: किशोरावस्था, इस उम्र में बच्चों के अंदर तेजी से बदलाव आते हैं। यह बदलाव न सिर्फ शारीरिक और मानसिक होते हैं, बल्कि भावनात्मक और सामाजिक रूप से भी इनके अंदर कई बदलाव नजर आते हैं, जैसे स्वतंत्रता की खोज, अपनी पहचान, अहम का विकास। टीनएज के दौरान बच्चों के व्यवहार में आए यह बदलाव कारण बनते हैं उनके झूठ बोलने का। किशोरावस्था के दौरान बच्चों का झूठ बोलना एक आम समस्या है, परंतु समय रहते अगर इसे ना संभाला जाए तो यह एक बड़ी परेशानी बन सकता है। आईए जानते हैं इस लेख में माता-पिता किस तरह अपने बच्चों को संभाल सकते हैं।
किशोरावस्था में झूठ बोलने की आदत का कारण
माता-पिता का अत्यधिक कठोर व्यवहार: जब माता-पिता अपने बच्चों के साथ अधिक कठोर व्यवहार दिखाते हैं। उनके हर छोटी-छोटी गलतियों पर डांटे या पीटते हैं तो बच्चे माता-पिता से डांट बचने के लिए झूठ का सहारा लेते हैं।
स्वतंत्रता की इच्छा: इस उम्र में बच्चे अपने फैसले खुद लेना चाहते हैं। अपनी इच्छा अनुसार कार्य करना चाहते हैं। ऐसे में जब उन्हें लगता है माता-पिता उनकी बातों को नहीं मानेंगे तो वह झूठ बोलते हैं।
दूसरों को प्रभावित करने के लिए: किशोरावस्था में बच्चों के अंदर खुद को अच्छा और प्रभावी दिखाने की इच्छा बढ़ जाती है। जिस कारण वह अपने दोस्तों से झूठ बोलते हैं।

सजा से बचने के लिए: अगर बच्चे को कभी लगे कि वह किसी गलती के कारण सजा पा सकता है तो वह उससे बचने के लिए झूठ बोलता है।
दोस्तों का प्रभाव: अगर बच्चे की दोस्ती ऐसे लोगों से है जो झूठ बोलते हैं, नियम नहीं मानते तो इसका असर टीनएजर पर पड़ता है। वह इस आदत को सामान्य मानकर वह भी झूठ बोलते हैं।
निजता के सुरक्षा के लिए: टीनएज में बच्चे अपनी बहुत से निजी बातों को छुपाने के लिए अपने माता-पिता और परिवार से झूठ बोलते हैं।
झूठ बोलने की आदत को कैसे ठीक करें पेरेंट्स
सजा के बजाय संवाद को अपनाएं: अगर बच्चा कोई गलती करता है और आपको उसके बारे में बताता है उस समय उसे तुरंत डांटने या सजा देने की बजाय, उससे बात करें। उसे समझाएं, आपने सच कहा बहुत अच्छी बात है परंतु जो गलती आपसे हुई है अब उसे सुधारने पर काम करेंगे।
अपने और बच्चे के बीच विश्वास को बढ़ाएं: आपका बच्चा यह विश्वास करें कि वह आपसे अपनी सारी बातें कह सकता है बिना डरे। बच्चों के अंदर इस तरह का विश्वास बढ़ाने का एक तरीका यह है कि पेरेंट्स बच्चों की समस्या पर समझ से काम ले। डांटने या चिल्लाने की बजाय प्यार से समझाएं।
बच्चों की बातों को ध्यान से सुने: अगर बच्चा आपसे अपनी समस्या के बारे में बात कर रहा हो या अपनी भावना बता रहा हो उस समय उसे रोकने की बजाय पहले उसकी बातों को ध्यान से सुने, उसके बाद अपनी बात कहें। इससे बच्चा समझता है, उसकी बाद समझी जाती है और वह झूठ नहीं बोलता।
इन बातों का ध्यान रखें पेरेंट्स
छोटी बातों पर ज्यादा प्रतिक्रिया न दें: अगर बच्चा कभी क्लास मिस कर दे या फिर किसी परीक्षा में थोड़े कम नंबर लेयर या कभी खेल में अच्छा प्रदर्शन न कर पाए तो इस पर बहुत ज्यादा गुस्सा ना करें। ऐसा करना बच्चों को झूठ बोलने के लिए प्रेरित करता है।
बच्चों के प्राइवेसी का ध्यान रखें: आप बच्चे से बिना पूछे उनकी पर्सनल डायरी या मोबाइल की जांच ना करें। उनके कमरे में जाने से पहले डोर नॉक करके आज्ञा ले। आपकी यह छोटी आदतें उन्हें झूठ बोलने से रोक सकते हैं।
स्पष्ट नियम बनाएं: बच्चा किस तरह के लोगों से दूर रहे, किस तरह के कपड़े पहने, देर रात घर से बाहर नहीं रहना, फोन कितनी देर चलना है, किससे और कब चैट करना है, यह सभी नियम बच्चों को साफ शब्दों में बताएं।
माता-पिता खुद भी झूठ बोलने या बातें छुपाने से बचें। बच्चा वही सीखता है जो वह देखता है।
