श्रुति की सहेली सुरभि जब मां बनी तो श्रुति के मन में भी इच्छा जागी कि उसका भी मां बनने का समय आ गया है। उसने अपने पति से यह बात कही तो उसने सीधे मना कर दिया कि वह अभी बच्चे के लिए तैयार नहीं है। लेकिन श्रुति ने जिद ठान ली और कुछेक महीने के बाद वह गर्भवती थी। शुरुआत में श्रुति के पति ने इस बदलाव को मानने से इनकार कर दिया, हालांकि यह बात अलग है कि बाद में धीरे- धीरे वह भी बच्चे के लिए तैयार हो गया। माता- पिता बनना किसी भी रिश्ते का एक बड़ा कदम है। बच्चे के लिए तैयार होना पति और पत्नी दोनों के लिए जरूरी है क्योंकि एक बच्चा किसी के भी जीवन में इतने सारे उतार- चढ़ाव और बदलाव लेकर आता है कि इसके लिए पर्याप्त तैयारी करनी जरूरी है। आर्थिक सुदृढ़ता, टिकाऊ नौकरी के अलावा सबसे जरूरी तैयारी मानसिक और भावनात्मक तौर पर तैयार होना है। गर्भावस्था होने वाली मां के लिए सबसे कठिन दौर है और फुल- टाइम नौकरी भी। इसलिए मां बनने से पहले अपने जीवन में झांक कर यह देखने की आवश्यकता है कि क्या आप भावनात्मक रूप से तैयार हैं। मां बनने की तैयारी से पहले कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना जरूरी है।

भावनात्मक तौर पर तैयार

 

गर्भावस्था आपका अधिकतर समय ले लेता है। हो सकता है कि आपको जिन चीजों से बहुत प्यार हो, आप वह करने में असमर्थ हो जाएं। यदि आप अपने फिगर को लेकर बहुत ज्यादा सतर्क हैं तो गर्भावस्था के बाद आप शायद खुद को आईने में देखना भी नहीं चाहेंगी। गर्भावस्था हार्मोन्स न केवल आपके मस्तिष्क बल्कि आपकी भावनाओं के साथ भी खेलते हैं। बिना किसी कारण के आप उदास हो सकती हैं या गुस्सा कर सकती हैं। चीजों को अपनी मर्जी से न करने की वजह से चिड़चिड़ी हो सकती हैं। वास्तव में आपकी जीवनशैली में भी बड़ा बदलाव आ जाता है, जिसे आसानी से स्वीकार करना मुश्किल हो जाता है। यदि आपको तेज भागती जिंदगी को जीना पसंद है तो गर्भावस्था इस पर लगाम लगा देता है।

मां बनने के लिए तैयार

यदि आपको अपने हिसाब से चीजें करने की आदत है तो मां बनना आपके लिए निस्संदेह तौर पर आमूचूल बदलाव लेकर आएगा। आपको पूरे दिन अपने पैरों पर रहना होगा क्योंकि बच्चे को 24 घण्टे आपकी जरूरत रहती है। दूध पिलाना, स्नान कराना, डकार दिलवाना, कपड़े- नैप्पी बदलना, इस सबमें पूरा दिन कब गुजर जाता है, पता नहीं चलता। बच्चा खुद से यह सब कर सके, इसके लिए उसका कम से कम तीन साल का होना जरूरी है। तब तक यह सब काम मां को करने पड़ते हैं। अगर आपके साथ कोई मदद करने वाला ना हो तो कुछ समय के लिए आपको अपने करियर को भी भूलना पड़ता है।

अपने समय का समर्पण

 

देर तक किताब लेकर बैठे रहना, फोन पर अपने सहेली से बातें करना, खरीदारी के लिए बार- बार मॉल जाना, यह सब बीती बातें हो जाती हैं। बच्चे के साथ यह सब करना लगभग न होने वाली चीजें हैं। यदि आप कार चलाती हैं तो यह भी आप भूल ही जाइए। कुछ दिनों के लिए पार्लर जाना भी भूल ही जाना सही है। आपके दोस्त आपके शिकायत करेंगे कि मिलना तो दूर, आपके पास फोन पर बातें करने का भी समय नहीं है। कुछ महीने का बच्चा हो जाए, उसके बाद ही आप मनपसंद फिल्म देख सकती हैं। यह याद रखना जरूरी है कि चीजें पहले जैसी नहीं रहेंगी, काफी कुछ बदल जाएगा। शुरुआत के कुछेक साल के बाद ही आपको धीरे- धीरे चीजें पहले जैसी होती मिलेंगी।

अनजान के लिए हों तैयार

 

 

बतौर एक मां आपके जीवन में कुछ ऐसी स्थितियों का सामना करना पड़ेगा, जिसके लिए आप तैयार नहीं होंगी। कई बार ऐसा समय भी आएगा, जब आपको समझ में नहीं आएगा कि आपको क्या करना चाहिए। वैसे समय में यह महत्वपूर्ण है कि आप अपने बच्चे और अपने स्वास्थ्य के बारे में पहले सोचें और सकारात्मक सोच रखें। यदि बच्चे को लेकर कोई समस्या हो रही है तो बेहतर होगा कि आप किसी और की सुनने की बजाय पेडियाट्रिशियन की सुनें। वे ही आपको सही समस्या और उसका निदान बताएंगे।

जरूर लें सलाह

 

आपको ऐसे कई लोग मिल जाएंगे, जो पहले से उस दौर से गुजर चुके हैं। हालांकि सबके लिए गर्भावस्था का दौर एक सा नहीं होता लेकिन फिर भी आपको उन लोगों से कुछ सलाह जरूर मिल सकती है। आप उनसे समय प्रबंधन के बारे में तो जरूर पूछ सकती हैं, जिसकी आवश्यकता आपको सबसे ज्यादा होगी। साथ ही यदि आप बच्चे के जन्म के कुछेक महीने बाद ऑफिस जाने की सोच रही हैं तो बेहतरीन डे- केयर की सूची भी उनकी सलाह से बना सकती हैं।

भावनाओं का प्रबंधन

आप चाहें गुस्सा हैं या उदास, बच्चे के सामने आपको सामान्य रहना चाहिए क्योंकि उस पर आपके खराब मूड का असर नहीं पड़ना चाहिए। आपको कोई और रास्ता ढूंढना होगा जहां आप अपनी भड़ास निकाल सकें। सच तो यह है कि आपका बच्चा आपके लिए शांत होने की वजह होना चाहिए। कई मांएं अपने बच्चे के साथ खेलकर या समय व्यतीत करके शांत और सुरक्षित महसूस करती हैं। यदि आपको बच्चे के साथ रहने पर तनाव हो रहा है तो कुछ समय के लिए बच्चे को देखने के लिए किसी की मदद ले लें, जब तक कि आपका मूड न ठीक हो जाए। मां होने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आपको खुद को भूल जाना है। यह जरूर है कि आपका अधिकतर समय बच्चे के साथ ही बीतेगा लेकिन अपने लिए भी अलग से समय निकालना उतना ही जरूरी है। मां बनना कभी भी मुश्किल नहीं हो सकता, यदि आपको हर तरह से भावनात्मक सहयोग मिले।

 

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