कोरोना के इस खराब दौर में पेरेंट्स की चिंता में इजाफा हो गया है। ऐसे में जरूरी है कि हम अपने बच्चे को इमरजेंसी के लिए तैयार करें। चाहे पेरेंट्स को किसी जरूरी काम के लिए घर से बाहर जाना हो या फिर वैक्सीन लगवाने ही कुछ घंटे के लिए घर से बाहर जाना हो, बच्चों को एकदम अकेले छोड़कर जाना खतरनाक हो सकता है। यह समय ऐसा है कि आप अपने बच्चे को किसी जान- पहचान वालों के घर भी नहीं छोड़ सकते। ऐसी और भी कई वजहें हैं, जिनके कारण यह जरूरी हो जाता है कि आप अपने बच्चे को इमरजेंसी के लिए तैयार रखें।

बच्चे के लिए उसका घर एक्सपेरिमेंट से कम नहीं होता। एक ओर जहां इलेक्ट्रिक अप्लायंसेज बच्चों को आकर्षित करते हैं तो खाना पकाने वाली गैस चूल्हा का नॉब भी उसकी नजर में होता है। इससे भी बुरा यह कि खुली बालकनी उसे बाहर निकलने का रास्ता प्रतीत होती है। यदि घर में एक हाइपर एक्टिव बच्चे को अकेले रहना हो तो वह परेशानी में फंस सकता है। इसलिए बतौर एक मां आपकी यह कोशिश होनी चाहिए कि आप अपने बच्चे को इमरजेंसी के लिए पहले से तैयार करके रखें। आने वाले समय में भले ही कोई भी खतरे के जाल में फंस सकता है और एक नन्हे के लिए यह खतरा जानलेवा साबित हो सकता है। अपने घर को सुरक्षित रखना और उसे किसी भी तरह की स्थिति के लिए तैयार करना आपकी जिम्मेदारी है। 

फोन बुक

यदि आपका बच्चा इतना बड़ा है कि वह पढ़- लिख सकता है तो उसके लिए एक फोन बुक तैयार करें, जिसमें सारे इमरजेंसी नंबरों के साथ घर के लोगों, रिश्तेदारों और दोस्तों का नंबर लिखा हो। ध्यान दें कि वह लगातार फोन बुक देखता रहे और उसे पता हो कि घर या स्कूल में इमरजेंसी होने पर उसे किसे पहले फोन करना है। हम मोबाइल फोन को भले ही बुरा मानें लेकिन बच्चों को कम उम्र में ही मोबाइल फोन मिलने से यह आसान हो गया है। जब कोई भी आस- पास न हो और वह मुसीबत में हो तो उसे नंबर डायल करना आना चाहिए। पुलिस स्टेशन, फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस के नंबर भी उसे पता होने चाहिए। उसे यह भी सिखाएं कि किस तरह की स्थिति में किस नंबर पर फोन करना है। स्पीड डायल करना भी सिखाएं।

अलर्ट रहना

बच्चों के लिए तो यह बहुत आसान है कि वे तुरंत आकर्षित हो जाते हैं। सबसे पहले तो यह सुनिश्चित करें कि वह मोबाइल फोन कम ही देखे। अगर वह देखता भी है तो उसे इयर फोन का इस्तेमाल कम से कम करने के लिए कहें, खसकर तब जब वह घर पर अकेला या अपने कमरे में अकेला हो। उसे बताएं कि जब भी वह अपने आस- पास कुछ अनोखा या अजूबा या असामान्य चीज देखे तो तुरंत उसे नोट करे और घर में किसी को बताए। अगर वह घर पर अकेला है तो तुरंत फोन करके किसी ना किसी को बताए। 

मुसीबत में क्या करें

मुसीबत की स्थिति में फोन करने के अलावा उसे क्या करना चाहिए, यह भी उसे बताएं। उदाहरण के तौर पर, घर से बाहर कैसे निकलना है। यदि घर में आग लग गई हो तो किस तरह से अपने चेहरे और  à¤¶à¤°à¥€à¤° के बाकी अंगों को ढक कर रखना है। यदि घर में किसी को अटैक आ जाए तो कहां फोन करना है।

फर्स्ट एड किट की जानकारी

अमूमन बच्चों को यह बिल्कुल नहीं सिखाया जाता कि फर्स्ट एड किट का कैसे इस्तेमाल करना चाहिए, जबकि यह बेहद जरूरी है।  उन्हें फर्स्ट एड किट के बारे में बताएं कि उसमें क्या- क्या चीजें होती हैं और यह किट आपके घर के किस कोने में रखी है। उन्हें उन चीजों को हैंडल करना सिखाएं, उनका इस्तेमाल कैसे करना है, यह भी बताएं। 

सुरक्षा नियमों का ज्ञान

यह सुनने में काफी आसान लग रहा होगा लेकिन यह जरूरी है कि आप अपने लाडले के साथ शांति से बैठकर उसे सुरक्षा के नियमों के बारे में बताएं। उसे समझाएं कि दरवाजे बंद करके रखकर, किसी बाहरी को घर में प्रवेश न देकर और पुलिस को फोन करके वे सुरक्षित रह सकते हैं। यदि आपका बच्चा बड़ा है तो उसे यह सब लिखकर रखने के लिए कहें। साथ ही यह भी बताएं कि उसे यह सब अपने दोस्तों से भी बांटना चाहिए। इस सूची में गैस चूल्हे के नजदीक न जाना, दरवाजे बंद रखना, खुली बालकनी में न जाना जैसी चीजें शामिल होनी चाहिए। उसे बताएं कि असल में इमरजेंसी का क्या अर्थ है। मुश्किल शब्दों की बजाय उसे उदाहरण देकर यह सब समझाएं। उसे बताएं कि किस तरह की चीजें वह छू सकता है और  à¤•िस तरह की चीजें मसलन गैस नॉब, तार, प्लग, चाकू वगैरह छूना मना है।

बाथरूम और किचन की सुरक्षा

आपके बच्चे के लिए आप आदर्श हैं। आप जो भी करती हैं, वह वही करना चाहता है। यह सब देखकर आप खुश भी होती हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि अकेले होने की स्थिति में भी वह यही सब करना चाहेगा। बाथरूम में प्लग लगाना, गैस चूल्हे का नॉब ऑन करना उसके लिए मुसीबत ला सकता है। इसलिए, चाकू, छुरी, इलेक्ट्रिक तार, प्लग, कैबिनेट, ड्रॉअर आदि से उसे दूर रहना सिखाएं। फ्रिज और  à¤µà¥‰à¤¶à¤¿à¤‚ग मशीन जैसे इलेक्ट्रिक उत्पादों से भी उसका दूर रहना बेहतर है। यदि आपका लाडला बहुत छोटा है तो बेहतर होगा कि आप इन चीजों को लॉक करके रखें।

इमरजेंसी खेल

बच्चों को ट्रेनिंग देने के लिए घर पर उनके साथ नकली इमरजेंसी खेल खेलिए और उसका अभ्यास कराइए। विशेष सुरक्षा के चिह्न, मॉक ड्रिल वगैरह से उसे चीजों के बारे में स्पष्ट तौर पर पता हो जाएगा। वह यह सीखेगा कि किसी भी स्थिति में पैनिक करने की बजाय उस स्थिति से कैसे निपटना है। इस संबंध में कुछ ऑनलाइन खेल भी मौजूद हैं, जिनसे आप बच्चों को यह सब सिखा सकती हैं।

पब्लिक प्लेस पर व्यवहार

यह हम सबकी आदत हो गई है कि हम हर समय मोबाइल फोन में घुसे रहते हैं। ऐसे में जरूरी है कि हम पब्लिक प्लेस पर ऐसा न करें और अपने बच्चों को भी ऐसा न करना सिखाएं। अमूमन देखा गया है कि पेरेंट्स शॉपिंग कर रहे हैं और बच्चे मोबाइल पर गेम खेल रहे हैं। कई दफा आप बच्चे को बोलकर स्टोर के अन्य कोने में चली जाती हैं लेकिन उसे इस बात का पता ही नहीं होता। ऐसी स्थिति में बच्चा परेशान ना हो, इसके लिए उसे पब्लिक प्लेस पर सही व्यवहार करना सिखाएं। उसे यह भी बताएं कि पब्लिक प्लेस पर उसे अलर्ट रहना है, न कि अपने में खोए रहना है।

 

ये भी पढ़ें – 

न कहें बच्चों से ये 10 बातें 

कौन हैं मिलेनियल पेरेंट्स? जानें क्या है इनकी विशेषताएं 

 

पेरेंटिंग सम्बन्धी यह आलेख आपको कैसा लगा ?  à¤…पनी प्रतिक्रियाएं जरूर भेजें। प्रतिक्रियाओं के साथ ही पेरेंटिंग से जुड़े सुझाव व लेख भी हमें ई-मेल करें- editor@grehlakshmi.com