summary: किशोर की गलत दोस्ती: माता-पिता क्या करें
किशोर गलत दोस्ती में फँस जाए तो गुस्से नहीं, संवाद, भरोसा, सीमाएँ और सकारात्मक माहौल से स्थिति सुधरती है। माता-पिता की समझ सबसे ज़रूरी होती है।
Teenager in Bad Company: किशोरावस्था बच्चों के विकास का ऐसा चरण है जिसमें बच्चा ना तो बहुत ज्यादा समझदार होता है ना ही नासमझ। बच्चे को इस उम्र में दोस्तों की अधिक जरूरत महसूस होती है। वह अपने दोस्तों के साथ खेलने के अलावा अपनी सीक्रेट्स भी शेयर करते हैं। इस उम्र में दोस्ती सिर्फ साथ तक सीमित नहीं है। बल्कि बच्चों की दोस्ती उसके व्यवहार और फैसले तक को प्रभावित करता है। ऐसे में अगर बच्चा किसी गलत दोस्त के संगत में पड़ जाए तो वह गलत आदतों का शिकार हो जाता है। ऐसे में माता-पिता चिंतित हो जाते हैं। आइए इस लेख में जानते हैं, अगर बच्चा गलत दोस्त से जुड़ जाए तो माता-पिता क्या करें।
किशोरावस्था में क्यों बच्चे गलत संगत में पड़ते हैं

किशोरावस्था के दौरान बच्चे शारीरिक और मानसिक बदलावों से गुजर रहे होते हैं। यह, वह समय है, जब बच्चा खुद को बड़ा समझने लगता है। उसके अंदर स्वतंत्रता की इच्छा होती है। प्राइवेट पार्ट्स का विकास हो रहा होता है, जिसके कारण वह भावनात्मक रूप से भी बदलाव से गुजरते हैं। अपने और दूसरों के शरीर के बारे में जिज्ञासा होती है। सोशल मीडिया, फिल्म या वेब सीरीज में देखे गए इंटिमेसी सीन उनके अंदर के जिज्ञासा को और अधिक बढ़ा देती है। यही बदलाव और भावनाएं इसके बारे में वह अपने परिवार से नहीं बात कर पाते। इस समय उन्हें जरूरत होती है एक दोस्त की और ऐसे में अगर एक गलत व्यक्ति उनका दोस्त बन जाए तो बच्चा गलत आदतों में पड़ जाता है। इस स्थिति में बच्चा इतना समझदार नहीं होता कि वह सही फैसला ले सके और वह अपने गलत दोस्त को अपना शुभचिंतक समझ लेता है, क्योंकि बच्चा उस व्यक्ति से अपने मन की बात कह पाता है।
कैसे पहचाने बच्चा गलत संगत में है
अगर बच्चे के व्यवहार में अचानक बदलाव आता है। बच्चा पहले से ज्यादा चिड़चिड़ा रहता है। उसे गुस्सा जल्दी आ जाता है। बात-बात पर झूठ बोलता है या आपसे दूरी बनता है। बात नहीं मानता। बच्चे का पढ़ाई में मन नहीं लगता। स्कूल से शिकायतें बढ़ जाती है। बच्चा देर तक घर से बाहर रहता है। अपने बाहर रहने के कारण को छुपाता है। आपसे छुप कर फोन का उपयोग करता है या फोन पर बातें करता है। उसके बोलने में अचानक गलत शब्दों का प्रयोग बढ़ गया है। अगर आपके बच्चे में इनमें से कोई भी तीन चार आदत दिख रहे हैं तो समझ लें आपको इस पर ध्यान देने की जरूरत है।
कैसे संभाले पेरेंट्स इस स्थिति को
अगर आपके बच्चे में बदलाव नजर आ रहा है तो उन्हें डांटने या सीधा आरोप लगाने के बजाए शांत स्वभाव में उन्हें जानकारी दें। उन्हें कहे इन दिनों मैं तुम्हारे स्वभाव में गलत बदलाव देखकर रही हूं जो कि अच्छा नहीं है। मैं तुम्हारी सुरक्षा के लिए चिंतित हूं, अपने स्वभाव को सुधारने पर तुम्हें ध्यान देना चाहिए इसमें मैं तुम्हारी मदद करूंगी।
बच्चों के लिए सीमाएं तय करें। इसे आज्ञा के बजाए दिनचर्या की तरह बनाएं। जैसे बच्चे का घर आने का समय, खेलने का समय, फोन उपयोग करने का समय और तरीका साफ शब्दों में तय होना चाहिए। सीमाएं तय करते हुए बच्चे को समझाएं यह तुम्हें रोकने के लिए नहीं है बल्कि तुम्हारे अच्छे और सुरक्षित भविष्य के विकास के लिए है।
बच्चा गलत संगत में ना पड़े इसके लिए उसके खाली समय में किसी खेल, आर्ट, म्यूजिक क्लास में डालें। परिवार में सकारात्मक माहौल बनाए। बच्चों के सामने झगड़ा, उपेक्षा, अपशब्द बचे। बच्चे का सबसे पहले स्कूल उसका घर होता है। बच्चे का विकास स्वस्थ हो इसके लिए घर का माहौल तनाव रहित होना जरूरी है।
