Kerala Best actress award winner Shamla Hamza
Kerala Best actress award winner Shamla Hamza

Summar: केरल की शमला हम्ज़ा को बेस्ट एक्ट्रेस अवॉर्ड

छह महीने की बेटी के साथ शूटिंग जैसी चुनौतियों को पार करके शमला हम्जा ने केरल स्टेट फिल्म अवॉर्ड में बेस्ट एक्ट्रेस का सम्मान हासिल किया।

Who is Shamla Hamza: मलयालम सिनेमा की दुनिया में इन दिनों एक नई और दमदार आवाज गूंज रही है शमला हम्जा। केरल के पलक्कड़ ज़िले के त्रिथाला की रहने वाली शमला कभी रेडियो की दुनिया में अपनी आवाज से श्रोताओं का दिल जीतती थीं। आज वही शख़्सियत बड़े पर्दे पर अपनी अदाकारी से लोगों के दिलों पर राज कर रही है। फिल्म ‘फेमिनिची फातिमा’ में उनके अभिनय ने न सिर्फ दर्शकों को भावुक किया, बल्कि उन्हें केरल स्टेट फिल्म अवॉर्ड्स में बेस्ट एक्ट्रेस का सम्मान भी दिलाया।

फ़ातिमा के किरदार में दिखीं शमला

इस फिल्म में शमला हम्जा फातिमा के किरदार में नजर आती हैं, एक ऐसी महिला जो पूरी निष्ठा से अपने पति, बच्चों और ससुराल की जिम्मेदारियाँ निभाती है। उसकी दुनिया केवल परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है, लेकिन एक छोटा-सा घटना-क्रम उसके भीतर बदलाव की चिंगारी जगा देता है। उसे एहसास होता है कि जीवन सिर्फ सेवा और कर्तव्य तक सीमित नहीं, बल्कि अपनी पहचान और स्वतंत्रता का हक भी उतना ही जरूरी है। फातिमा का अपने अस्तित्व को तलाशने वाला यह सफर भावनाओं से भरा, बेहद वास्तविक और प्रेरणादायक तरीके से फिल्म में पेश किया गया है।

अपने अभिनय से हर किसी को किया चकित

Actress Shamla Hamza
Actress Shamla Hamza

32 वर्षीय फेमिनिची फातिमा की स्टार शमला हम्ज़ा ने मलयालम सिनेमा में कदम रखने से पहले पूरे 11 साल दुबई में काम किया। ‘फेमिनिची फातिमा’ में शमला ने एक ऐसी महिला का किरदार निभाया है, जो बाहर से शांत और साधारण दिखती है, लेकिन उसके भीतर भावनाओं का समंदर उमड़ता रहता है। घर की चार दीवारों में क़ैद जीवन, भीतर पलते सपने, दर्द, संघर्ष और टूटने के बावजूद खड़े रहने का साहस, शमला ने इन भावनाओं को इतनी गहराई से जिया कि दर्शक उनके किरदार के साथ खुद को महसूस करने लगे। उनकी परफ़ॉर्मेंस सिर्फ अभिनय नहीं बल्कि जीवन का आईना लगती है। इस किरदार ने उन्हें उस मुकाम पर पहुंचा दिया है जहां लोग सिर्फ एक एक्ट्रेस नहीं, बल्कि एक सशक्त महिला की आवाज के रूप में उन्हें देख रहे हैं।

छह महीने की बेटी के साथ शूटिंग

फिल्म की शूटिंग के दौरान शमला की बेटी केवल छह महीने की थी। एक तरफ मां होने की जिम्मेदारी, दूसरी तरफ कैमरे के सामने भावनाओं को पूरी सच्चाई से जीने का दबाव, लेकिन उन्होंने दोनों भूमिकाएं बखूबी निभाईं। शमला बताती हैं कि छोटे बच्चे के साथ शूट करना चुनौतीपूर्ण था, पर उनकी टीम ने उन्हें समझा और हर कदम पर सहयोग किया। वह कहती हैं, “मां होना मेरी ताकत है, और फिल्म की टीम ने इस जिम्मेदारी को बोझ नहीं बनने दिया। यह अनुभव उनके लिए केवल शूटिंग नहीं था, बल्कि आत्मविश्वास, धैर्य और महिला शक्ति का प्रतीक बन गया।

उन आवाज़ों की प्रवक्ता जो अक्सर दब जाती हैं

फिल्म में शमला सिर्फ अभिनय नहीं करतीं, वह उन अनकही कहानियों को आवाज देती हैं जो समाज की परतों में दबकर रह जाती हैं। उनकी परफ़ॉर्मेंस उन महिलाओं का प्रतिनिधित्व करती है जो बोलती तो नहीं, लेकिन हर दिन अपनी दुनिया से जूझती हैं, सपने देखती हैं और चुपचाप आगे बढ़ती रहती हैं। इसीलिए आज शमला हम्जा सिर्फ एक अवॉर्ड जीतने वाली अभिनेत्री नहीं, बल्कि लाखों महिलाओं की भावनात्मक आवाज़ बन गई हैं।

रेडियो जॉकी से फिल्मी दुनिया तक

शमला का सफर आसान नहीं रहा। उन्होंने अपना करियर एक रेडियो जॉकी के रूप में शुरू किया और अपनी आवाज़ से पहचान बनाई। आवाज़ के इस जादू को उन्होंने अभिनय में ढाला और परदे पर भी अपनी भावनाओं की ताकत से दर्शकों को जोड़ा। फिल्म ‘1001 नुनाकल’ में उनकी भूमिका को भी सराहा गया था, पर ‘फेमिनिची फातिमा’ ने उन्हें सिनेमा जगत में एक मजबूत स्थान दिला दिया है। वह केवल अभिनेत्री नहीं, गीतकार और शॉर्ट फिल्म मेकर भी हैं—यानी कला उनके भीतर कई रूपों में सांस लेती है।

अभिलाषा सक्सेना चक्रवर्ती पिछले 15 वर्षों से प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में दक्षता रखने वाली अभिलाषा ने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान टाइम्स, भोपाल से की थी। डीएनए, नईदुनिया, फर्स्ट इंडिया,...