Editorial Review: दुर्गा पूजा के बाद का समय नई उमंग और शक्ति से भर देता है क्योंकि इसके तुरंत बाद धनतेरस, दिवाली, गोवर्धन पूजा, भाईदूज और छठ क्रम से आते हैं और घर को दीपों की रोशनी, पकवानों
की मिठास और खुशियों से भर देते हैं। यह पर्व-श्रृंखला केवल परंपरा निभाने तक सीमित नहीं है, बल्कि हमें विश्वास, आस्था और रिश्तों की गहराई का संदेश भी देते हैं।
दिवाली की चमक और मिठाइयों के आनंद के बीच अक्सर हम अपने स्वास्थ्य को अनदेखा करने लगते हैं। इसी कारण कई बार शरीर थका हुआ महसूस करता है। इस बार हमने ऐसे लेख शामिल
किए हैं, जो बताएंगे कि व्रत और पूजा के बाद भी किस प्रकार शरीर चुस्त और मन प्रसन्न रखा जा सकता है। साथ ही छठ पूजा के अनुशासन और सूर्य उपासना की महत्ता पर लिखा गया लेख इस पर्व की गहराई को और करीब से समझने का अवसर देगा। वहीं देव दीपावली और गंगा आरती का विशेष वर्णन आपको भक्ति और श्रद्धा से भर देगा।
हर त्यौहार केवल आनंद का अवसर नहीं, बल्कि रिश्तों को मजबूत करने और परिवार को जोड़ने का माध्यम भी है। करवाचौथ पतिपत्नी के बीच विश्वास और समर्पण का प्रतीक है। भाईदूज भाईबहन के स्नेह को गहरा करता है। गोवर्धन पूजा यह सिखाती है कि प्रकृति का सम्मान और उसका संरक्षण जीवन के संतुलन के लिए आवश्यक है। इन पर्वों का मूल संदेश यही है कि दीप केवल बाहर न जलें, बल्कि हमारे मन में विश्वास, विचारों में सकारात्मकता और जीवन
में नई चेतना का प्रकाश भी जगाएं। आप सभी को दीपावली और आने वाले पर्वों की हार्दिक
शुभकामनाएं। स्वस्थ रहें और आशावादी बने रहें।
धन्यवाद।
आपका…
नरेन्द्र कुमार वर्मा
nk@dpb.in
