Sameer Anjaan
Sameer Anjaan

Summary: समीर को अफसोस है आमिर की डेब्यू फिल्म ना कर पाने का

समीर ने उन गीतों और फिल्मों का भी जिक्र किया है जो उनके हाथ नहीं लगे। 'कयामत से कयामत तक' उन्हीं में से एक रही...

Nasir Hussain and Mansoor Khan: आमिर खान ने बॉलीवुड में कदम रखा था मंसूर खान की फिल्म ‘कयामत से कयामत तक’ से। इस फिल्म और आमिर के डेब्यू से जुड़ी कई कहानियां हैं। हाल ही में गीतकार समीर अंजान ने इसमें एक और किस्सा जोड़ दिया है। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि यह फिल्म कैसे बनी और किस तरह वे इसका हिस्सा बनने से रह गए।

समीर पिछले दिनों शुभंकर मिश्रा के पॉडकास्ट पर पहुंचे थे। समीर ने वहां अपने लिखे गए सैकड़ों गीतों के पीछे की कहानियों को भी बताया। साथ ही समीर ने उन गीतों और फिल्मों का भी जिक्र किया जो उन्होंने नहीं लिखे। ‘कयामत से कयामत तक’ उन्हीं में से एक है। उन्होंने याद करते हुए कहा, “मैं बताता हूं उस समय क्या होता था। मंसूर खान, पंकज पराशर, आनंद-मिलिंद, आमिर खान और मैं, सब हर शाम मंसूर के घर इकट्ठा होते और बीयर पीते। एक दिन नासिर हुसैन ने मंसूर को बुलाया और कहा, ‘तुम पहले एक शॉर्ट फिल्म बनाओ और मुझे दिखाओ कि तुम डायरेक्टर बन सकते हो। तभी मैं तुम्हें अपनी फिल्म डायरेक्ट करने दूंगा।’ तब मंसूर ने उम्बेर्टो नाम की फिल्म बनाई और मैंने उसके लिए एक गाना लिखा। भले ही वो सिर्फ एक गाना था, लेकिन हम रोज बैठकर उस पर चर्चा करते, क्योंकि सबका मकसद बस साथ बैठकर बीयर पीना था।”

YouTube video

समीर ने आगे कहा, “उन्हीं बैठकों में से एक दिन, नासिर जी ने मंसूर की बनाई फिल्म देखी और वे बहुत प्रभावित हुए। उन्होंने कयामत से कयामत तक बनाने के लिए हामी भर दी और आमिर को मुख्य भूमिका में लेने का फैसला किया। अब मंसूर चाहते थे कि संगीतकार आनंद-मिलिंद हों और मैं गीत लिखूं, लेकिन नासिर साहब ने अपने करियर में सिर्फ आरडी बर्मन और मजरूह सुल्तानपुरी के साथ ही काम किया था। बस, यहीं से बहस शुरू हो गई। दोनों अपनी-अपनी बात पर अड़े रहे और कोई झुकने को तैयार नहीं था। आखिरकार नासिर जी ने मंसूर से कह दिया कि वह या तो संगीतकार चुन सकता है या गीतकार। इस तरह मैं पूरी फिल्म से बाहर हो गया। अगर वह शर्त न होती, तो कयामत से कयामत तक के गाने मैंने लिखे होते।”

समीर ने माना कि आमिर की पहली फिल्म और ‘जो जीता वही सिकंदर’ को खोना उनके लिए बड़ा झटका था, क्योंकि उन फिल्मों के गानों ने आनंद-मिलिंद को पहचान दिलाई और वे सुपरहिट हो गए। समीर बोले, “मैं बहुत निराश हो गया था क्योंकि ‘जो जीता’ भी चली गई। एक दिन मैं उस सेट पर गया जहां आमिर, आनंद-मिलिंद के साथ शूट कर रहे थे। आमिर ने जोर देकर कहा था कि उनकी फिल्म में संगीतकार आनंद-मिलिंद ही हों। उन्होंने मेरा नाम सुझाया, लेकिन वहां कोई तैयार नहीं हुआ। तब आनंद-मिलिंद ने आमिर को स्टूडियो बुलाया और मेरे कुछ गाने सुनाए। जैसे ही उन्होंने ‘खंभे जैसे खड़ी है’ सुना, वे बहुत प्रभावित हुए। वहीं से मेरी असली यात्रा शुरू हुई।”

ढाई दशक से पत्रकारिता में हैं। दैनिक भास्कर, नई दुनिया और जागरण में कई वर्षों तक काम किया। हर हफ्ते 'पहले दिन पहले शो' का अगर कोई रिकॉर्ड होता तो शायद इनके नाम होता। 2001 से अभी तक यह क्रम जारी है और विभिन्न प्लेटफॉर्म के लिए फिल्म समीक्षा...