Summary: फ़र्मेंटेड चावल में छिपा स्वास्थ्य
भारत में फ़र्मेंटेड चावल, जैसे नीरागारम, पखाला भात और पांता भात, सिर्फ स्वाद ही नहीं बल्कि पोषण और पाचन का खज़ाना हैं। यह पारंपरिक भोजन हमें याद दिलाता है कि असली सेहत हमारी रसोई में ही है।
Fermented Rice: भारत में चावल केवल भोजन नहीं, बल्कि संस्कृति और परंपरा का हिस्सा है। लेकिन चावल का एक रूप ऐसा भी है जिसे अक्सर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है फ़र्मेंटेड चावल। यह वही साधारण चावल है जिसे रातभर पानी में भिगोकर रखा जाता है और सुबह इसका स्वाद, गुण और असर बिल्कुल बदल जाता है।
दक्षिण भारत में इसे नीरागारम, ओडिशा में पखाला भात और बंगाल में पांता भात के नाम से जाना जाता है। इन अलग-अलग नामों में छिपा है भारतीय खानपान का सदियों पुराना ज्ञान। आज जब हम महंगे सप्लीमेंट्स और विदेशी प्रोबायोटिक ड्रिंक्स की ओर भागते हैं, तब यह पारंपरिक भोजन हमें याद दिलाता है कि असली सेहत अक्सर हमारी रसोई में ही छिपी होती है।
फ़र्मेंटेड चावल क्यों है खास?
फ़र्मेंटेड चावल दरअसल प्राकृतिक प्रोबायोटिक है। चावल को जब रातभर पानी में भिगोकर छोड़ दिया जाता है, तो उसमें लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया और एंज़ाइम पैदा होते हैं। यही तत्व हमारी आंतों, पाचन, प्रतिरक्षा और त्वचा पर चमत्कारी असर डालते हैं। इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह भोजन बेहद किफ़ायती, पेट भरने वाला और बनाने में आसान है।
1. आंतों और पाचन तंत्र का सहारा
आजकल भागदौड़ और अनियमित खानपान से सबसे ज़्यादा असर हमारे पाचन पर पड़ता है। फ़र्मेंटेड चावल ऐसे समय में आंतों का दोस्त बनकर उभरता है। इसमें मौजूद अच्छे बैक्टीरिया भोजन को तोड़ने में मदद करते हैं और पोषक तत्वों का अवशोषण आसान बनाते हैं। यही कारण है कि यह गैस, कब्ज़, एसिडिटी और अपच जैसी समस्याओं को प्राकृतिक रूप से कम करता है।
2. प्राकृतिक ठंडक
आयुर्वेद के अनुसार, फ़र्मेंटेड चावल शरीर को ठंडक पहुँचाते हैं। यह न केवल प्यास बुझाते हैं बल्कि शरीर की आंतरिक गर्मी को भी घटाते हैं। गाँवों में किसान इन्हें खेत पर साथ ले जाते थे ताकि धूप और लू से बचाव हो सके। दही, प्याज़ या छाछ के साथ खाने पर यह ऊर्जा भी देता है और शरीर को लंबे समय तक हाइड्रेटेड रखता है।
3. इम्यूनिटी को मज़बूत करता है

स्वस्थ आंत का मतलब है मज़बूत शरीर।” यह कहावत बिल्कुल सच है। हमारी 70% इम्यूनिटी का संबंध सीधे हमारे पाचन तंत्र से होता है। जब आंतों में अच्छे बैक्टीरिया मौजूद रहते हैं, तो शरीर संक्रमण और वायरस से बेहतर तरीके से लड़ पाता है। नियमित रूप से फ़र्मेंटेड चावल खाने से मौसमी बीमारियों और थकान से बचाव होता है।
4. पोषण का असर बढ़ाता है
साधारण चावल में कई मिनरल्स छिपे होते हैं, लेकिन फाइटिक एसिड नामक तत्व उनकी उपलब्धता को रोक देता है। फ़र्मेंटेशन इस बाधा को दूर कर देता है। नतीजा – आयरन, कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे मिनरल्स शरीर तक आसानी से पहुँचते हैं। यही वजह है कि यह भोजन आयरन की कमी, थकान या ऊर्जा की कमी वाले लोगों के लिए बेहद उपयोगी है।
5. त्वचा और शरीर का डिटॉक्स

फ़र्मेंटेड चावल न सिर्फ़ पाचन को संतुलित करते हैं, बल्कि शरीर से टॉक्सिन्स भी बाहर निकालते हैं। यह प्रक्रिया आपके शरीर को अंदर से साफ़ करती है और बाहर से त्वचा पर चमक लाती है। कई लोग इसके भिगोए पानी (कंजी) को चेहरे पर लगाते हैं, जिससे स्किन मुलायम और दमकदार बनती है।
इसे कैसे बनाएं?

फ़र्मेंटेड चावल बनाने के लिए आपको किसी खास सामग्री या लंबे समय की ज़रूरत नहीं होती।
बचा हुआ पका चावल एक मिट्टी या काँच के बर्तन में डालें।
उसमें पर्याप्त पानी डालकर रातभर ढककर रख दें।
अगली सुबह इसमें हल्का नमक डालें।
स्वाद और पौष्टिकता बढ़ाने के लिए प्याज़, करी पत्ता और राई का तड़का लगाएँ।
चाहें तो इसे दही या छाछ के साथ खाएँ।
बचे हुए पानी यानी कंजी को भी पी सकते हैं, जो शरीर को हाइड्रेशन और डिटॉक्स देता है।
आज की लाइफ़स्टाइल में क्यों ज़रूरी?
आधुनिक जीवनशैली में प्रोसेस्ड फूड, तनाव और अनियमित दिनचर्या आम हो चुकी है। इसका सीधा असर पाचन, इम्यूनिटी और ऊर्जा स्तर पर पड़ता है। ऐसे समय में फ़र्मेंटेड चावल सस्ता है, बनाना बेहद आसान है और इसके फायदे लंबे समय तक शरीर को संतुलित रखते हैं। यह भोजन हमें सिखाता है कि महंगे सप्लीमेंट्स या विदेशी हेल्थ ड्रिंक्स की ज़रूरत नहीं, बल्कि हमारे अपने पारंपरिक व्यंजन ही असली सुपरफूड हैं।
तो अगली बार चावल बच जाएँ, तो उन्हें फेंकिए मत। बस पानी में भिगो दीजिए और अगले दिन का भोजन बना लीजिए। यक़ीन मानिए यह छोटा-सा बदलाव आपकी सेहत और जीवनशैली दोनों को बदल सकता है।
