Hindi Poem: तुम समाज के सबसे सशक्त स्तंभ हो,
तुममें शक्ति है—
पूरा परिवार उठाने की,
अकेले ही उसे सँवारने की।
फिर भी, न उड़ाओ व्यंग्य,
न गढ़ो ठिठोलियाँ अपरिपक्व,
महिलाओं पर, जिनकी आत्मा भी
तुम्हारी दुनिया का हिस्सा है।
समझो—तुम समाज की हर महिला के संरक्षक हो,
यदि कोई अकेली है,
तो वह तुम्हारी जिम्मेदारी है।
कोई बहाना नहीं, कोई मौका नहीं।
तुम बनो वह छाया,
जो धूप की तीखी किरणों को हटाए,
तुम बनो वह हवा,
जो उसके पंखों को डर के बिना फैलने दे।
उसकी आँखों में डर न हो,
उसके कदमों में कंपन न हो,
तुम्हारा साहस बने उसकी ढाल,
और तुम्हारी मौजूदगी उसकी सुरक्षा।
मर्दानगी केवल शरीर की ताकत नहीं,
बल्कि उसके सम्मान और स्वतंत्रता में है।
तुम पिता हो, बेटा हो, भाई हो, पति हो—
सृष्टि की सबसे मजबूत रचना हो।
तुम बनो वह परिवर्तन,
जो समाज की दिशा बदल दे,
जो भय मिटा दे,
जो महिलाओं के कदमों को निर्भीक बनाए।
तुम्हारा पौरुष दिखाओ—
सिर्फ ताकत नहीं,
बल्कि समाज को सशक्त बनाने की जिम्मेदारी निभाने में।
तुम्हारा अस्तित्व उसकी निर्भीक उड़ान में शामिल हो,
ताकि वह खुले आसमान के नीचे
निर्भीक, निडर, और स्वतंत्र उड़ सके।
