Overview:भारत में दशहरा-हर राज्य की अपनी रंगीन और अनोखी परंपरा
दशहरा भारत में अलग-अलग अंदाज में मनाया जाता है। उत्तर भारत में रामलीला और रावण दहन, बंगाल में दुर्गा पूजा और सिन्दूर खेल, कर्नाटक में मैसूर जुम्बू सवारी, हिमाचल में कुल्लू दशहरा और गुजरात में गरबा-डांडिया की धूम होती है। यह त्योहार अच्छाई की जीत और भारत की विविध सांस्कृतिक परंपराओं का सुंदर संगम है।
Dussehra Celebration in India: दशहरा, जिसे विजयदशमी भी कहा जाता है, भारत के सबसे बड़े और लोकप्रिय त्योहारों में से एक है। यह अच्छाई की बुराई पर जीत का प्रतीक है। यह नौ दिनों के नवरात्रि उत्सव का समापन होता है, जो माँ दुर्गा की राक्षस महिषासुर पर विजय की याद दिलाता है।
हालांकि त्योहार का मूल संदेश सभी जगह समान है, लेकिन जश्न का अंदाज हर राज्य में अलग होता है। हर क्षेत्र अपने सांस्कृतिक रीति-रिवाज और रंग-बिरंगे उत्सव के साथ इसे मनाता है। इस तरह दशहरा न केवल धार्मिक महत्व रखता है बल्कि भारत की विविध सांस्कृतिक परंपराओं का भी सुंदर प्रतीक बन जाता है।
ये त्योहार सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक मेल-जोल का भी बड़ा मौका है। इसमें लोग एक-दूसरे से मिलते हैं, साथ में पूजा, नाटक, संगीत और नृत्य करते हैं। इस तरह दशहरा भारत की विविधता और एकता दोनों का सुंदर संदेश देता है।
उत्तर भारत

उत्तर भारत जैसे दिल्ली, उत्तर प्रदेश और बिहार में दशहरा रामलीला और रावण दहन के लिए जाना जाता है। नौ दिन तक लोग रामायण की कहानियाँ मंच पर देखते हैं। दसवें दिन शाम को बड़े-बड़े मैदानों में रावण, मेघनाथ और कुंभकरण के पुतले जलाए जाते हैं। इस दौरान आतिशबाजी, ढोल-नगाड़े और भीड़ का अलग ही उत्साह होता है। यहाँ का संदेश साफ है—झूठ और बुराई का अंत हमेशा होता है। बच्चे से लेकर बूढ़े तक इस नजारे को देखने जरूर पहुँचते हैं।
बंगाल और पूर्वोत्तर
पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों में दशहरा माँ दुर्गा की पूजा का आखिरी दिन होता है। यहाँ पाँच दिनों तक दुर्गा पूजा बड़े भव्य पंडालों में होती है। दशमी के दिन माँ की प्रतिमा विसर्जन के लिए नदी या तालाब में ले जाई जाती है। इस दिन “सिन्दूर खेल” की खास परंपरा होती है, जिसमें महिलाएँ एक-दूसरे को सिन्दूर लगाती हैं और मिठाई खिलाती हैं। माहौल भावुक भी होता है और उत्सव भरा भी। लोग माता से विदा लेते हुए कहते हैं—“अगले साल फिर आना माँ।”
कर्नाटक और मैसूर

कर्नाटक का मैसूर दशहरा भारत के सबसे भव्य उत्सवों में गिना जाता है। इस दिन मैसूर पैलेस हजारों लाइटों से जगमगा उठता है। इसका सबसे बड़ा आकर्षण है जुम्बू सवारी — शाही शोभायात्रा, जिसमें हाथी माँ चामुंडेश्वरी की प्रतिमा लेकर चलते हैं। पूरा शहर सांस्कृतिक कार्यक्रमों, मेलों और प्रदर्शनियों से जीवंत हो उठता है। यह सौ साल पुरानी परंपरा आज भी दुनिया भर से पर्यटकों को आकर्षित करती है और कर्नाटक की समृद्ध विरासत को दर्शाती है I
हिमाचल प्रदेश
हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में दशहरा सात दिनों तक बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दौरान एक भव्य शोभायात्रा निकलती है, जिसमें गाँव-गाँव से लोग अपने स्थानीय देवी-देवताओं की प्रतिमाएँ लेकर ढालपुर मैदान पहुँचते हैं। इस पर्व का मुख्य आकर्षण भगवान रघुनाथ की शोभायात्रा होती है। पूरे कुल्लू घाटी में भक्तिभाव, नृत्य और उल्लास का माहौल छा जाता है, जो इस त्योहार को बेहद खास बना देता है।
अहमदाबाद
अहमदाबाद में दशहरा नवरात्रि के रूप में मनाया जाता है। नौ दिनों तक लोग गरबा, गुजरात का मुख्य लोकनृत्य, करते हैं। पुरुष केडिया पहनते हैं और महिलाएँ रंग-बिरंगे लहंगा-चोली पहनकर डांडिया खेलती हैं। पारंपरिक गीतों और ढोल-नगाड़ों की धुन पर लोग नाचते हैं। भक्ति, संगीत और रंग-बिरंगे कपड़े इस त्योहार को बेहद जीवंत बनाते हैं, और अहमदाबाद में दशहरा की धूम इसे त्योहारों की मुख्य विशेषताओं में से एक बनाती है।
तमिलनाडु का दशहरा
तमिलनाडु में दशहरा माँ लक्ष्मी, दुर्गा और सरस्वती की भक्ति के साथ मनाया जाता है। इस दिन विवाहित महिलाएँ एक-दूसरे के घर जाती हैं और कुमकुम, चूड़ियाँ, नारियल, पान के पत्ते, सुपारी और पैसे उपहार के रूप में देती हैं। मंदिरों में पूजा और आध्यात्मिक अनुष्ठान पूरे उत्सव को जीवंत बनाते हैं। यह त्योहार न केवल धार्मिक भक्ति बल्कि तमिल संस्कृति का अनोखा अनुभव भी प्रस्तुत करता है।
