neelkanth bird
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Summary: दशहरे पर नीलकंठ दर्शन: विजय, समृद्धि और शिव-राम की कृपा का प्रतीक

दशहरे के दिन नीलकंठ पक्षी को देखना शुभ माना जाता है। यह पक्षी न केवल किसानों के लिए समृद्धि का संकेत है, बल्कि भगवान शिव और श्रीराम से जुड़ा होने के कारण विजय और आशीर्वाद का प्रतीक भी है।

Neelkanth on Dussehra Auspicious: दशहरा या विजयादशमी भारत के सबसे प्रमुख पर्वों में से एक है। यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है, जब भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर धर्म की स्थापना की थी। संयोग से यह दिन नवरात्र और बंगाल की दुर्गापूजा के समापन का भी प्रतीक है। इस शुभ अवसर पर कई धार्मिक मान्यताएँ प्रचलित हैं, जिनमें से एक है दशहरे के दिन नीलकंठ पक्षी को देखना सौभाग्यशाली माना जाता है।

आइए जानते हैं, आखिर क्यों नीलकंठ पक्षी का दर्शन इस दिन इतना शुभ और महत्वपूर्ण माना जाता है।

ग्रामीण भारत में नीलकंठ पक्षी को किसान विशेष रूप से शुभ मानते हैं। मान्यता है कि दशहरे के दिन इस पक्षी का दर्शन भाग्य बदल सकता है और समृद्धि का आशीर्वाद लेकर आता है। किसान इसे अपनी खेती और जीवन के लिए मंगलकारी मानते हैं।

इसके पीछे एक व्यावहारिक कारण भी है नीलकंठ प्राकृतिक कीट नियंत्रक के रूप में काम करता है। यह खेतों में पनपने वाले हानिकारक कीड़ों को खाकर फसलों की रक्षा करता है। इस कारण से किसान इसे अपना मित्र मानते हैं और विशेष रूप से दशहरे के दिन इसके दर्शन को आने वाले मौसम के लिए शुभ संकेत समझते हैं।

Dussehra Auspicious
neelkanth

‘नीलकंठ’ का अर्थ है नीला गला। यह सीधा संबंध भगवान शिव से है। पुराणों के अनुसार समुद्र मंथन के समय जब विष निकला, तो दुनिया को बचाने के लिए भगवान शिव ने उसे पी लिया। इस विष के प्रभाव से उनका गला नीला हो गया और तभी से उन्हें नीलकंठ कहा जाने लगा।

इसी कारण नीलकंठ पक्षी का संबंध भगवान शिव से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि दशहरे पर इस पक्षी का दर्शन करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में संकट दूर होते हैं।

रामायण में भी नीलकंठ का विशेष उल्लेख मिलता है। जब भगवान राम रावण का वध करने निकले थे, तब उन्होंने इस पक्षी को देखा था। इसे शुभ संकेत मानते हुए उन्होंने युद्ध की शुरुआत की और अंततः बुराई पर विजय प्राप्त की।

इतना ही नहीं, जब भगवान राम ने रावण का वध किया तो उन्हें ब्राह्मणहत्या का पाप लगा, क्योंकि रावण ब्राह्मण कुल का था। इस पाप से मुक्ति पाने के लिए उन्होंने और लक्ष्मण ने भगवान शिव की आराधना की। मान्यता है कि उस समय भगवान शिव नीलकंठ पक्षी के रूप में प्रकट हुए और राम को पाप से मुक्ति दिलाई।

इसलिए दशहरे के दिन नीलकंठ को देखना राम की तरह विजय और शिव की तरह कृपा का प्रतीक माना जाता है।

भारत की लोक परंपराओं में नीलकंठ को केवल एक सुंदर पक्षी नहीं, बल्कि आशा, विजय और समृद्धि का प्रतीक माना गया है। दशहरे जैसे पर्व पर जब अच्छाई की जीत का जश्न मनाया जाता है, तब नीलकंठ का दर्शन इसे और अधिक पवित्र बना देता है।

यह पक्षी आने वाले समय में खुशहाली और संपन्नता का संदेश देता है। इसे देखना जीवन में बुराइयों और कठिनाइयों के अंत का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह शिव और राम दोनों की कृपा का वाहक है।

लोककथाओं से लेकर शास्त्रों तक, नीलकंठ पक्षी का महत्व गहराई से जुड़ा हुआ है। ग्रामीण समाज में इसे शुभता और समृद्धि का दूत माना जाता है, तो धार्मिक मान्यताओं में यह शिव और राम की आशीष का प्रतीक है।

दशहरे के दिन जब लोग रावण दहन देखकर बुराई के अंत की याद करते हैं, तभी नीलकंठ पक्षी का दर्शन इस बात का विश्वास दिलाता है कि आने वाला समय और भी उज्ज्वल और मंगलकारी होगा।

दशहरा केवल एक त्योहार नहीं बल्कि जीवन दर्शन है यह अच्छाई, धैर्य और सत्य की जीत का संदेश देता है। इसी संदेश को और गहराई देता है नीलकंठ पक्षी का दर्शन। किसान इसे खेतों की समृद्धि का संकेत मानते हैं, तो श्रद्धालु इसे भगवान शिव और राम का आशीर्वाद मानते हैं। इसलिए कहा जाता है कि यदि दशहरे के दिन आपको नीलकंठ दिख जाए, तो इसे शुभ संकेत समझें। यह न केवल आध्यात्मिक रूप से आपको बल देता है, बल्कि यह आपके जीवन में विजय, समृद्धि और सकारात्मकता का प्रतीक भी बन जाता है।

राधिका शर्मा को प्रिंट मीडिया, प्रूफ रीडिंग और अनुवाद कार्यों में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है। हिंदी और अंग्रेज़ी भाषा पर अच्छी पकड़ रखती हैं। लेखन और पेंटिंग में गहरी रुचि है। लाइफस्टाइल, हेल्थ, कुकिंग, धर्म और महिला विषयों पर काम...