Summary: शनि की कृपा पाने और साढ़ेसाती से बचने के 5 अचूक उपाय
ज्योतिष में शनि को कर्मफलदाता और न्याय का देवता माना जाता है। उनकी धीमी चाल के कारण ही साढ़ेसाती और ढैय्या जैसी स्थिति बनती हैं। अगर आपकी कुंडली में भी ऐसा योग है, तो इसके प्रभाव को कम करने के लिए उपाय जरूरी हैं।
Shani Sade Sati Remedies: ज्योतिष शास्त्र में नवग्रहों में से शनि को सबसे कठोर ग्रह माना गया है। शनि देव हमेशा इंसान को उसके कर्मों के अनुसार ही फल प्रदान करते हैं, इसी वजह से उन्हें कर्मफलदाता और न्याय के देवता कहा जाता है। शनि की चाल सभी ग्रहों में सबसे धीमी होती है। वे किसी एक राशि में लगभग ढाई वर्ष तक रहते हैं। शनि ही एकमात्र ऐसे ग्रह हैं जिनकी वजह से व्यक्ति को साढ़ेसाती और ढैय्या जैसी अवस्थाओं का सामना करना पड़ता है। इसलिए जीवन में हर कोई कभी न कभी इन स्थितियों से गुज़रता है। अगर आपकी कुंडली में भी शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या का योग बन रहा है, तो आपको इसके प्रभाव को कम करने के लिए कुछ उपाय करने होंगे।
शनि स्तोत्र का पाठ
शनि देव को न्याय और कर्म का देवता माना जाता है। जब उनकी साढ़ेसाती या ढैय्या लगती है, तब व्यक्ति को उनके प्रभावों का सामना करना पड़ता है। शनि दोषों से बचने के लिए शनि स्तोत्र को बेहद अच्छा उपाय माना गया है। कहते हैं कि राजा दशरथ ने शनि देव को प्रसन्न करने के लिए यह स्तोत्र रचा था। जब शनि की दृष्टि उनके राज्य पर पड़ी और लोगों को कष्ट होने लगे, तब राजा दशरथ ने शनि देव से प्रार्थना की। उस समय शनि देव ने उन्हें कुछ उपाय बताए, जिनके जरिए इंसान शनि की पीड़ा से मुक्ति पा सकता है। मान्यता है कि जो भी व्यक्ति इस स्तोत्र का श्रद्धा से पाठ करता है, उसे शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या और अन्य शनि दोषों से काफी राहत मिलती है।
काली गाय की पूजा
शनि की साढ़ेसाती के असर को कम करने के लिए काली गाय की पूजा को विशेष रूप से शुभ माना जाता है। शनिवार के दिन गाय के माथे पर तिलक करें, उसकी विधि-विधान से आरती करें और फिर उसे लड्डू खिलाएं। अंत में गाय की परिक्रमा करने से शनि देव की कृपा प्राप्त होती है और उनके अशुभ प्रभाव धीरे-धीरे कम हो जाते हैं।
पीपल के पेड़ की पूजा

शनिवार के दिन पीपल के पेड़ की पूजा भी शनि देव को प्रसन्न करने का श्रेष्ठ उपाय माना गया है। सूर्यास्त के समय पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीया जलाएं और पेड़ की श्रद्धा से पूजा करें। इसके बाद सात परिक्रमा करने से शनि देव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन की कठिनाइयाँ कम होने लगती हैं।
अपराजिता फूल का उपाय
शनि देव को प्रसन्न करने के लिए सबसे उपाय यह भी है कि उड़द दाल और चावल की खिचड़ी बनाएं। इसके साथ एक गुलाब जामुन और अपराजिता के फूलों की माला लेकर शनि मंदिर जाएं। मंदिर पहुंचकर इन चीज़ों को शनि देव के सामने चढ़ा दें। ध्यान रखें कि इस दौरान न कुछ बोलें और न ही किसी से बातचीत करें, बस चुपचाप पूजा अर्पित करके वापस लौट आएं।
हनुमान जी की पूजा करना

शनि के प्रभाव को कम करने और उनकी कृपा पाने के लिए हनुमान जी की पूजा करना भी बेहद लाभकारी है। इसके लिए एक लाल कपड़ा और दो बूंदी के लड्डू लें। इन्हें लेकर सीधे हनुमान मंदिर जाएँ और चुपचाप हनुमान जी के चरणों में अर्पित कर दें। यहाँ भी कोशिश करें कि किसी से कोई बात न करें और बिना कुछ बोले पूजा करके वापस आ जाएँ।
