Strengthen Love Relationships: आत्मसम्मान और आत्मविश्वास किसी भी प्रेम संबंध की मजबूत नींव होते हैं। जब व्यक्ति खुद को समझता, स्वीकार करता और अपनी भावनाओं को महत्व देता है, तब रिश्तों में भरोसा, सम्मान और स्थिरता अपने आप बढ़ती है। ऐसे रिश्ते लंबे समय तक संतुलित और सुखद बने रहते हैं।
प्रेम का संबंध सिर्फ भावनाओं का मेल नहीं बल्कि दो लोगों के व्यक्तित्व और सोच का भी मेल है।
अक्सर हम यह मान लेते हैं कि किसी भी रिश्ते की सफलता केवल प्यार, त्याग और समझौते पर निर्भर करती है, जबकि आत्मसम्मान और आत्मविश्वास बेहद अहम पहलुओं को नजरअंदाज कर दिया जाता है।
इसे समझना बेहद आसान है कि जब किसी व्यक्ति का अपने प्रति नजरिया सकारात्मक होता है, तो उसका असर सीधे उसके प्रेम संबंध पर पड़ता है। आइए समझते हैं कि आत्मसम्मान और आत्मविश्वास कैसे किसी भी प्रेम संबंध को स्थिरता और संतुलन प्रदान करते हैं।
आत्मसम्मान क्या है और यह रिश्तों में क्यों है जरूरी
आत्मसम्मान का सीधा अर्थ है स्वयं को सम्मान देना, अपनी भावनाओं, अपनी सीमाओं और अपने मूल्यों को महत्व देना। इसे इस तरह से भी समझा जा सकता है कि जब कोई व्यक्ति खुद को पर्याप्त मानता है, तो वह किसी भी रिश्ते में भी खुद को खोने से बचता है। वहीं दूसरी ओर, कम आत्मसम्मान
वाला व्यक्ति अक्सर यह मान बैठता है कि वह प्रेम पाने के योग्य नहीं है। ऐसे में वह रिश्ते में जरूरत से ज्यादा समझौते करता है, अपनी भावनाओं को दबाता है और कई बार असम्मान को भी स्वीकार कर लेता है। इसके ठीक विपरीत, आत्मसम्मान व्यक्ति को यह सिखाता है कि प्यार पाने के लिए खुद को बदलना या कमतर आंकना जरूरी नहीं है।
रिश्ते की नींव है आत्मविश्वास
आत्मविश्वास किसी भी व्यक्ति को अपनी बात कहने, अपनी जरूरत जाहिर करने और सही-गलत का फर्क समझने में मदद करती है। आत्मविश्वास से भरपूर व्यक्ति प्रेम संबंधों में न तो जरूरत से ज्यादा चिपकता है और न ही बेवजह दूरी बनाता है। इस तरह का व्यक्ति अपने साथी पर भरोसा करता है, बिना डरे हुए बातचीत करता है और रिश्ते में आने वाली समस्याओं से दूर भागने की बजाय सामना करता है। आत्मविश्वास रिश्ते को स्थिर कर देता है और दोनों साथी को एक-दूसरे के साथ
सुरक्षित महसूस कराता है।
स्वस्थ सीमाएं बनाने में मददगार
हर रिश्ते में सीमा का होना जरूरी है। आत्मसम्मान और आत्मविश्वास से ही व्यक्ति को यह हिम्मत मिलती है कि वह अपनी सीमा तय कर सके। खुद का सम्मान करने वाला व्यक्ति साफ तौर पर यह समझ और कह पाता है कि उसे क्या स्वीकार है और क्या नहीं। उसे यह भी समझ होती है कि सीमा बनाना प्यार की कमी नहीं, बल्कि रिश्ते की मजबूती की निशानी है। इस तरह के रिश्ते में न तो कंट्रोल होता है और न ही घुटन।
जलन और असुरक्षा होती है कम
कम आत्मविश्वास वाले लोग अक्सर जलन, शक और असुरक्षा से भरे होते हैं। जब व्यक्ति खुद को कम आंकता है, तो उसे लगता है कि उसका साथी उसे छोड़ सकता है या किसी और को चुन सकता है। इसके विपरीत, आत्मविश्वास से भरपूर व्यक्ति यह जानता है कि वह अपने आप में पर्याप्त है। वह अपने साथी को आजादी देता है और रिश्ते में भरोसे पर यकीन करता है। इस तरह से रिश्ते में तनाव कम और भावनात्मक जुड़ाव ज्यादा होता है।
पार्टनरशिप में आती है सुरक्षा की भावना
आत्मसम्मान और आत्मविश्वास किसी भी स्वस्थ रिश्ते की मजबूत आधारशिला होते हैं। जब इनमें कमी होती है, तो रिश्ते में असुरक्षा, जलन, बार-बार भरोसा दिलाने की अपेक्षा, ठुकराए जाने का डर, शक और बेवजह के आरोप पनपने लगते हैं। इसका असर यह होता है कि रिश्ता धीरे-धीरे जरूरत से ज्यादा निर्भरता की ओर बढ़ने लगता है और भावनात्मक अस्थिरता पैदा हो जाती है। इसके उलट, जब व्यक्ति में आत्मसम्मान और आत्मविश्वास होता है, तो वह रिश्ते में अपनी सीमाएं तय कर पाता है, अपनी भावनाओं और जरूरतों को खुलकर सामने रखता है और साथी पर विश्वास बनाए रखता है। ऐसे रिश्तों में पति और पत्नी एक-दूसरे को बिना असुरक्षा या अत्यधिक निर्भरता के सहयोग देते
हैं। वे स्पष्ट रूप से संवाद कर पाते हैं, एक-दूसरे के व्यक्तिगत विकास को जगह देते हैं और जलन की बजाय भरोसे को प्राथमिकता देते हैं।
आत्मविश्वास से भरे लोग मतभेदों को समझदारी से सुलझाते हैं और मुश्किल हालात को रिश्ते को और मजबूत बनाने के अवसर की तरह देखते हैं।
बातचीत होती है बेहतर और स्पष्ट
आज के समय में प्रेम संबंधों की सबसे बड़ी चुनौती है बातचीत की कमी। ऐसे में आत्मसम्मान और आत्मविश्वास व्यक्ति को यह ताकत देते हैं कि वह अपनी भावनाओं को खुलकर, लेकिन सम्मान के साथ जाहिर कर सके। इस तरह का व्यक्ति अपनी नाराजगी को दबाता नहीं, बल्कि सही समय पर सही शब्दों में अपनी बात अपने साथी के समक्ष रखता है। वह अपने साथी को दोष देने की बजाय समाधान की ओर बढ़ता है।
भावनात्मक निर्भरता से बचाव
प्यार में होना और पूरी तरह भावनात्मक रूप से निर्भर हो जाना, इन दोनों में फर्क है। आत्मसम्मान व्यक्ति को यह समझ देता है कि उसका अस्तित्व सिर्फ इस खास रिश्ते तक सीमित नहीं है। जब व्यक्ति खुद से खुश होता है, अपनी पहचान और रुचियों को बनाए रखता है, तो वह अपने रिश्ते में बोझ नहीं बनता। ऐसे रिश्ते में दोनों एक-दूसरे के साथ होते हैं, एक-दूसरे पर निर्भर नहीं होते।
सम्मान की भावना
जब व्यक्ति खुद का सम्मान करता है, तो वह अपने साथी का भी सम्मान करता है। चाहे
उसे कितना भी गुस्सा क्यों न आए, वह अपमानजनक शब्दों, तानों या भावनात्मक
दबाव का सहारा नहीं लेता। इस तरह से भले ही रिश्ते में मतभेद होते हैं, लेकिन उनमें
कड़वाहट नहीं होती। आत्मसम्मान दोनों को यह सिखाता है कि जीत से ज्यादा जरूरी
रिश्ता है।
कैसे बढ़ाएं आत्मसम्मान ताकि रिश्ता भी बेहतर हो
1. खुद से सकारात्मक संवाद करें
2. अपनी तुलना दूसरों से करना छोड़ें
3. अपनी जरूरतों और भावनाओं को महत्व दें
4. ‘ना’ कहना सीखें
5. अपनी उपलब्धियों को स्वीकारें
6. अकेले समय बिताना सीखें
आत्मविश्वास से बढ़ता है आकर्षण

आत्मविश्वास किसी भी व्यक्ति को स्वाभाविक रूप से आकर्षक बनाता है। जब कोई अपने आप में सहज होता है, अपनी कमियों को स्वीकार करता है और खुद को
साबित करने की होड़ में नहीं रहता, तो वह दूसरों को भी सहज महसूस कराता है। प्रेम संबंधों में यह आत्मविश्वास स्थिर और गहरे प्रेम में बदलने में मदद करता है।
(आलेख डॉ. मीनाक्षी मनचंदा, एसोसिएट डायरेक्टर साइकियाट्री, एशियन हॉस्पिटल,
दिल्ली से बातचीत पर आधारित है)
“प्यार में होना और पूरी तरह भावनात्मक रूप से निर्भर हो जाना, इन दोनों में फर्क है। आत्मसम्मान समझ देता है कि उसका अस्तित्व सिर्फ इस रिश्ते तक सीमित नहीं है।”
