Day Care Precautions
Day Care Precautions Credit: Istock

Day Care Precautions: डे केयर आज की पेरेंटिंग का हिस्‍सा बन गया है। जॉब और समय की कमी के कारण पेरेंट्स बच्‍चे को पर्याप्‍त टाइम नहीं दे पाते। जिसकी वजह से उन्‍हें या तो केयर टेकर या फिर डे केयर का सहारा लेना पड़ता है। वहीं कुछ पेरेंट्स समर विकेशन में बच्‍चे को बिजी और इंगेज रखने के लिए डे केयर में डाल देते हैं। हालांकि डे केयर बच्‍चों के लिए सुरक्षित होते हैं लेकिन कई बार डे केयर सेंटर में बच्‍चों के साथ बदसलूकी जैसी घटनाएं हो जाती हैं। ऐसे में बच्‍चे की सुरक्षा को लेकर पेरेंट्स का सर्तक रहना आवश्‍यक है। समर विकेशन लगने ही वाली है और यदि आप अपने बच्‍चे को डे-केयर में डालने का विचार कर रहे हैं तो इन छोटी-छोटी बातों का ध्‍यान जरूर रखें।

सही उम्र में डालें

Put in the right age
Put in the right age

वैसे तो कामकाजी महिलाएं छह माह के बाद बच्‍चे को डे केयर में डाल देती हैं लेकिन इतने छोटे बच्‍चे को डे केयर में डालना सही नहीं है। डे केयर में 1 साल से ऊपर के बच्‍चे को दाखिला दिलवाना चाहिए। एक साल का बच्‍चा मां के दूध पर निर्भर नहीं होता। वह सॉलिड डाइट लेने लगता है। इससे उसकी सेहत पर पूरा असर नहीं पड़ेगा। साथ ही एक साल का बच्‍चा अपनी दिनचर्या के बारे में बता सकता है। 

ऑफ लाइन और ऑन लाइन रिव्‍यू

किसी भी संस्‍थान में दाखिला लेने के लिए जैसे हम ऑफ लाइन और ऑन लाइन रिव्‍यू चैक करते हैं वैसे ही आपको डे केयर का चुनाव करते समय रिव्‍यू पर ध्‍यान देना चाहिए। सेंटर की पूरी जांच-पड़ताल कर लें। उसका रजिस्‍ट्रेशन और मैनेजमेंट चैक करें। साथ ही डे केयर में जा रहे पुराने बच्‍चों और पेरेंट्स से बात कर पूरी जानकारी हासिल करें।

सीसीटीवी कैमरा

आजकल हर जगह सीसीटीवी कैमरे होते हैं। आपका बच्‍चा क्‍या कर रहा है, क्‍या खा रहा है या फिर उसके साथ कैसा व्‍यवहार किया जा रहा है ये सब सीसीटीवी के जरिए आप देख सकते हैं। इसलिए डे केयर में डालने से पहले सीसीटीवी कैमरे और सुरक्षा के इंतजामों के बारे में जानकारी हासिल कर लें। हो सके तो सीसीटीवी का एक्‍सेस भी ले लें ताकि बीच-बीच में आप बच्‍चे की निगरानी कर सकें।

आदतों पर दें ध्‍यान

Focus on habits
Focus on habits

यदि आपका बच्‍चा डे केयर सेंटर जाता है तो उसकी आदतों, व्‍यवहार और भाषा पर ध्‍यान दें। डे केयर में बच्‍चे को अपने तरीके से संभाला जाता है जिससे बच्‍चे की आदतों और व्‍यवहार में अंतर आ सकता है। यदि बच्‍चा बदलाव को लेकर असहज महसूस नहीं करता तो उसे तुरंत डे केयर से निकाल लें।

अधिक समय के लिए न छोड़े

जॉब और समय की कमी के क‍ारण कई बार पेरेंट्स बच्‍चे को दिनभर के लिए डे केयर में छोड़ देते हैं, जो कि गलत है। बच्‍चा बिना पेरेंट्स के पूरा दिन अकेला नहीं रह सकता। वह खुद को इग्‍नोर फील कर सकता है। उसके मन में पेरेंट्स को लेकर गलत विचार आ सकते हैं। बच्‍चे को यदि डे केयर में डाल रहे हैं तो 5-6 घंटे से ज्‍यादा बच्‍चे को अपने से दूर न रखें। साथ ही बच्‍चे के पिक और ड्रॉप के समय में बदलाव न करें। इससे स्‍टाफ और बच्‍चे दोनों को परेशानी हो सकती है।