Hindi Love Story: “कल मैं तुम्हारे बारे में सोच रही थी।”
“अरे वाह! ज़हे-नसीब; जो आपने मुझ नाचीज़ के बारे में सोचने की तकलीफ़ फ़रमाई।” मैंने उसके गम्भीर चेहरे की ओर देखा जो मुझे बिल्कुल ही नापसन्द है।
“अरे यार! मतलब ऐसे तो दिन रात कभी भी घुसे पड़े रहते हो मेरे दिल-दिमाग में, पर किसी ख़ास बात के बारे में बात कर रही हूँ ना।”
“क्या है वो ख़ास बात, जो मेरी रानी के चेहरे पर शिकन ले आई है?” मैंने उसका हाथ इस तरह पकड़ा, जैसे चूमा जाना हो।
“मज़ाक छोड़ो यार, सीरियसली कह रही हूँ…रहने दो तुम्हारा मन नहीं है सुनने का तो।” उसने हाथ छुड़ाया और चेहरे पर खिन्नता के भावों को ज़बरदस्ती बढ़ावा दिया।
“हा…हा…हा…सुने बग़ैर मुझे, और सुनाए बग़ैर तुम्हें; चैन कहाँ आएगा डार्लिंग? सीरियसली; सुन रहा हूँ, बोलो।” मैंने सचमुच की संजीदगी लपेटते हुए कहा।
“मैं सोच रही थी, कि तुम कभी मुझसे कोई डिमाण्ड नहीं करते। मेरी डिमाण्डें सुन लेते हो और जितनी प्रैक्टिकली पॉसिबल होती हैं, पूरी भी कर देते हो…”
“तो तुम्हारे अकॉर्डिंग यह गुड क्वालिटी है, या बैड क्वालिटी?”
“और कभी यह भी नहीं कहते कि मुझमें क्या अच्छा है क्या नहीं। मैं बहुत देर तक सोचती रही कि, तुमने एकाध बार ही कभी उन चीजों के बारे में मुझसे सुधार को कहा है, जो तुम्हें पसंद नहीं। मैं तो कितनी ऐसी बातें बोलती रहती हूँ तुमसे।”
“तो इसमें क्या बड़ी बात हो गई, अपना-अपना नेचर है।”
“नहीं। पता है, फिर मैं बहुत देर तक यू-ट्यूब पर इस सबजेक्ट से रिलेटेड सर्च करती रही और मैंने सोचा भी कि, कहीं ऐसा तो नहीं कि तुम मुझसे डिसापॉइंट हो और यह सोचते हो कि मुझसे यह सब कह कर कोई फ़ायदा तो होने वाला है नहीं; या मेरे प्यार में कहीं कुछ कमी महसूस करते हो।”
“गज़ब की झक्की हो भई! पता नहीं तुम क्या सोच रही हो; लेकिन मैं तुम्हारे यू ट्यूबिया ज्ञानियों के पैदा किए डाउट्स के कितने सवालों के जवाब दे पाऊँगा? हाँ, अगर तुम यह सोच ही रही हो; तो थोड़ा और डीप सोचो।”
“क्या?”
“यही कि हो सकता है, मुझे तुमसे डिमाण्ड करने की बजाए तुम्हारी डिमाण्ड पूरा करने में ज़्यादा मज़ा आता हो और तुम जैसी हो, मैं तुम्हें वैसी ही देखना चाहता हूँ, तो काहे को बदलने को कहूँगा?”
“कहीं ऐसा तो नहीं ना कि, तुम्हें मुझसे सब उम्मीदें ही ख़त्म हो गई हों?”
“हा…हा…हा…ठीक कहा डियर; और कुछ रह गई हों, तो उन्हें भी ख़त्म करना चाहता हूँ।”
“मतलब?”
“मतलब यह कि, मैं उस स्तर पर पहुँचना चाहता हूँ; जहाँ से तुम्हें एक उस इंसान की तरह देख सकूँ जो अपने चाल-चलन, बातों और आदतों के लिए ख़ुद ज़िम्मेदार हो। हो सकता है, तुम में कुछ या बहुत सी ऐसी बातें हों जो मुझे पसंद नहीं; लेकिन यह भी तो सोचो कि, अगर मैं उन सब को बदल देने की ज़िद पर अड़ जाऊँ और हो सकता है; मेरा प्यार समझ कर तुम कुछ बदल भी लो,तो वह तुम कैसे होओगी? मेरी बनाई एक मॉडल हो जाओगी। हमको हमेशा तो सिखाया जाता रहा है कि यह करो, ऐसा करो; अच्छा और बुरा। तो हम ऑलरेडी एक पिंजरे में हैं; मेरा प्यार तुम्हारा पिंजरा बदलने भर के लिए नहीं है।”
“तो तुम्हें तो मेरा प्यार पिंजरा लगता होगा? मेरी इतनी रोका-टोकी और तुम्हारे हर मिनट साथ रहने की चाहत…”
“हा…हा…हा…तुम्हें क्या लगता है, मैं इतना बुद्धु हूँ जो तुम्हारे पिंजरे में आ जाऊँगा? हा…हा…हा…अब समझ में आई तुम्हारे कि, मैं तुम्हारी कोई बात क्यों नहीं मानता? हा…हा…हा…अभी तुम मुझे बदलोगी, फिर औरों की तरह कह सकती हो कि, तुम पहले जैसे नहीं रहे। हा…हा…मैं क्यों यह रिस्क लूँगा भाई? टेढ़ा हूँ और मेरी मर्ज़ी के हिसाब से ही और टेढ़ा होता जाऊँगा।” उसके चेहरे पर वही अल्हड़ता छाने लगी, जिसके लिए मैं बावला हुआ फिरता हूँ।
“कमीने! बहुत ज़्यादा दुष्ट हो यार।” उसने मुक्के की तरह अपना दाहिना हाथ मेरी ओर बढ़ाया और मेरी बाईं बाँह के नीचे से गुज़ारते हुए मुझे जकड़ लिया। उसके खुले बालों के पहरे में भी मैंने उसकी उन आँखों की झलक देख ली थी, जो मूँदी हुई थीं और जिनकी चाहत ख़्वाबों के मकड़जाल पसारने की नहीं थी।
ये कहानी ‘हंड्रेड डेट्स ‘ किताब से ली गई है, इसकी और कहानी पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएं – Hundred dates (हंड्रेड डेट्स)
