Hundred Dates
Hundred Dates

Hindi Love Story: दिन की तेज़ बारिश के बाद शाम के नम मौसम में किसी सड़क से गुज़रते, फुटपाथ पर कोई भुट्टे वाला मिल जाए तो चेहरे की रौनक कितनी बढ़ सकती है, उस दिन मैंने देखा। देखा यह भी कि, दिलकशी उस लड़की के साथ भी की जा सकती है, जिसे शराब से चिढ़ हो। फुटपाथ से सटकर भुट्टे वाले से थोड़ी ही दूरी पर हमने कार खड़ी की हुई थी और नींबू, नमक के साथ भुट्टे और कार से थोड़ी ही दूर खड़े एक कपल की लड़ाई का भरपूर मज़ा ले रहे थे। उन्होनें भी अपनी बाइक फुटपाथ से सटाकर खड़ी की हुई थी, और बाइक पर लदे हुए ही उनकी हरकतों से यह तय था कि, तनातनी का माहौल शबाब पर है। हमने एक खेल खेला; उस कॉलेज कपल के हाव-भाव परख कर उसे बताना था कि, लड़की क्या कह रही होगी और उसके बाद मुझे बताना था कि लड़का क्या कह रहा होगा।

“अब बस भी करो यार, कोई ऐसे हमारा मज़ाक उड़ाए तो…” उसके अंदर की अच्छी लड़की ने जागते और हँसते हुए कहा।

“उड़ा ले जिसे जो उड़ाना हो, पर हमें पता नहीं चलना चाहिए…हा…हा…हा…”

हमारे भुट्टे ख़त्म हुए तो मैंने गहनता से कहा- “इन दोनों की लाइफ़ में कुछ अधूरापन है, क्यों ना कुछ पूरा किया जाए?”

“हम क्या कर सकते हैं और हमें क्या पड़ी है? तुम्हारा दिमाग तो ठीक है ना? किसी के बीच बेवजह पड़ना कोई अच्छी बात नहीं।”

“डार्लिंग, प्रेमियों को मिलाना तो अच्छी बात है ना?” उसने भाँप लिया कि उसका निहायत ही पाजी बॉयफ्रेंड, आज कुछ कांड करने के पक्के मूड में है।

“ठीक है, चलो बात करते हैं उनसे कि, प्रॉब्लम क्या है; पर उन्होंने हमें भगा दिया तो?”

“मर गए मुझे भगाने वाले। अब देखो, उन्हें मैं कैसे भगाता हूँ।”

“करने क्या वाले हो?”

“तुम बस, बैठो शांति से।”

मैंने उसकी तरफ़ का ग्लास आधा से ज़्यादा चढ़ा दिया और तेजी से उस पानी भरे गड्ढे से कार निकाली जो उनके बगल में था और जिसे देख मुझे बेदर्द शरारत सूझी थी।

‘छ्पाक’ की आवाज़ के साथ ही साथ हमने लड़के की तेज़ आवाज़ सुनी- “साला, हरामख़ोर…रुक अभी बताता हूँ…”

इधर मेरी मैडम चिल्लाई – “ये क्या किया तुमने। पागल हो गए हो?”

सुरक्षित दूरी बनाते हुए, मैंने कार बहुत धीमी कर ली थी। उस कपल को बाइक स्टार्ट करते और हमारी तरफ़ आने की फ़िराक़ में देख, मैंने कार की स्पीड बढ़ा ली। मैं हँसता जा रहा था और उसके डर का मज़ा ले रहा था।

मैडम का पारा चढ़ा हुआ था और बार-बार पीछे देखने की कोशिश कर रही थी- “हद करते हो तुम भी, पिटवाओगे किसी दिन। तुम्हें क्या प्रॉब्लम थी बेचारे खड़े थे तो…कितने बद्तमीज़ हो; कोई हमारे साथ ऐसा करे तो?”

एक-डेढ़ किलोमीटर अपने पीछे भगाने के बाद, ज़्यादा स्पीड से मैंने उनको पीछे छोड़ा और कहा- “देखा, कहा था ना उन्हें भगाऊँगा अपने पीछे…”

“हद करते हो यार। किसी को परेशान करना कोई अच्छी बात तो नहीं और उन्होनें तुम्हारी गाड़ी का नम्बर देखकर पुलिस कम्पलेन कर दी तो?”

“अबे अच्छे-बुरे की ठेकेदार, मेरे अच्छे कर्म तो तुम्हें दिखते ही नहीं हैं। देखो, दोनों लड़ रहे थे और हमारे पीछे भागते हुए कैसे चिपके हुए थे। आज तो हमने उनकी भी शाम अच्छी कर दी। थोड़े कीचड़ और पानी से, क्या ही गल जाने वाले हैं वे लोग। अब क्या हो रहा होगा पता है? अपने लड़ाई-झगड़े भूल कर हमें गाली देने में एकराग से गाना गा रहे होंगे। हा…हा…हा…और गाली तो हमें वो लोग दे भी कैसे पाएंगे, जब हमें लेनी ही नहीं…हा…हा…”

“वाह बेटा वाह! और पुलिस कम्पलेन कर दी तो?”

“अरे काहे की पुलिस कम्पलेन। सड़क में गड्डे हैं तो पानी भरेगा ही और गाड़ियों के चक्के पानी उछालेंगे ही, इसमें कौन सी धारा लगनी है? हा…हा…हा…और हम पढ़े-लिखे समझदार लोग ऐसी वाहियात हरकत करेंगे क्यों भला? बल्कि उन्होंने हमें वे गालियाँ देकर क्राइम किया है, जो हमने ली नहीं हैं…हा…हा…हा…”

“बहुत कमीने हो यार…सच में।” उसने भी हँसते हुए कहा और उसके चेहरे पर छायी अच्छाई की देवी की जगह पिशाचिनी ने ले ली।