Procrastination in Teenager: प्रोक्रेस्टिनेशन यानी टालमटोल की समस्या टीनएजर में बहुत आम है। यह आदत टीनएजर्स के पर्सनल ग्रोथ के लिए एक समस्या की तरह है। अगर समय रहते टीनएजर्स अपने टालमटोल की आदत को सही करने पर काम नहीं करेंगे तो यह भविष्य में उनके लिए एक समस्या बन जाएगा। टीनएजर्स में टालमटोल की समस्या को सही रणनीति के साथ सही किया जा सकता है। आज इस लेख में हम आपके साथ कुछ छोटे-छोटे टिप्स साझा करेंगे, जिसे अपनाकर आप अपने टालमटोल की समस्या से निजात पा सकते हैं। आईए जानते हैं, इन टिप्स को;
छोटे-छोटे लक्ष्य बनाएं
अगर आप बड़े लक्ष्य बनाकर उस पर कार्य नहीं कर पाते या जल्द ही ऊब जाते हैं, तो अपने बड़े लक्ष्य को छोटे-छोटे लक्ष्य में बांटकर कम करें। जब आप छोटे-छोटे लक्ष्य बनाकर उस पर कार्य करते हैं, तब आपको अपने छोटे लक्ष्य के पूरा होने पर अगले लक्ष्य पर काम करने के लिए प्रोत्साहन मिलता है।
टाइम-टेबल बनाएं
आप अपने दिन के छोटे से बड़े कार्य के लिए टाइम-टेबल बनाएं। अपने खाने, सोने, पढ़ने और खेलने सभी कार्यों के लिए अपने टाइम-टेबल में समय निर्धारित करें तथा उसे फॉलो करें।
अपने पढ़ाई के लिए 25-25 मिनट की सीटिंग तैयार करें। एक से दूसरे सीटिंग के बीच में 5 से 10 मिनट का ब्रेक रखें। उस बीच खुद को फ्रेश करने के लिए चहल कदमी करें। इससे आपका दिमाग और शरीर दोनों स्वस्थ महसूस करेगा तथा आपका ध्यान पढ़ाई में अधिक लगेगा।
अपने हर कार्य को खत्म करने के लिए खुद के लिए एक डेडलाइन निर्धारित करें। उस डेडलाइन तक अपने कार्य को खत्म करने की पूरी कोशिश करें।

सेल्फ मोटिवेटेड बनें
किसी भी नए काम को सिखने या शुरू करने से पहले डर लगना बहुत बड़ी समस्या नहीं है, यह आम बात है। किसी कार्य से डर, समस्या जब बन जाती है, जब आप डर के कारण उस कार्य को करने की जिम्मेदारी ही नहीं लेना चाहते।
आप सेल्फ मोटिवेटेड बनें। खुद से कहें आप इस कार्य को कर सकते हैं। अगर आपको नहीं आता है तो आप सीख कर, उस कार्य को कर सकते हैं। किसी नए कार्य को सीख कर उसे पूरा करना आपके लिए एक मौका है, खुद को बेहतर बनाने का। इस तरह के पॉजिटिव थॉट्स के साथ खुद को सेल्फ मोटिवेटेड रखें।
अगर आपको कोई काम मुश्किल लगता है, इस लिए उसकी जिम्मेदारी लेने से ना बचें। मुश्किल कार्यों की शुरुआत छोटे-छोटे कार्यों को पूरा करने से करें।
डिजिटल डिस्ट्रैक्शन से बचें
आज के बच्चों की सबसे बड़ी समस्या है डिजिटल डिस्ट्रैक्शन। वह अपना समय डिजिटल चीजों के साथ ज्यादा बिताते हैं और कब डिजिटल चीज उनके लाइफ में डिस्ट्रैक्शन बन जाती है, वह खुद भी नहीं समझ पाते हैं। टीनएजर्स को अपना स्क्रीन टाइम, डिजिटल गेम्स तथा सोशल मीडिया के उपयोग का समय सीमित करना चाहिए। यह डिजिटल डिस्ट्रैक्शन उनका काफी समय बर्बाद करते हैं।
अपने स्वास्थ्य का ख्याल रखें
टीनएजर्स को नियमित रूप से अपने दिनचर्या में व्यायाम और खेलों को शामिल करना चाहिए। दिन में काम से कम 60 मिनट शारीरिक गतिविधि जरूर करना चाहिए, ताकि उनका मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य संतुलित रहे।
