fifty shades of grey novel in Hindi: चारों ओर रोशनी फैली हुई थी। तेज़, गरमाहट से भरी तीखी रोशनी…। मैंने कुछ और कीमती पलों तक उसे अपने से परे रखने की कोशिश की पर चमक इतनी ज्यादा है कि मुझे जागना ही पड़ा। एक शानदार रोशनी से जगमगाते सिएटल ने मेरा स्वागत किया। पूरी खिड़कियों से आने वाली रोशनी कमरों में पसरी हुई है। हमने कल रात खिड़कियां बंद क्यों नहीं कीं? मैं क्रिस्टियन ग्रे के विशाल पलंग पर उसके बिना लेटी हूं।
मैं कुछ पल वहीं लेटी खिड़कियों से सिएटल के आकाश को घूरती रही। बादलों की दुनिया कितनी अवास्तविक लगती है। एक फैैंटेसी-ज़मीन से ऊंचा उठा हुआ, हवा में खड़ा एक किला-जिंदगी की हकीकतों से कहीं परे-भूख, उपेक्षा और दुष्ट मान्यताओं से कहीं परे!! मैं सोचने लगी कि एक बालक के रूप में उसका जीवन कैसा रहा होगा। मैं समझ सकती हूं कि वह यहां इस आलीशान कला के नमूने में सुंदर कलाअघ्तियों से घिरा अकेला क्यों रहता है? वह उस दुनिया से बहुत दूर है, जहां से चला था। मैंने त्योरी चढ़ाई क्योंकि अभी तक समझ नहीं आया कि वह अपने-आप को मुझे छूने क्यों नहीं देता।
मैं भी खुद को इस किलेनुमा घर में बड़ा अजीब महसूस कर रही हूं। मैं हकीकत से परे हूं। मैं इस फैंटेसी घर में अपने फैंटेसी पुरुष मित्र के साथ फैंटेसी सेक्स का आनंद ले रही हूं। हालांकि हकीकत यह है कि वह मुझसे एक बेहूदे अनुबंध पर हस्ताक्षर चाहता है, वैसे उसने कहा है कि वह अधिक देने की कोशिश करेगा। मैं इस बात का मतलब नहीं समझ पा रही। मुझे इस बात का मतलब पूछना होगा। तभी अंदाज़ा लगा सकूंगी कि हम दोनों अब भी झूलों के अलग-अलग छोर पर हैं या थोड़ा-बहुत करीब आए हैं।
मैं शरीर में अकड़न के साथ पलंग से कूदी और आंखें नचाईं। वैसे मैंने देख लिया था कि वह सनकी आसपास तो नहीं है। मैंने तय किया कि उसके निजी ट्रेनर की बात करूंगी। अगर मैंने हस्ताक्षर किए तो…। मेरे भीतर बैठी लड़की ने आंखें तरेरीं। बेशक! तू साइन करेगी। मैंने उसे अनदेखा किया और बाथरूम का छोटा-सा दौरा करने बाद बाहर आ गई। फिर मैं क्रिस्टियन की खोज में निकली।
वह अपनी आर्ट गैलरी में नहीं है पर एक सुसंस्कृत सी दिखती मध्यम आयु की महिला रसोई साफ करती दिखी। मैं उसे देखते ही वहीं अटक गई। उसके छोटे लाल बाल और सुंदर सी नीली आंखें हैं, उसने नीली तंग व लंबी स्कर्ट के साथ सफेद कमीज़ पहनी है। मुझे देखते ही बड़ी सी मुस्कान दी।
“गुडमोर्निंग मिस स्टील! क्या आप नाश्ता लेना चाहेंगीं?” उसके सुर की गरमाहट में व्यावसायिक लहज़ा है। मैं दंग हूं, क्रिस्टियन की रसोई में यह महिला कौन है? मैंने सिर्फ क्रिस्टियन की टी-शर्ट पहनी है और मैं कपड़ों की कमी के कारण खुद को असहज पा रही हूं।
“माफ कीजिए, मैंने आपको पहचाना नहीं।” मैंने अपने स्वर में छिपे उद्वेग को छिपाते हुए कहा।
“ओह! माफ करें। मैं मिसेज जोंस हूं। मि. ग्रे की हाउसकीपर। उनके रसाई और घर की व्यवस्था मैं ही देखती हूं।”
“ओह! “
“कैसी हैं आप?”
“मैम! क्या आप नाश्ता लेना चाहेंगी?”
मैम …!
“थोड़ी चाय चलेगी। थैंक्स! क्या आपको पता है कि मि. ग्रे कहां है “
“वे स्टडी में हैं।”
“धन्यवाद।”
मैं डरते-डरते उसी ओर चल दी। क्रिस्टियन भूरे बालों वाली आकर्षक औरतों को ही काम पर क्यों रखता है? मेरे दिमाग में जाने क्या-क्या घूमने लगा। क्या वे सब उसकी पुरानी सेक्स गुलाम हैं? मैंने इस सोच को परे झटकने में ही भलाई समझी। दरवाजे में धीरे से झांककर देखा तो वह खिड़की की ओर मुंह किए हाथ में फोन लिए खड़ा था। काली पैंट और सफेद कमीज़ पहने क्रिस्टियन के बाल अभी गीले हैं। शायद कुछ देर पहले ही नहाया होगा। मैं अपनी नकारात्मक सोच से बुरी तरह हिली पड़ी हूं।
“जब तक…उस कंपनी के पी एंड एल में सुधार नहीं होता, तब तक मुझे उसमें कोई दिलचस्पी नहीं है। हमें भार नहीं उठाना… मुझे किसी तरह के झूठे बहाने नहीं चाहिए…मार्को से कहना कि मुझे फोन करे, अब तो अति हो गई… हां, बर्नी से कहो कि वह प्रोटोटाइप ठीक है पर अब भी मैं यकीन से नहीं कह सकता। बस कुछ कमी है… मैं आज दोपहर उससे मिलना चाहूंगा… उसकी टीम भी आ जाए तो बेहतर होगा… हां, लाइन फिर से एंड्रिया को दे दो। उसने इतंज़ार किया, दुनिया का शहंशाह खिड़की से बाहर देख रहा है और आकाश में बने किले से नीचे जा रहे लोगों को निहार रहा है। एंड्रिया… “
उसने नज़र उठाते ही अचानक ऊपर की ओर देखा। उसके प्यारे से चेहरे पर भीनी-सी मंद मुस्कान खेल गई। मैं तो कुछ बोल ही नहीं सकी। बेशक वह इस ग्रह का सबसे खूबसूरत मर्द है, नीचे से जा रहे लोगों के लिए, मेरे लिए… नहीं, मेरे लिए नहीं… भीतर बैठी लड़की चिढ़ गई। अभी तो वह मेरा है… अचानक ही मेरा दिल तेज़ी से धड़कने लगा।
वह बात करता रहा पर उसकी आंखें मुझ पर ही टिकी रहीं।
“आज सुबह कोई मीटिंग मत रखना पर बिल से कहो कि मुझसे बात करे। मैं दो बजे के करीब आऊंगा। मुझे आज दोपहर मार्को से बात करनी है, उसमें आधा घंटा लगेगा। उसके बाद या कल बर्नी की टीम को बुला लो और इस सप्ताह रोज़ क्लॉड से मिलने का समय रखना… उसे इंतज़ार करने को कहो… अरे ……नहीं, मैं डारफर के लिए कोई प्रचार नहीं चाहता… सैम को बोलो कि देख ले…. नहीं…कौन सा इवेंट? वह अगले शनिवार… रुको! “
“तुम जार्जिया से कब आओगी?” उसने पूछा।
“शुक्रवार “
उसने बातचीत जारी रखी।
“मुझे एक और टिकट चाहिए, मेरी डेट है… हां एंड्रिया, मैंने यही कहा… एक डेट है।
मेरे साथ मिस एनेस्टेसिया स्टील होंगी। बस…हो गया।” उसने फोन रख दिया।
“शुभप्रभात मिस स्टील! “
“मि. ग्रे!” मैं शरमाते हुए मुस्कराई।
वह उसी अदा के साथ चलता हुआ डेस्क तक आया और मेरे आगे खड़ा हो गया। फिर अपने हाथ के पिछले हिस्से से मेरे गाल सहलाए।
“तुम इतनी गहरी नींद में थीं कि जगाने को मन नहीं हुआ। अच्छी नींद आई?”
“बहुत नींद ली। मैं तो नहाने जाने से पहले हैलो कहने आई थी।”
मैंने उसे घूरा और आंखों ही आंखों में पी लिया। वह आगे झुका और प्यार से चूमा और मैं खुद को रोक नहीं सकती। मैंने उसके गले में बांहें डाल दीं और मेरी अंगुलियां उसके गीले बालों में घूमने लगीं। मैंने अपने शरीर को उसकी ओर धकेलते हुए चूमा। वह इस बर्ताव से पल भर के लिए हैरान तो हुआ पर फिर उसे भी तैयार होते देर नहीं लगी। मैं उसे पाना चाहती थी। हम दोनों ने गहरे आवेग से भरा चुंबन लिया। हमारी जीभें आपस में टकराईं और उसकी आंखें मुंद गईं।
“लगता है कि नींद ज्यादा ही अच्छी हो गई। यहां से जाओ वरना इसी डेस्क पर मुझे मजबूरन…।” उसने कहा
“मैं तो डेस्क के लिए तैयार हूं।” मैंने हौले से कहा और पूरे शरीर में सरसराती चाह को महसूस किया।
उसने मुझे एक पल से भी कम समय के लिए घूरा।
“मिस स्टील! लगता है कि आप यहां का भी स्वाद लेना चाहती हैं? तुम तो दिन-ब-दिन अधीर होती जा रही हो।”
“मैं तो सिर्फ तुम्हारा ही स्वाद चखना चाहती हूं। मुझे कोई और दिलचस्पी नहीं है।”
ये उपन्यास ‘फिफ्टी शेड्स ऑफ ग्रे’ किताब से ली गई है, इसकी और उपन्यास पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएं – fifty shades of grey(फिफ्टी शेड्स ऑफ ग्रे)
“ओह! केवल मैं…।” वह इन शब्दों से झूम उठा और एक ही झटके में डेस्क का सारा सामान नीचे धकेल दिया। मुझे अपनी बांहों में उठाया और डेस्क पर लिटा दिया।
“जो चाहोगी, तुम्हें मिलेगा। यही चाहती हो तो बंदा हाज़िर है।” और फिर उसे अपना जिरहबख्तर पहन कर मैदान में आने में देर नहीं लगी। अगले ही पल हम उस सफर पर निकल पड़े, जिसकी मंजिल पर पहुंचने के बाद मुझे अपनी भी सुध नहीं रहती थी। उसकी जुनून और अधिकार भाव से भरी आंखें मुझ पर ही टिकी थीं। बेशक यह प्यार नहीं था…..ये जिस्मों का नाता था। मैंने अपनी आंखें बंद कीं ताकि सुख की उस चरम सीमा तक जा सकूं, जहां देह का रोम-रोम तृप्त हो जाता है।
उसने प्रक्रिया पूरी होते ही मुंह से आह निकाली और मैं भी उस बिंदु को छूकर लौट आई। मानो मैंने सूरज को छुआ हो और झुलसकर धरती पर आ गिरी। वह एक ही झटके में मुझसे अलग हो गया लेकिन मुझे खुद को संभालने में समय लगा।
“हद है! एना तुम मेरे साथ यह कर क्या रही हो?” उसने हांफते हुए मेरी गर्दन से अपनी नाक रगड़ी। मैंने उसके आसपास अपनी टांगों का घेरा कस दिया।
“तुम मेरी हो।” उसके चेहरे के भाव अचानक ही बदल गए और मुझे थोड़ा चौकन्ना होना पड़ा।
उसने एक-एक शब्द को चबाते हुए कहा।” तुम मेरी हो। समझ गईं न?”
मैं समझ नहीं पा रही कि उसे यह सब क्यों कहना पड़ रहा है। यह कैसी असुरक्षा है या फिर उसे मुझ पर पूरा भरोसा नहीं है।
“हां! मैं तुम्हारी हूं।” मैं हौले से बोली।
“क्या तुम्हारा जार्जिया जाना तय है?”
मैंने धीरे से हामी दी। उसी एक पल में मैंने उसके भावों को सिर से पैर तक बदलते देखा। अचानक ही वह परे हट गया।
“क्या तुम कुछ महसूस कर रही हो?”
“हां! थोड़ी सी बेचैनी।”
“बेशक, होना भी यही चाहिए ताकि तुम्हें याद रहे कि तुम किसके साथ थीं और यहां मेरे अलावा कभी और किसी की याद न आए।”
उसने मुझे चिबुक से थामा और चूम लिया। फिर हाथ देकर खड़ा कर दिया। मैंने अपने पास पड़े फायॅल पैकेट को देखा।
“हमेशा तैयार रहते हो “?
उसने मुझे पैकेट उठाते देखा तो बोला “एना! इंसान को सपने तो देखने ही चाहिए और हमेशा तैयार रहना चाहिए। क्या पता, कब और कहां; कौन-सा सपना सच हो जाए।”
वह कितना अलग तरीके से बोल रहा है। समझ नहीं आ रहा। संबंधों के बाद चेहरे पर आया उल्लास घुलने लगा है। इस बंदे की मुश्किल क्या है?
“तो क्या डेस्क पर यह सब करना, तुम्हारा सपना था?” मैंने हमारे बीच के तनाव को घटाने के लिए पूछ लिया।
उसने एक अजीब-सी मुस्कान दी, जो उसकी आंखों तक नहीं पहुंची। मैं समझ गई कि वह पहले भी दूसरी सेक्स गुलामों के साथ यह सब कर चुका है। इस सोच से मन कसैला हो गया। मैं अंदर ही अंदर बेचैन होने लगी। मुंह का स्वाद बिगड़ गया था।
“बेहतर होगा कि मैं नहा लूं।” मैं उसके पास से जाने लगी।
उसने त्यौरी चढ़ा कर बालों में हाथ फेरा।
“मुझे दो फ़ोन करने हैं। तुम नहा कर आओ, नाश्ते की मेज़ पर मिलते हैं। शायद मिस जोंस ने तुम्हारे कपड़े भी धो कर इस्त्री कर दिए होंगे। वे अलमारी में हैं।”
क्या? हद हो गई। उन्होंने ऐसा कब किया? अरे, कहीं हमारी बातें तो नहीं सुनी होंगीं?
“धन्यवाद “
“स्वागत है।”
मैं अभी डेस्क पर हुई घटना के लिए थैंक्यू नहीं कह रही। हालांकि यह काफी..
“क्या?” उसने मेरी त्योरी चढ़ी हुई देखी
“क्या हुआ?” मैंने आराम से पूछा
“तुम कहना क्या चाहती हो?”
“तुम्हारा बर्ताव आम दिनों से ज्यादा अजीब था।”
“मेरा बर्ताव अजीब…… मैं ऐसा हूं क्या?” उसने मुस्कान देनी चाही।
“कभी-कभी “
“वैसे मिस स्टील मैं तो आपको देखकर हैरान हूं।”
“क्यों?”
“कह सकते हैं कि ये दावत तो अचानक ही हो गई।”
“मि. ग्रे! आनंद देना ही हमारा लक्ष्य है।” मैंने उसी के शब्द उसे सुनाते हुए, उसी की तरह गर्दन एक ओर झुका दी।
“सही कहा……मुझे लगा कि तुम नहाने जा रही हो।”
“ओह! वह मुझे यहां से भगाना चाहता है।”
“हां… अम्म। अभी थोड़ी देर में मिलते हैं।” मैं अहमकों की तरह उसके ऑफिस सेनिकल आई।
वह उलझन में था। क्यों? जहां तक शारीरिक संपर्क की बात है, उसमें तो कोई कमी नहीं थी पर भावात्मक तौर पर-मैं उसकी प्रतिक्रिया से चिढ़ी हुई हूं और वह सब भावात्मक रूप से उतना ही भरपूर था जितनी कि बूढ़ी माई के मीठे बालों में पौष्टिकता होती है। आप खुद ही अंदाज़ा लगा लें।
मिसेज जोंस अभी रसोई में हैं।” क्या आप अब चाय लेना चाहेंगीं?”
“मैं दो मिनट में नहा कर आई।” मैंने कहा और अपना सफेद पड़ गया चेहरा लेकर कमरे में घुस गई।
नहाते समय यही सोचती रही कि आखिर उसे हुआ क्या था। मैं आज तक उससे ज्यादा उलझे हुए इंसान से नहीं मिली और मैं उसके पल-पल बदलने वाले मूड को भी नहीं समझ सकती। जब मैं स्टडी में गई, तब तो वह ठीक ही लग रहा था। हमने सेक्स किया……और उसका मूड बदल गया। नहीं, बात पल्ले नहीं पड़ी। मैंने अपनी भीतर बैठी सयानी लड़की को देखा जो मुझे देखकर सीटियां बजा रही थी और दूसरी लड़की तो अभी उसी नशे में थी, उससे कुछ पूछना बेकार था। वैसे हममें से किसी को भी कुछ समझ नहीं आ रहा था।
मैंने तौलिए से बाल सुखाए। क्रिस्टियन की इकलौती कंघी से बाल संवारे और जूड़ा बांध लिया। केट की पोशाक धो के और इस्त्री करके मेरी अलमारी में टंगी है और साथ ही धुले हुए अंत:वस्त्र भी हैं। मिसेज जोंस तो कमाल हैं। मैंने केट के जूते पहन कर झट से पोशाक की सलवटें निकालीं, गहरी सांस ली और बड़े कमरे में चल दी।
क्रिस्टियन अब भी कहीं नहीं दिख रहा। मिसेज जोंस पैंटन्न्री के सामान की जांच कर रहीहैं।
“मिस स्टील, चाय?”
“प्लीज! “मैं मुस्कुराईं।
“कुछ और लेंगी?”
“नहीं, धन्यवाद।”
“नहीं कैसे, तुम्हें नाश्ता तो करना ही होगा। मिसेज जोंस, ये नाश्ते में पैनकेक, बेकनव अंडे लेती हैं।” क्रिस्टियन अचानक प्रकट हो गया।
“हां, मि. ग्रे! सर आप क्या लेंगे?”
“ऑमलेट और कोई फल प्लीज़! “वह मेरे ऊपर से नज़रें नहीं हटा पा रहा है।
“बैठो।” उसने बारस्टूल की ओर संकेत किया।
वह भी साथ आ गया और मिसेज जोंस नाश्ता बनाने लगीं। हे भगवान! कोई दूसरा हमारी बातें सुने, यह सोचकर ही हिचकिचाहट सी होती है।
“तुमने एयर टिकट खरीद ली?”
नहीं, घर जाकर इंटरनेट से ले लूंगी।
“वह अपनी चिबुक मलता हुआ कोहनियों के बल झुक गया।
“क्या तुम्हारे पास पैसे हैं?”
अरे नहीं!
“हां।” मैंने इस तरह बात की मानो किसी छोटे बच्चे को बहला रही हूं।
उसने एक भौं नचाई।
“हां, धन्यवाद! मेरे पास हैं।” मैंने झट से गलती सुधार ली।
“मेरे पास एक जेट है। जो तीन दिन तक खाली है। तुम चाहो तो उसमें जा सकती हो।”
मैंने उसे घूरा। बेशक उसके पास जेट है और मुझे अपनी आंखें नचाने की लत को उसके सामने रोकना होगा। मैं हंसना चाहती हूं पर हंस नहीं सकती। कहीं बुरा मान गया तो?
“हम पहले ही तुम्हारी कंपनी की संपदा का नाजायज फायदा ले चुके हैं। मैं दोबारा ऐसा नहीं करना चाहूंगी।”
यह मेरी कंपनी है। यह मेरा जेट है।” लगता है कि उसके दिल को ठेस लगी है। ओह! लड़के और उनके खिलौने।
“प्रस्ताव का धन्यवाद! मैं नियमित उड़ान से ही जाना चाहूंगी।”
ऐसा लगा कि वह अभी और बहस करना चाहता था पर उसने इरादा बीच में ही छोड़ दिया।
“जैसा तुम चाहो।” उसने आह भरी। क्या तुमने इंटरव्यू के लिए इतनी तैयारी की है?”
“नहीं “
“अच्छा! अब भी नहीं बताने जा रहीं कि कौन से प्रकाशन गृह में जा रही हो?”
“नहीं।”
उसके होठों पर एक जबरन मुस्कान आ गई।
“मिस स्टील! मुझे पता लगाने के सभी जुगाड़ आते हैं।”
“मि. ग्रे! मैं अच्छी तरह जानती हूं। क्या आप मेरा फोन ट्रेक करने वाले हैं?” मैंने भोलेपन से पूछा।
“दरअसल आज दोपहर बिजी हूं इसलिए किसी और को यह काम दूंगा।”
क्या वह मज़ाक कर रहा है?
“अच्छा! इस काम के लिए बंदा रखोगे तो इसका मतलब है कि तुम्हारी कंपनी में कर्मचारियों की संख्या काफी ज्यादा है।”
“मैं मानव संसाधन प्रमुख को एक मेल करूंगा और वह सब पता लगा लेगी।” उसने बमुश्किल अपनी हंसी रोकी।
ओह! शुक्र है, इसकी हंसी तो लौटी।
मिसेज जोंस ने नाश्ता रखा तो हम कुछ पल तक चुपचाप खाते रहे। वे पैन खाली करतेही वहां से निकल गईं। मैंने उन्हें कनखियों से जाते देखा।
“एनेस्टेसिया! क्या बात है?”
“पता है। तुमने कभी नहीं बताया कि तुम्हें छुआ जाना क्यों अच्छा नहीं लगता?”
उसके चेहरे का रंग उतर गया और मुझे अपना यह सवाल दोहराने पर अफसोस होने लगा।
“मैंने तुम्हें जितनी बार बताया है, उतना तो कभी किसी को नहीं बताया।” उसकी आवाज़ सपाट थी।
ये भी साफ है कि वह कभी किसी पर भरोसा नहीं करता। क्या उसके कोई पक्के दोस्त नहीं? शायद उसने मिसेज रॉबिन्सन को बताया हो? मैं पूछना चाहती हूं पर पूछ नहीं सकती-मैं जख्मों पर नमक नहीं डालना चाहती। सचमुच वह इंसान एक अकेला और तन्हा द्वीप है।
“क्या तुम जार्जिया जाकर हमारे अनुबंध के बारे में सोचोगी?”
“हां “
“क्या मुझे याद करोगी?”
मैंने इस सवाल पर उसे हैरानी से देखा।
“हां।” मैंने पूरी ईमानदारी से जवाब दिया।
वह इतने थोड़े ही समय में मेरे लिए इतने मायने कैसे रख सकता है? सच्ची……ये तो मेरे दिल में ही बस गया है…। वह मुस्कुराया और उसकी आंखें दमक उठीं।
“मैं भी तुम्हें याद करूंगा। जितना तुम जानती हो, उससे कहीं ज्यादा।” उसने गहरी सांस ली।
मेरा मन उसके शब्दों से पिघल गया। वह सचमुच कोशिश कर रहा है। उसने प्यार से मेरे गाल सहलाए और आगे आकर उन्हें चूम लिया।
दोपहर बाद, मैं लॉबी में बैठी सिएटल इंडिपेंडेंट पब्लिशिंग के मि. जे. हाइड का इंतज़ार कर रही हूं और घबराहट में अंगुलियां चटकाने के सिवा कुछ नहीं सूझ रहा। यह आज का दूसरा इंटरव्यू है। मैं इसे लेकर बहुत उत्साहित हूं। पहला इंटरव्यू तो ठीक रहा पर वह कंपनी काफी बड़ी है और वहां काम करने का मतलब होगा कि मेरी गिनती कई संपादकीय सहायिकाओं में होगी। उनकी शाखाएं दूर-दूर तक फैली हैं जबकि यह जगह यानी एसआईपी छोटी और गैर पारंपरिक किस्म की लग रही है। यह स्थानीय लेखकों को प्रोत्साहित करती है इसलिए मैं यहां काम करना चाहती हूं।
मेरे आसपास की जगह खाली है शायद यहां का नमूना ही ऐसा बना है। मैं चमड़े के बने हरे काउच पर बैठी हूं। यह वैसा नहीं है जैसा क्रिस्टियन के घर में है। अचानक ख्याल आ गया कि वह उस पर क्या-क्या करता होगा। नहीं-नहीं! मुझे अपने दिमाग को वहां से हटाना होगा। मैंनेकाउच पर हाथ फेरा और फिर रिसेप्शन पर बैठी एक युवा अफ्रीकी-अमरीकी महिला पर नज़र चली गई। कानों में चांदी के लंबे झुमके और लंबे सीधे बाल। वह दिखने में बड़ी ही बेपरवाह-सी लगी और मुझे लगा कि मैं उससे दोस्ती कर सकती थी। ये सोचकर दिल को तसल्ली मिली। वह जब भी कंप्यूटर से मुंह उठाकर मुझे देखती, मैं भी मुस्कान दे देती।
मेरी मॉम के पास जाने की टिकट हो गई है। मॉम बहुत खुश हैं। सामान बंध गया है और केट ने कहा है कि वह मुझे एयरपोर्ट छोड़ आएगी। क्रिस्टियन ने हुक्म दिया है कि मैंफोन और ब्लैकबैरी साथ ले जाऊं। मैंने उसके हुक्मनामे पर आंखें नचाईं पर अब मुझे एहसास हो गया है कि वह ऐसा ही है। उसे हर चीज़ पर काबू रखना पसंद है, यहां तक कि मुझ पर भी! हां, उसके बारे में आप कुछ नहीं कह सकते। कभी-कभी तो कितनी प्यारी, दिल को लुभाने वाली और मज़ाकिया बातें करता है तो कभी-कभी अपनी बेरुखी से हैरानी में डाल देता है। उसने गैराज में खड़ी मेरी कार तक साथ जाने का इसरार किया। हे भगवान! मैं तो कुछ दिन के लिए जा रही हूं और वह ऐसे दिखा रहा है मानो हम कई सप्ताह के लिए बिछुड़ने वाले हैं। वह हमेशा मुझे ऐसे ही हत्थे से उखाड़ देता है।
“एना स्टील?” रिसेप्शन के पास खड़ी, लंबे काले बालों वाली महिला ने मेरा नाम लिया। उसके चेहरे पर भी वही मीठे और बेपरवाह से भाव हैं। उसे भी दोस्त बनाया जा सकता है। वैसे उम्र तीस के लपेटे में है या चालीस के……ये नहीं पता चलता। अकसर औरतों की उम्र धोखा देती है।
“जी हां!” मैं झट से खड़ी हो गई।
उसने मुझे विनम्र मुस्कान दी और आंखें दिलासा-सा देती लगीं। मैंने केट की ही पोशाक और काले पंप जूते पहने हैं। बाल एक टाइट जूड़े में बंधे हैं और एक लट आवारा हो गई है। उसने अपना हाथ आगे किया।
“हैलो एना। मैं एलिाजबेथ मार्गन! एसआईपी में मानव संसाधन प्रमुख हूं।”
“कैसी हैं आप। मैंने भी हाथ मिलाया। वह तो अपने पद के लिहाज़ से बड़ी सीधी-सादी लगती है।
“मेरे साथ आएं “
हम रिसेप्शन के पीछे बने दोहरे दरवाजे से एक भड़कीले रूप से सुसज्जित ऑफिस में पहुंचे और वहां से छोटे मीटिंग कक्ष में गए। दीवारें हल्की हरी हैं, जिन पर किताबों के शीर्षकों की तस्वीरें लगीं हैं। कांफ्रेंस टेबल पर एक युवक बैठा है, जिसके लाल बाल एक पोनीटेल में बंधे हैं। उसके दोनों कानों में चांदी की छोटी गोल बालियां देखी जा सकती हैं। उसने हल्की नीली कमीज़ के साथ कोई टाई नहीं पहनी। मैं पहुंची तो उसने मुझे अपनी गहरी नीली आंखों से ताका।
“एना स्टील! मैं जैक हाइड हूं। यहां का प्रमुख संपादक और तुमसे मिलकर खुशी हुई” हमने हाथ मिलाए। उसके भाव दोस्ताना होने के बावजूद शक के दायरे में आते हैं।
“क्या आप इतनी दूर से आई हैं?”
“नहीं, मैंने कुछ दिन पहले ही यहां घर ले लिया है।”
“ओह! फिर तो ठीक है। प्लीज़ बैठें।”
मैं बैठी और एलिजाबेथ भी वहीं बैठ गई।
“तो आप हमारे लिए काम क्यों करना चाहती हैं?” उसने पूछा।
उसने बड़े ही प्यार से मेरा नाम लिया और उसी तरह गर्दन एक ओर झुकाई जैसे कोई और भी करता है। ओह! ये क्या। मैंने अपना पूरा ध्यान उस ओर लगाना चाहा। फिर मैंने अपनी तैयार स्पीच सुनानी शुरू कर दी पर ये भी पता था कि मेरे गाल शरम से लाल दिख रहे होंगे। मैंने उन्हें देखा और केट की कही बात याद आ गई। हमेशा आंखों का संपर्क बना कर बात करो।
“आपकी जीपीए तो अच्छा है। इसके अलावा आप वहां क्या करती थीं?”
मैंने बताना शुरू किया कि मैंने कैंपस की लाइब्रेरी का काम संभाला हुआ है। मैंने यह भी बताया कि मैं अखबार के काम में मदद करती थी पर लेख नहीं लिखती थी। मैंने दो साहित्यिक संस्थाओं के अलावा क्लेटन के बारे में भी बताया और फिर उन पर ताबड़तोड़ जानकारी बरसा दी। हालांकि उन्हें हार्डवेयर की जानकारी से कोई लेना-देना नहीं था। वे दोनो हंसे और मैंने खुद को सहज पाया। मुझे भी बात करने में मज़ा आने लगा।
जैक हाइड ने तीखे और होशियार सवाल पूछे पर मैं नहीं हारी। मेरी पसंद की किताबों के बारे में बात चली तो मैंने सारे नाम गिना दिए पर उसे तो क्लासिक से कोई लेना-देना ही नहीं था। शायद उसने 1950 के दशक के बाद लिखा गया साहित्य ही पढ़ा था। साथ बैठी एलिजाबेथ नोट्स लेती रही। वह खास नहीं बोली। जैक बहस कर लेता है, आकर्षक है और बात करने से आपस में एक सहजता सी आ गई।
“आप पांच सालों में अपने-आप को कहां देखती हैं?”
क्रिस्टियन ग्रे के साथ। मैंने झट से यह सोच परे झटक दी।
“कॉपीएडिटिंग या कुछ भी। दरअसल मैं खुद को सीमाओं में बांधना नहीं चाहती। शायद साहित्यिक एजेंट।”
“बहुत खूब। एना। हमने सब पूछ लिया। क्या तुम कुछ पूछना चाहोगी?”
“आप कब से काम पर बुलाना चाहेंगे?”
“जल्दी से जल्दी। आप कब से आ सकती है “?
“अगले सप्ताह से।”
“ठीक रहेगा।” जैक ने कहा।
“बस हो गया। आज का इंटरव्यू पूरा हुआ।”
“एना! तुमसे मिलकर अच्छा लगा।” हाइड ने हाथ मिलाया और हल्का-सा दबा भी दिया। पता नहीं क्यों।
मैं कार की ओर चल दी। इंटरव्यू तो अच्छा ही हुआ पर कुछ कह नहीं सकते। मुझे इंतज़ार करना होगा।
मैं ऑडी में बैठकर चल दी। मेरे उड़ान रात पौने ग्यारह पर है इसलिए मेरे पास काफी वक्त है।
केट रसोई का सामान लगा रही थी।
“कैसा रहा?” उसने पूछा। खुली कमीजें, फटी जींस और सिर पर नीले रंग का कपड़ा। बस केट ही ऐसे सुंदर लग सकती है।
“केट! वैसे कह नहीं सकती, ये कपड़े दूसरे इंटरव्यू के हिसाब से ठीक नहीं थे।
वहां थोड़ा अनौपचारिक माहौल था।”
केट ने भौं नचाई।
“तू और बोहेमियन लुक!” उसने गर्दन एक और झुकाई। जिसे देखो मुझ
े उसकी याद दिलाता रहता है।
“एना! तू तो उस रूप में भी सजेगी।”
“मुझे दूसरी जगह पसंद है शायद बात बन जाए। जिसने इंटरव्यू लिया था वह लड़का.. “मैं बोलते-बोलते चुप लगा गई। मुझे भूलना नहीं चाहिए कि कैथरीन किसी मैगाफोन से कम नहीं।
वह एक राडार की तरह आसपास की हर जानकारी बटोरना जानती है। और फिर मुझे हतप्रभ कर देती है। उसने डिनर में क्या किया था?
“तुम क्रिस्टियन से पंगे क्यों लेती रहती हो? डिनर के समय जोस की बात क्यों की? तुम जानती हो कि वह जलनखोर है। पता है इससे कोई भला नहीं होगा “
“देख अगर वह इलियट का भाई न होता तो मैं और भी बुरा बोलती। मैं तो इसलिए उसे जला रही थी ताकि वह तेरी ओर खिंच सके।”
उसने हाथ खड़े कर दिए।
“अगर तुझे लगता है कि मुझे दखल नहीं देना चाहिए तो मैं नहीं दूंगी।”
“अच्छा! वैसे तुझे बता दूं कि उसके साथ से मेरी जिंदगी वैसे ही बहुत उलझी पड़ी है।”
“एना। तू ठीक तो है न? तुम कहीं जान बचाने के लिए मॉम के पास नहीं जा रहीं?”
मैं घबरा गई।” नहीं केट, तुमने ही तो कहा था कि मुझे ब्रेक लेना चाहिए।”
वह पास आई और हाथ थाम लिए। अरे ये क्या… केट तो कभी ऐसा नहीं करती।
आंसू छलकने को हैं… “पता नहीं! तू अलग सी लग रही है। उम्मीद करती हूं कि तू ठीक है। उस पैसे वाले कमीने के साथ तेरी जो भी परेशानी चल रही है, तू मुझसे बात कर सकती है। मैं कोशिश करूंगी कि उससे पंगा न लूं। वैसे बंदा बड़ा टेढा है। देख एना, कोई बात है तो बता मैं परखने की बजाए समझने की कोशिश करूंगी।”
मैंने आंसू पीछे धकेल दिए और उसे गले से लगा लिया- “ओह केट! शायद मैं उस पर मरने लगी हूं “
“एना! यह तो कोई भी देख सकता है। वह तुझ पर मरता है। वह तेरे पीछे दीवाना है। तुझ पर से आंखें नहीं हटाता।
मैं अनिश्चितता से हंसी।” तुझे ऐसा लगता है?”
“क्या उसने बताया नहीं?”
“नहीं ज्यादा शब्दों में नहीं… “
“क्या तुमने उससे कहा?”
“नहीं तो…… “मैंने कंधे झटके।
“एना! किसी को तो पहल करनी ही होगी। वरना ये रिश्ता कहीं नहीं जा सकेगा।”
“क्या…उसे बता दूं कि मैं क्या महसूस करती हूं।”
“कहीं वह मुझसे कतरा न जाए “
“तू इतने दावे से कैसे कह सकती है?”
क्रिस्टियन का ख्याल आते ही मन में एक छोटा-सा बच्चा आ गया। शायद वह बचपन में बहुत भयभीत रहा होगा इसलिए अब दुनिया को डराकर रखता है। इस सोच से कलेजा हिल गया।
केट ने भिंचे होंठों और सिकोड़ी हुई आंखों से देखा। बस गोल चश्मा और लगा ले, मेरे भीतर रहने वाली सयानी लड़की जैसी दिखेगी।
“तुम दोनों को बैठकर इस बारे में बात करनी चाहिए।”
“हम ज्यादा बात नहीं करते।” मैंने शरमाते हुए कहा। बेशक बिना कहे भी बातें होती हैं।
वह हंस दी- “अच्छा! अगर ऐसा है तो मानो कि तुमने आधी जंग जीत ली। एना! मैं कुछ चाइनीज़ पैक करा लाती हूं। जाने के लिए तैयार हो?”
“हां, अभी होती हूं। ज्यादा समय नहीं है।”
वह जैकेट उठाकर हवा हो गई और दरवाजा बंद करना भूल गई। मैंने दरवाजा बंद किया और उसके शब्दों पर गौर करते हुए अपने कमरे की ओर चल दी।
क्या क्रिस्टियन मेरे लिए अपनी भावनाएं प्रकट करने से डरता है? क्या उसके मन में मेरे लिए कोई भावनाएं हैं भी? बेशक वह मुझे पर मालिकान हक जताता है पर वह तो उसकी आदत है… वह ही चीज़ पर अपना स्वामित्व चाहता है।। मुझे लगा कि थोड़ा दूर होकर उसकी बातों पर गौर करना चाहिए।
मैं भी तुम्हें याद करूंगा… तुम जितना जानती हो उससे कहीं ज्यादा
तुमने मुझे सम्मोहित कर दिया है।
मैंने अपनी गर्दन झटकी। मैं अभी इस बारे में बात नहीं करना चाहती। मैं ब्लैकबेरी चार्ज कर रही हूं इसलिए अभी उसे नहीं ले सकती। ध्यान से देखा, कोई मैसेज नहीं था। मैंने लैपी ऑन किया तो वहां भी कुछ नहीं था बस उसका ई-मेल आई डी दिखा। मेरे भीतर बैठी सयानी लड़की ने मुझे देखते ही आंखें नचाईं और पहली बार मुझे एहसास हुआ कि मेरी इस आदत पर क्रिस्टियन मुझे फटकारना क्यों पसंद करता है।
“अच्छा! मैं उसे एक ई-मेल लिख दूंगी।”
फॉर्म: एनेस्टेसिया स्टील
सब्जेक्ट: इंटरव्यू
डेट: मई 30 2011 18:49
टू: क्रिस्टियन ग्रे
डियर सर
मेरे इंटरव्यू अच्छे रहे।
आपका दिन कैसा रहा?
एना
मैं बैठकर स्क्रीन को घूरने लगी। क्रिस्टियन तो अकसर फुर्ती से जवाब देता है। मैं इंतज़ार करती रही……करती रही और फिर कहीं जाकर इनबॉक्स से पिंग का स्वर सुनाई दिया।
फॉर्म: क्रिस्टियन ग्रे
सब्जैक्ट: मेरा दिन
डेट: मई 29 2011 19:03
टू: एनेस्टेसिया स्टील
डियर मिस स्टील
तुम जो भी करती हो। मैं उसमें दिलचस्पी रखता हूं। मैं आज तक तुमसे अधिक आकर्षक युवती से नहीं मिला।
मेरी सुबह सभी उम्मीदों से परे थी।
मेरी दोपहर उसके मुकाबले फीकी रही।
क्रिस्टियन ग्रे
सीईओ, ग्रे इंटरप्राइजिस होल्डिंग्स, इंक
फॉर्म: एनेस्टेसिया स्टील
सब्जैक्ट: अच्छी सुबह
डेट: मई 29 2011 19:05
टू: क्रिस्टियन ग्रे
डियर सर!
सुबह तो मेरे लिए भी बेमिसाल थी पर ये समझ नहीं आया कि मेरे साथ डेस्क पर जुनून से भरे पल बिताने के बाद अचानक तुम्हारे मूड को क्या हो गया। तुम अजीब झक्की सा बर्ताव कर रहे थे। ये मत सोचना कि मझे पता नहीं चला होगा।
नाश्ते के लिए मिसेज जोंस या तुम्हें धन्यवाद!
मैं उसके बारे में एक सवाल पूछना चाहूंगी बशर्ते तुम मुझ पर अपनी खीझ नहीं उतारोगे एना
फॉर्म: क्रिस्टियन ग्रे
सब्जैक्ट: प्रकाशन और तुम
डेट: मई 30 2011 19:10
टू: एनेस्टेसिया स्टील
झक्की! तुम प्रकाशन गृह में काम करने जा रही हो। कम से कम अच्छे शब्दों का चुनाव करना तो सीखो और मिसेज जोंस के बारे में क्या जानना चाहती हो? मैं भी सुनना चाहता हूं।
क्रिस्टियन ग्रे
सीईओ, ग्रे इंटरप्राइजिस होल्डिंग्स, इंक
फॉर्म: एनेस्टेसिया स्टील
सब्जैक्ट: तुम और मिसेज जोंस
डेट: मई 30 2011 19:17
टू: क्रिस्टियन ग्रे
डियर सर
भाषा अकसर इसी तरह रंग बदलती रहती है। यह कहीं हाथी दांत से बने महल-दोमहलों में कला का नमूना बनी टंगी नहीं रहती और हैलीपैड वाली छत से सारे सिएटल को नहीं निहारती रहती।
वैसे आपको मेरे शब्दों के चुनाव पर ऐतराज़ क्यों है? दरअसल आप जिस दुनिया से हैं, उसके बारे में मेरा अनुभव अभी सीमित है। यही वजह है कि आपको मेरे शब्द अजीब लगते हैं। क्या मिसेज जोंस आपकी पुरानी सेक्स गुलामों में से हैं?
एना
फॉर्म: क्रिस्टियन ग्रे
सब्जैक्ट: भाषा, ज़बान संभाल कर
डेट: मई 30 2011 19:22
टू: एनेस्टेसिया स्टील
मिसेज जोंस मेरी एक वफ़ादार कर्मचारी हैं। मैंने आज तक उनसे केवल व्यावसायिक संबंध रखे हैं। मैं अपने साथ शारीरिक संबंध रखने वाली किसी भी लड़की को अपने यहां काम पर नहीं रखता। बेशक तुम इसका अपवाद हो क्योंकि मैंने देखा है कि तुम कितनी खूबसूरती से सौदेबाज़ी कर लेती हो। हालांकि अगर तुमने अपनी ज़बान पर काबू न रखा तो मुझे इस बारे में फिर से सोचना होगा। मुझे खुशी है कि तुम्हारा अनुभव सीमित है। यह मुझ तक ही सीमित रहे तो बेहतर होगा। वैसे तुम्हारे साथ होता हूं तो यह समझ नहीं आता कि तुम मेरी किसी बात की तारीफ़ कर रही या ताना कस रही हो।
क्रिस्टियन ग्रे
सीईओ, ग्रे इंटरप्राइजिस होल्डिंग्स, इंक
फॉर्म: एनेस्टेसिया स्टील
सब्जैक्ट: एक साथ काम कभी नहीं
डेट: मई 30 2011 19:27
टू: क्रिस्टियन ग्रे
डियर मि. ग्रे
शायद मैंने आपको पहले ही बता दिया है कि मैं आपकी कंपनी में काम नहीं करना चाहती। इस बारे में मेरी सोच न तो बदली है और न ही बदलेगी। मैं चलती हूं। केट खाना लेकर आ गई है।
शुभरात्रि।
मैं जार्जिया जाकर तुमसे बात करूंगी।
एना
फॉर्म: क्रिस्टियन ग्रे
सब्जैक्ट: शुभकामनाएं
डेट: मई 30 2011 19:29
टू: एनेस्टेसिया स्टील
गुडनाइट एना। उम्मीद करता हूं कि तुम्हारी उड़ान सुरक्षित रहेगी।
क्रिस्टियन ग्रे
सीईओ, ग्रे इंटरप्राइजिस होल्डिंग्स, इंक
केट और मैं सी-टैक एयरपोर्ट पर पहुंचे और उसने आगे झुक कर मुझे गले से लगाया।
“बारबाडोज़ के मज़े लेना। केट! तुम्हारी छुट्टियां अच्छी बीतें! “
मैं आकर बात करूंगी। उसे हराम… अमीरजादे को अपने पर हावी मत होने देना” “नहीं, मैं ऐसा नहीं होने दूंगी।”
हम फिर से गले लगे। मैं अपने रास्ते पर चल दी। मैं आगे जाकर चेक-इन की पंक्ति में खड़ी हो गई। हालांकि मेरे पास ज्यादा सामान था भी नहीं। मैं बस एक बड़ा झोला लाई थी, जो रे ने पिछली बार मेरे जन्मदिन पर दिया था।
“टिकट प्लीज़! “डेस्क के पीछे बैठे पकाअ नौजवान ने जिस अंदाज़ में टिकट मांगा। मैंने उसी तरह उसे पकड़ा दिया। पहचान-पत्र के तौर पर अपना लाइसेंस दिया। मैं उम्मीद कर रही थी कि अगर खिड़की वाली सीट मिल जाती तो बेहतर होता।
“ओ.के मिस स्टील! आपको फर्स्ट क्लास के लिए अपग्रेड कर दिया गया है।
“क्या?”
“मैम! क्या आप फर्स्ट क्लास के लाउंज में बैठकर उड़ान की प्रतीक्षा करना चाहेंगी..।” ऐसा लगा कि वह नींद से जाग गया हो और मुझे देखकर ऐसे दमक रहा था मानो मैंसांटा क्लाज़ और ईस्टर बनी का मिला-जुला रूप बन गई होअं।
“शायद कोई भूल हुई है।”
नहीं-नहीं! उसने फिर से कंप्यूटर का स्क्रीन देखा।” एनेस्टेसिया स्टील! अपग्रेड।”
ओह! मैंने अपनी आंखें सिकोड़ीं। उसने बोर्डिंग पास दिया और मैं प्रतीक्षा कक्ष की ओर चल दी। क्रिस्टियन ग्रे! भाड़ में जा तू। सबको काबू में रखने वाला सनकी कहीं का। वह किसी को एक पल के लिए भी अकेला नहीं छोड़ सकता।
