fifty shades of grey novel in Hindi: क्रिस्टियन ने बोटहाउस का लकड़ी का दरवाजा झटके से खोला और कुछ स्विचों के साथ उलझा रहा। पहले कुछ रंगीन और सफेद बत्तियों से सारा लकड़ी की बड़ी सी इमारत नहा गई। मैं अपनी उलटी हो चुकी दुनिया से एक सुंदर मोटरबोट देख सकती थी जो गहरे काले पानी में खड़ी थी। इससे पहले कि मैं कुछ ज्यादा देख पाती। वह मुझे सीढ़ियों से ऊपर ले गया।
वह दरवाजे के पास रुका और इस बार हैलोजन जला दिए। उनकी रोशनी थोड़ी मंद थी। हम ढलवां छत वाले प्यारे से केबिन में थे। यह न्यू इंग्लैण्ड थीम में सजाया गया था। लाल रंग के छींटों के साथ नीला और क्रीम!
सामान ज्यादा नहीं है पर कुछ काउच ही दिख रहे हैं।
क्रिस्टियन ने मुझे वहां खड़ा कर दिया। मुझे आसपास देखने का समय तक नहीं मिला क्योंकि नज़रें उसी पर गड़ी थीं। उसे देखकर ऐसा लगा मानो कोई शिकारी अपने शिकार पर ताक लगाए बैठा हो। मुझे वहां तक उठाकर लाने की वजह से वह हांफ रहा था। उसकी भूरी आंखों में गुस्सा, ज़रूरत और वासना के भाव देखे जा सकते हैं।
ओह! इसकी तो नज़रें ही कातिल हैं।
“प्लीज़! मुझ पर हाथ मत उठाना।”
उसने अपनी पलकें सिकोड़ीं और दो बार झपकाई।
“मैं नहीं चाहती कि तुम यहां मुझे मारो। मेरी बात को समझने की कोशिश करो।” उसका मुंह हैरानी से खुला रह गया और मैंने बहादुरी की सीमाओं से भी परे जाते हुए उसके गालों पर हाथ फिरा दिया। यह तो सख्त और मुलायम का अजीब-सा मेल था। उसने आंखें बंद कर मेरे स्पर्श को महसूस किया और अचानक उसकी सांस जैसे गले में अटक गई। मैंने दूसरा हाथ आगे किया और उसके बालों में हाथ फिराया। मुझे उसके बाल पसंद हैं। उसकी हल्की कराह सुनाई भी नहीं दी। उसने आंखें खोलीं तो उनमें अलग से भाव दिखे, जैसे उसे मेरा बालों को छूना पसंद नहीं आया।
मैं आगे बढ़ी और उसे अपने पास खींच लिया। हम दोनों एक दूसरे के बाहुपाश में थे और गहरा चुंबन ले रहे थे। उसका स्वाद कितना दैवीय है।
उसने अचानक ही मुंह हटा लिया और हम दोनों ही उखड़ी सांसों पर काबू पा रहे हैं।
मेेरे हाथ उसके बाजुओं पर जा टिके और उसने मुझे घूरा
“तुम मेरे साथ क्या कर रही हो?” वह उलझन के बीच फुुसफुसाया।
“तुम्हें चूम रही हूं।”
“तुमने तो इंकार किया था।”
“क्या? इंकार कब किया?”
“खाने की मेज पर तुमने टांगें भींच कर इंकार किया था “
ओह! अब समझ आया।
“पर हम तुम्हारे घर में खाने की मेज पर थे।” मैंने उसे हैरानी से घूरा
“मुझे आज तक कभी किसी ने इंकार नहीं किया। मेरे लिए ये नई बात है। ये बड़ी हॉट है।”
उसकी आंखें वासना से दमक रही हैं। उसने अचानक एक ही झटके से मुझे अपनी ओर खींच लिया। ओह!” तुम मुझ से नाराज़ हो क्योंकि मैंने इंकार किया था और तुम्हारे उत्तेजित होने का भी
यही कारण है?”
“मैं नाराज़ हूं क्योंकि तुमने मेरे सामने कभी जार्जिया का नाम नहीं लिया। मैं नाराज़ हूं क्योंकि तुम उस लड़के के साथ बार गईं, जिसने तुम्हें नशे में अधकुटा होने के बाद चूमना चाहा और जब तुम बीमार हुई तो तुम्हें तकरीबन एक अजनबी के साथ छोड़कर चला गया। वह कैसा दोस्त है? मैं नाराज़ और उत्तेजित हूं कि तुमने मेरे स्पर्श पर अपनी टांगें कस कर भींच लीं।” उसकी आंखें खतरनाक तरीके से चमक रही है। वह धीरे-धीरे मेेरी पोशाक को ऊंचा उठाता जा रहा है।
“मैं तुम्हें चाहता हूं और अभी के अभी चाहता हूं। अगर तुम सज़ा की हकदार होने के बावजूद अभी ऐसा नहीं चाहतीं तो कोई बात नहीं पर तुम मुझे यहीं शारीरिक संबंध बनाने से नहीं रोक सकतीं। तुम्हारे शरीर पर मेरा हक है। मैं इसे कभी भी, कहीं भी ले सकता हूं। आज यह बस तुम्हारे नहीं केवल मेरे आनंद के लिए होगा।”
वह अचानक ही पलटा और उसकी अंगुलियां मेरे शरीर पर सरसराने लगीं और दूसरे हाथ ने कस कर थाम लिया।
“ये सब मेरा है…मेरा! तुम समझीं?” शरीर के निचले हिस्से में घूमती उसकी अंगुलियों की हरकत बढ़ती गई। मेरा दिल तेजी से धड़कने लगा, मानो उछलकर बाहर आ जाएगा, नसों में खून का दौरा तेज़ हो गया
एक ही झटके में उसने मुझे काउच पर लिटा दिया और तैयार हो गया।
“हाथ सिर के ऊपर ले जाओ।” उसने दांत भींच कर कहा और कुछ ही क्षणों बाद वह अपनी जिद पूरी कर रहा था। बेशक पहले मैं तैयार नहीं थी पर उसके साथ ने मुझे रोमांचित कर दिया।
“हमें ज्यादा समय नहीं मिलेगा। ये सब तुम्हारे लिए नहीं, मेरे लिए हो रहा है। शांत रहो वरना अच्छा नहीं होगा।”
ओह! मेरा क्रिस्टियन!
उसने मुझे पूरी तरह से अपने घेरे में ले लिया है। वह मुझ पर छाया हुआ है। मेरा दम घुट रहा है पर यही तो मेरी ताकत है। इसी से मुझे जीत का एक एहसास सा मिलता है। मेरा पूरा शरीर पिघलने के लिए तड़प रहा है पर आज वह मेरे लिए नहीं आया। उसके लौट आने के बाद भी मैं तड़प रही हूं।
वह बोला, “खबरदार! अपने-आप को हाथ मत लगाना। यही तुम्हारी सज़ा है। तुमने मुझसे बात नहीं की, जो मेरा है, उसे देने से इंकार किया।” उसकी आंखें गुस्से से दहक रही हैं।
“बेहतर होगा कि हम घर चलें।”
मैं बेसुध-सी उठ बैठी।
इसके बाद ही उसने मेरे अंतर्वस्त्र भी लौटा दिए। चलो यहां तो मेरी जीत हुई। मुझे उन्हें मांगना नहीं पड़ा।
तभी ईया की पुकार सुनाई दी। वह हमें खोजते हुए यहां तक आ गई थी।
“जल्दी करो।” वह खीझा।
मैंने जल्दी से खुद को संभाला और पूरे होश-हवास के साथ खड़ी हो गई। फिर मैंने अपने बिखरे बाल संवार लिए।
“हम यहां हैं।” वह बोला।” मिस स्टील! अभी सज़ा देना बाकी है।”
“मुझे नहीं लगता कि आपके इस अचानक हमले के बाद भी मैं सज़ा की हकदार बनती हूं।”
“अचानक हमला? पहले तुमने ही तो मुझे चूमा था?”
“यह तो मेरे बचाव का तरीका था।”
“किससे बचाव?”
“तुम और तुम्हारे सख्त हाथ।”
वह अपनी गर्दन एक ओर मोड़कर मुस्कुराया और ईया सीढ़ियां चढ़ती वहीं आ गई।
“पर ये बर्दाश्त के अंदर था।” उसने हौले से कहा।
मैं कुछ कहती पर इससे पहले ईया आ गई।
“ओह! तुम दोनों यहां हो।”
“मैं एना को आसपास दिखा रहा था।” क्रिस्टियन ने अपना हाथ आगे कर दिया। मैंने उसका हाथ थामा तो उसने उसे दबा दिया।
“केट और इलियट जा रहे हैं। क्या तुम यकीन कर सकते हो? वे तो एक-दूसरे को एक पल के लिए भी नहीं छोड़ पा रहे। तुम दोनों यहां क्या कर रहे थे?”
“ओह! ये तो बहुत खुली हुई है।” मैं शर्म से लाल हो गई।
“मैं एनेस्टेसिया को अपनी टन्न्रॉफियों की कतारें दिखा रहा था। क्रिस्टियन ने बिना किसी घबराहट के कहा। आओ केट और इलियट को विदा दें।”
मैं कमरे को गौर से देखने लगी और ईया के आगे जाते ही वह बोला- “मैं यह सब फिर से करूंगा। बहुत जल्दी।” उसने कान में कहा और मुझे पीछे से बांहों में लेते हुए चूम लिया।
घर में केट और इलियट सबसे विदा ले रहे थे। केट ने मुझे कस कर गले लगाया।
“मैं तुझसे इस चिड़चिड़े बादशाह से बैर के बारे में बात करना चाहती हूं।” मैंने उसके कान में कहा
“उसके साथ यही करना होगा और फिर तू देखना कि उसे क्या पसंद है। एना! संभल कर रहना। इसे बंदों पर काबू करने का बड़ा शौक है।” वह बोली
मैं जानती हूं कि उसे सचमुच क्या पसंद है। तू कुछ नहीं जानती।
मैं मन ही मन उस पर झल्लाई। बेशक वह मेरे भले की बात करती है पर कभी-कभी सीमाएं लांघ जाती है और इस समय तो वह सीमा पार कर पड़ोसी राज्य में चली गई है। मैंने उसे तेवर दिखाए तो उसने जीभ निकाल कर दिखा दी और मैं मुस्कुरा दी। केट तो ऐसी आनंदी नहीं थी; बेशक इलियट का असर है। हम उन्हें दरवाजे तक छोड़कर आए और क्रिस्टियन मेरी ओर मुड़ा- “हमें भी चलना चाहिए। कल तुम्हारे इंटरव्यू हैं।”
हमने सबसे अलविदा ली तो ईया ने बड़े प्यार से बांहों में भर लिया।
“हमने कभी सोचा भी नहीं था कि वह अपने लिए कोई लड़की खोज लेगा।” वह बोली।
मैं शरमा गई और क्रिस्टियन ने फिर से आंखें नचाईं। मैंने अपने होंठ भींच लिए। जब मैं ऐसा नहीं कर सकती तो वह क्यों कर सकता है? मैं भी आंखें मटकाना चाहती हूं पर हिम्मत नहीं पड़ती, कम से कम बोटहाउस वाली धमकी के बाद तो बिल्कुल भी नहीं।
“एना डियर! अपना ख्याल रखना।” ग्रेस ने दुलार से कहा क्रिस्टियन ग्रे परिवार की ओर से मुझे मिल रहे ध्यान से शर्मिंदा या कुंठित दिखा और मुझे हाथ से अपनी ओर खींच लिया।
“इसको लाड-प्यार से बिगाड़ो मत।” क्रिस्टियन बोला।
“क्रिस्टियन! तुम ज्यादा मत बोलो।” ग्रेस ने बड़े ही दुलार से उसे फटकारा। वह झुका और उन्हें चूम लिया। बेशक मां-बेटे का नाता ही ऐसा होता है। मां की डांट में भी प्यार ही छिपा होता है।
“मि. ग्रे! अलविदा और धन्यवाद।” मैंने अपना हाथ आगे किया और उन्होंने भी मुझे बांहों में भर लिया।
“प्लीज़! मुझे कैरिक कहो। उम्मीद करता हूं कि अगली मुलाकात जल्द ही होगी।”
फिर हम कार की ओर बढ़े। जहां टेलर इंतज़ार करता दिखा। क्या वह तब से यहीं था? टेलर ने दरवाजा खोला और मैं ऑडी में बैठ गई। ऐसा लगा कि कंधों से एक भार-सा उतर गया। मैं शारीरिक व भावात्मक रूप से पस्त हुई पड़ी हूं। टेलर से बातचीत के बाद क्रिस्टियन ने सीट से पीठ टिका ली। उसने अपना चेहरा मेरी ओर घुमाया।
“हां! लगता है कि मेरे परिवार को भी तुम पसंद आ गई हो।”
भी? मुझे बुलावा क्यों दिया गया था, यह याद आते ही मेरा मन दुखी हो गया। मैंने उसे देखा तो वह हैरानी से देखने लगा।
“क्या हुआ?”
पहले तो मैं हिचकी, पर नहीं, मैं उसे ज़रूर बताऊंगी। वह हमेशा यही उलाहना देता है कि मैं खुलकर बात नहीं करती।
“मुझे लगता है कि तुम फंस गए थे इसलिए मुझे भी डिनर पर ले जाना पड़ा। अगर इलियट केट को न ले गया होता तो शायद तुम भी मुझे कभी न ले जाते।”
मैं अंधेरे में उसका चेहरा नहीं देख सकी पर उसने गर्दन एक ओर झुका ली। एनेस्टेसिया! मुझे खुशी है कि तुम मेरे माता-पिता से मिलीं। तुम हमेशा अपने-आप को लेकर संदेहों से क्यों घिरी रहती हो? मैं तो यह देख-देखकर हैरान होता रहता हूं। तुम एक मजबूत और अपने-आप में एक भरपूर युवती हो पर खुद के लिए इतनी नकारात्मक सोच क्यों? अगर मैं तुम्हें उनसे न मिलवाना चाहता तो तुम यहां न होतीं। तुम जितना समय वहां रहीं, क्या यही महसूस करती रहीं।”
ये उपन्यास ‘फिफ्टी शेड्स ऑफ ग्रे’ किताब से ली गई है, इसकी और उपन्यास पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएं – fifty shades of grey(फिफ्टी शेड्स ऑफ ग्रे)
ओह! वह मुझे वहां चाहता था … ये तो खबर है। अगर वह सच छिपा रहा होता तो बेशक पता चल जाता। वह झूठ नहीं बोल रहा। उसे मेरे वहां जाने से खुशी हुई है। मेरा पूरा शरीर जैसे राहत से पसर गया। उसने सिर हिलाया और मेरा हाथ थाम लिया। मैंने टेलर की ओर देखा।
“टेलर की चिंता मत करो। मुझसे बात करो।”
मैंने कंधे झटके।
“हां। मुझे ऐसा लगा। वैसे केट बारबाडोस की बात कर रही थी इसलिए मैंने जार्जिया का नाम ले दिया। मैंने अभी तय नहीं किया है।”
“क्या तुम मॉम से मिलने जाना चाहती हो?”
“हां “
उसने मुझे ऐसा देखा मानो मन ही मन कोई जंग लड़ रहा हो।
“क्या मैं साथ आ सकता हूं?”
“क्या!”
“नहीं…ये ठीक नहीं रहेगा।”
“क्यों?”
“मुझे नहीं लगता कि ऐसा होना चाहिए।”
“मैं चाह रही थी… इन सब बातों से परे होकर कुछ सोचने के लिए समय निकालूं।”
उसने मुझे घूरा।
“क्या आप मुझसे इतना डरती हैं?”
“हां, इससे कहीं ज्यादा।”
“क्या आप मेरा मज़ाक उड़ा रही हैं?”
“नहीं मि. ग्रे, मेरी इतनी मज़ाल “
“नहीं, मुझे अकसर ऐसा लगता है कि तुम मेरा माखौल उड़ा रही हो।”
“तुम बड़े ही मज़ेदार हो?”
“मैं मज़ेदार?”
“हां “
“मज़ेदार अजीब इंसान या हंसाने वाला इंसान “
“ओह! ज्यादा तो अजीब वाला ही और थोड़ा हंसाने वाला।”
“अच्छा जी!”
“हां, जी। बाकी आप खुद पता कर लो।”
“एनेस्टेसिया! जब तुम आसपास होती हो तो मैं कुछ भी नहीं कर सकता। तुम जार्जिया जाकर क्या सोचना चाहती हो?”
“हमारे बारे में।” मैं हौले से बोली।
उसने मुझे बेलाग नज़रों से देखा।
“तुमने कहा था कि तुम कोशिश करोगी।” वह बुदबुदाया।
“मैं जानती हूं।”
“क्या तुम दोबारा सोचना चाह रही हो?”
“शायद?”
उसने बेचैनी से पहलू बदला।
“क्यों?”
हाय! हमारे बीच इतनी तनाव और अर्थपूर्ण बात क्यों होने लगी? ऐसा लग रहा है कि मैं उस परीक्षा में हूं, जिसकी मैंने तैयारी तक नहीं की। क्या कह सकती हूं? क्योंकि मुझे लगता है कि मैं तुम्हें प्यार करती हूं और तुम मुझे एक खिलौना समझते हो। क्योंकि मैं तुम्हें छू नहीं सकती क्योंकि तुम्हें प्यार दिखाने से भी डरती हूं कि कहीं तुम झटक न दो या हाथ न उठा दो? और क्या कह सकती हूं।
मैं एक पल के लिए खिड़की से बाहर ताकती रही। कार पुल के रास्ते से लौट रही है। हम अंधेरे में डूबे अपनी ही सोच में मग्न हैं।
“क्यों एनेस्टेसिया?” उसने मुझे टोका।
मैंने कंधे झटके। मैं उसे खोना नहीं चाहती। उसकी सारी मांगों, उसकी नियंत्रण में रखने की इच्छा और डरावने दुर्गुणों के बावजूद उसे खोना नहीं चाहती। मैंने आज तक स्वयं को इतना जीवंत कभी नहीं पाया। उसके साथ बैठना ही कितना रोमांचक है। उसके बारे में कोई अनुमान नहीं लगाया जा सकता। वह सेक्सी, मज़ाकिया, स्मार्ट और हंसोड़ है। उसने कहा कि वह मेरी सीमाओं का ख्याल रखेगा पर फिर भी मुझे डर लगता है। पर उसके मूड… वह मुझे चोट पहुंचाना चाहता है। मैं डरी हुई हूं। मैंने आंखें बंद कर लीं। मैं क्या कह सकती हूं? अंदर ही अंदर मैं अपने लिए और स्नेह और आनंदी क्रिस्टियन और ज्यादा प्यार चाहती हूं।
उसने मेरा हाथ दबा दिया।
“एनेस्टेसिया मुझसे बात करो। मैं तुम्हें खोना नहीं चाहता। यह पिछला सप्ताह…।”
हम पुल के आखिरी छोर पर आ गए हैं और चारों ओर निऑन प्रकाश बिखर गया है। बेशक इस अंधेरे उजाले से इस इंसान की तुलना की जा सकती है। कभी जिसे मैंने अपना रोमानी हीरो, एक बहादुर राजा माना था। वह तो गहरे, गंभीर भावात्मक दोषों के साथ मुझे भी अंधेरे में खींच ले जाना चाहता है। क्या मैं इसे प्रकाश की ओर नहीं ले जा सकती?
“मैं अब भी और चाहती हूं।” मैंने हौले से कहा।
“मैं जानता हूं। मैं कोशिश करूंगा।”
मैंने उसे देखकर पलकें झपकाईं और उसने मेरे होंठों को दांतों की कैद से आज़ाद कर दिया।
“एनेस्टेसिया! मैं तुम्हारे लिए कोशिश करूंगा।”
और मुझे अपने लिए सहारा मिल गया। मैंने सीट बेल्ट खोली और उसकी गोद में लपक गई। वह भौंचक्का रह गया। उसके सिर के आसपास अपनी बांहें लपेट कर मैंने एक गहरा चुंबन दिया और एक ही पल में वह मेरे साथ था।
“आज रात मेरे पास रहो। अगर तुम चली गईं तो मैं पूरा सप्ताह नहीं मिल सकूंगा।” उसने कहा।
“हां! मैं भी कोशिश करूंगी। मैं तुम्हारे अनुबंध पर भी हस्ताक्षर करूंगी।” और मैंने
एक पल में ही यह निर्णय ले लिया।
“जार्जिया से आने के बाद हस्ताक्षर करना। बेबी! इस बारे में अच्छी तरह सोचना।”
“मैं सोचूंगी।” और एक-दो मील तक हम शांत बैठे रहे।
“तुम्हें सीट बेल्ट लगा लेनी चाहिए।” उसने कहा पर मुझे अपनी गोद से हटाने की कोशिश भी नहीं की।
मैंने उससे अपनी नाक रगड़ी और सेक्सी क्रिस्टियन के साथ-साथ उसके मस्क बॉडी वाश की गंध भी मेरे सिर तक जा पहुंची। मैंने अपने दिमाग को भटकने दिया। उसे इस फैंटेसी में खोने दिया कि हां, वह मुझसे प्यार करता है। बेशक अंदर बैठी सयानी लड़की के लिए इन बातों पर यकीन करना मुश्किल है और वह बार-बार एक ही बात कह रही है कि मुझे ऐसी कोई उम्मीद नहीं करनी चाहिए। मैंने खुद को उसकी छाती से परे रखा पर उसकी बाजुओं से सिर टिकाकर बैठी रही।
जल्दी ही मैं अपने सपने से जगी।
“हम घर आ गए।” क्रिस्टियन हौले से बोला।
घर क्रिस्टियन के साथ! वैसे उसका अपार्टमेंट एक घर नहीं आर्ट गैलरी है।
टेलर ने हमारे लिए दरवाजा खोला और मैं यह सोचकर लजा गई कि उसने हमारी बातें सुनी होंगी पर उसके चेहरे पर दया से भरी, तसल्ली देने वाली मुस्कान है। बाहर आते ही क्रिस्टियन ने मुझे घूरा। ओह! अब मैंने क्या कर दिया?
“तुम्हारी जैकेट कहां है?” उसने अपनी जैकेट उतारकर मेरे कंधों पर डाल दी।
वह तो मेरी नई गाड़ी में है।”
मुझे बड़ी राहत मिली।
उसने तिरछी मुस्कान दी।
“थक गई। मिस स्टील!”
“हां, मि. ग्रे। आज मेरे साथ जो-जो हुआ, वह कभी सोचा तक नहीं था।”
“वैसे मैं तो कुछ और की भी उम्मीद लगाए बैठा था।” वह मुझे इमारत में ले गया। हाए! एक बार फिर से।
मैंने लिफ्ट में उसकी ओर ताका। मैंने तो मान लिया था कि वह मेरे साथ सोना पसंद करेगा पर फिर मुझे याद आया कि वह किसी के साथ नहीं सोता, हालांकि वह मेरे साथ कुछ बार सो चुका था। मैंने त्योरी चढ़ाई और उसकी नज़रें गहरा गईं। उसने मेरे चिबुक को पकड़ा और दांतों में दबे होंठ को आज़ाद कर दिया।
“एक दिन इसी लिफ्ट में…। वैसे अभी तो तुम्हें सोना चाहिए।”
हमने एक बार फिर से गहरा चुंबन लिया और वहां से बाहर आते ही वह मुझसे बोला
“क्या तुम ड्रिंक लेना चाहोगी?”
“नहीं।”
“चलो बिस्तर पर चलें “
“क्या तुम आज फिर से पुराने वनीला को आज़माने जा रहे हो।”
“नहीं, वनीला कोई पुराना नहीं है। उसका भी अपना ही स्वाद है।”
“कब से?”
“पिछले शनिवार से। क्यों? क्या तुम कुछ और खास की उम्मीद में थीं?”
मेरे अंदर बैठी लड़की ने मुंडेर से मुंह ऊपर उठाया।
“अरे नहीं! आज के लिए बहुत हो गया है।” उसने मुंह बनाया मानो निराश हो गई हो।
“पक्का? वैसे यहां सारे स्वाद मिलते हैं। कम से कम 31 तो होंगे ही।” वह मुस्कुराया।
“मैंने देखा है।”
उसने एक ओर गर्दन हिलाई। आओ एनेस्टेसिया! तुम थकी हुई हो। जितनी जल्दी हम अपना आनंद लेंगे, उतनी जल्दी तुम सोने जा सकोगी।”
“मि. ग्रे आप तो जन्मजात रोमांटिक लगते हैं।”
“मिस स्टील! आप बहुत बोलती हैं। मुझे इसका कोई न कोई इंतज़ाम करना ही होगा।”
हम उसके बेडरूम में गए और उसने दरवाजा बंद कर दिया।
फिर किसी जादूगर की तरह उसने मेरे हाथ हवा में करवाए और पोशाक को मुझसे अलग कर दिया।
तारा-रा… उसने करतब दिखाते हुए कहा
मैं खिलखिलाई और तालियां बजाईं। वह मुस्कुराते हुए झुका। जब वह इतने अच्छे मूड में हो तो मैं पीछे कैसे रह सकती हूं? उसने वहीं कुर्सी पर मेरी पोशाक रख दी।
“और तुम्हारा अगला करतब?”
“ओह मिस स्टील! मेरे पलंग पर जाओ।”
“पर मैं अगर कुछ और चाहूं तो?”
“कुछ और?”
वह हैरानी में था- “तुम कुछ और क्या चाहती हो?”
“मैं चाहती हूं कि तुुम मुझसे प्यार करो।”
उसने यह सुनते ही अपने दोनों हाथ बालों में घुमाए।
बेशक! उसे सुन कर अच्छा नहीं लगा।
“एना……मैं। वह परेशान दिखा।”
“मैं तुम्हें छूना चाहती हूं।”
वह मुझसे एक कदम पीछे हट गया।
“प्लीज! मैं हौले से बोली “
उसने खुद को संभाला।” अरे नहीं! मिस स्टील आज शाम तुम मुझसे बहुत छूट ले चुकी हो और अब मैं इंकार कर रहा हूं।”
“नहीं?”
“नहीं “
ओह! मैं इस बारे में बहस नहीं कर सकती……क्या कर सकती हूं?
“देखो। तुम थकी हुई हो। मैं भी थका हुआ हूं। चलो बिस्तर पर चलें।” उसने मुझे सावधानी से देखते हुए कहा।
“तो छूना तुम्हारे लिए एक कठोर सीमा है।”
“हां। ये तो पुरानी बात है।”
“पर मुझे बताओ कि ऐसा क्यों?”
“ओह एनेस्टेसिया! प्लीज़। अब बात खत्म करो।”
“यह मेरे लिए मायने रखता है।”
वह बालों में हाथ फिरा कर मन ही मन जाने क्या बुदबुदाया।। उसने दराज खोल कर एक टी-शर्ट निकाली और मेरी ओर उछाल दी। मैंने उसे पकड़ लिया।
“इसे पहनो और पलंग पर आओ।” वह खीझ कर बोला।
“मुझे वाशरूम जाना है।”
वह त्योरी चढ़ा कर बोला- “यह भी पूछ कर जाओगी?”
“अर…नहीं।”
“एनेस्टेसिया! तुम्हें पता है कि वह किस ओर है। आज हमारे इस विचित्र प्रबंध के बीच तुम्हें इस काम के लिए पूछने की जरूरत नहीं है। उसने अपनी शर्ट उतारी और मैं अंदर चली गई।
मैंने खुद को लंबे शीशे में निहारने के बाद पाया कि मैं तो वैसी ही दिखती हूं। आज इतना सब करने के बाद भी मेरे सामने वही साधारण सी लड़की खड़ी है। तुमने क्या उम्मीद की थी- तुम्हारे दो सींग और एक पूंछ निकल आई होगी। सयानी लड़की ने तीर चलाया। और तू ये सब कर क्या रही है? उसके लिए छूना कठोर सीमा है और तू कुछ ज्यादा ही तेजी दिखा रही है। उसे दौड़ने से पहले चलने तो दे। सयानी लड़की गुस्से से पगलाई पड़ी है। उसके बाल बिखरे हैं और हाथों की मुट्ठियां भिंची हैं। मैंने उसे अनदेखा किया पर हटने को राजी नहीं है। तू उसे नाराज़ कर रही है। उसने जो भी कहा, उसकी बातों पर गौर कर। मैं अपने ही प्रतिबिंब को तेवर दिखाए। मुझे उसे स्नेह देना होगा। शायद बदले में वह तभी यह दे सकेगा।
मैंने सिर हिलाया और उसका टूथब्रश उठा लिया।
बेशक मैं ज्यादा ही जल्दी दिखा रही हूं। सयानी लड़की ने गलत नहीं कहा। हम दोनों में से अभी कोई तैयार नहीं है। हम दोनों अपने इस विचित्र अनुबंध के सी-सॉ झूले पर संतुलन साधे बैठे हैं। हम दोनों को थोड़ा-थोड़ा खिसक कर बीच में आना होगा। कहीं हम दोनोें में से कोई गिर न जाए। ये बस इतना जल्दी हो रहा है कि शायद मुझे थोड़ी दूरी चाहिए। जार्जिया का उपाय बेहतर है। मैं ब्रश कर ही रही थी कि उसने दरवाजा खटखटाया।
“आओ।” मैंने मुंह में पेस्ट भरे-भरे कहा।
क्रिस्टियन अपने उसी पजामें में खड़ा है, जिसे देखते ही मेरा रोम-रोम उसे देखने के लिए तड़प उठता है। उसकी छाती को देखकर मैं ऐसे घूरने लगी मानो किसी प्यासे को ठंडा पहाड़ी झरना मिल गया हो। वह मेरे साथ आकर खड़ा हो गया। मैंने उसे ब्रश वापिस किया और उसने उसे अपने मुंह में डाल लिया। मैंने उसे घूरा और उसकी आंखों में शरारत नाचने लगी।
“तुम कभी भी मेरा ब्रश उधार ले सकती हो।”
“धन्यवाद सर!” मैं प्यार से मुस्कुराईं और पलंग पर चली गई।
कुछ ही मिनट बाद वह भी आ गया।
“वैसे मेरे हिसाब से आज की रात ऐसी होने वाली नहीं थी।”
“जरा सोचो! अगर मैं कहूं कि तुम मुझे छू नहीं सकते “
वह पलंग पर चढ़ा और टांगें मोड़ कर बैठ गया।
“एनेस्टेसिया! मैं तुम्हें बता चुका हूं। फिफ्टी शेड्स। मैंने अपनी जिंदगी में बड़ी खराब शुरूआत पाई है और तुम वह सब क्यों सुनना चाहती हो? तुम क्यों सुनना चाहोगी?”
क्योंकि मैं तुम्हें और बेहतर तरीके से जानना चाहती हूं।
“तुम मुझे पहले से ही बेहतर जानती हो “
“तुम ऐसा कैसे कह सकते हो?” मैं घुटनों के बल बैठी और उसकी आंखों में आंखें डाल कर कहा
उसने बड़ी कुंठा से आंखें नचाईं।
“तुम अपनी आंखें नचा रहे हो। पिछली बार मैंने ऐसा किया था तो तुमने मेरी अच्छी फटकार लगाई थी।
“ओह! मैं तो अब भी वही करना चाहूंगा।”
मुझे एक प्रेरणा मिल गई।
“ठीक है, पहले कारण बताओ। फिर तुम ऐसा कर सकते हो।”
क्या?
“तुमने सुना नहीं?”
तुम सौदेबाजी कर रही हो?” उसकी आवाज़ में हैरानी का पुट था।
मैंने हामी भरी।” हां, यही समझ लो “
“सौदेबाजी “
“एनेस्टेसिया! ऐसे तो नहीं चलेगा।”
“अच्छा! मैं तुम्हें देखकर आंखें नचाऊंगी।
“वह हंसा और मुझे एक बार फिर से उन्मुक्त और बेपरवाह क्रिस्टियन की छवि देखने का मौका मिला। काफी समय से उसे ऐसे नहीं देखा।
“जानकारी पाने के लिए हमेशा अधीर रहती हो?”
उसने मुझे घूरा और फिर बोला।
“यहीं रहना। मैं अभी आया।”
मैंने घबराहट के मारे खुद को गले से लगा लिया। वह क्या करने जा रहा है? क्या उसके दिमाग में कोई दुष्ट योजना है? ओह! शायद वह कोई छड़ी या फिर अजीब सा दिखने वाला उपकरण लेकर लौटे? तब मैं क्या करूंगी? जब वह आया तो उसके हाथों में छोटी-सी चीज़ थी। मैं उसे देख नहीं सकती और मैं कौतूहल से मरी जा रही हूं।
“कल तुम्हारा पहला इंटरव्यू कितने बजे है?” उसने कोमलता से पूछा।
“दो बजे।”
चेहरे पर दुष्टता से भरी मुस्कान तैर गई।
अचानक ही उसके भाव बदल गए। ये तो डॉमिनेंट क्रिस्टियन है..
मेरा होने वाला मालिक..
“पलंग से उतरो और नीचे खड़ी हो जाओ।”
मैं एक झटके में नीचे आ गई। उसने मुझे गहराई से घूरा और बोला- “भरोसा करती हो?”
मैंने हामी भरी। उसने हाथ फैलाया। उसकी हथेली पर दो चमकदार रूपहले बॉल हैं
जो एक मोटे काले धागे से जुड़े हैं।
“ये नई चीज़ है।”
मैंने उसे सवालिया निगाहों से देखा।
“मैं इन्हें तुम्हारे अंदर रखने जा रहा हूं और फिर मैं तुम्हें नितंबों पर चपत लगाऊंगा। ये बस सज़ा के लिए नहीं बल्कि मेरे और तुम्हारे आनंद के लिए होगा।” वह मेरी प्रतिक्रिया जानने के लिए रुका।
“मेरे अंदर!” मैंने थूक गटका। पेट की मांसपेशियों में अजीब-सी ऐंठन होने लगी। भीतर बैठी लड़की सातवें आसमान पर है।
“फिर हम आपस में संबंध बनाएंगे और अगर तुम जागती रहीं तो मैं तुम्हें अपने जीवन के शुरुआती सालों के बारे में जानकारी दूंगा। मंजूर?”
वह मेरी इजाज़त मांग रहा है? मैंने बेसुधी में हामी दे दी।
“गुड गर्ल। अब अपना मुंह खोलो “
“मुंह?”
“चौड़ा खोलो?”
उसने धीरे से वे गोलियां मेरे मुंह में डाल दी।
“इन्हें चूसो और अपने थूक से गीला कर दो।”
वे गोलियां ठंडी और मुलायम हैं और किसी धातु की गंध आ रही है। मेरे मुंह की लारके बीच वे गोलियां घूम रही हैं। क्रिस्टियन की आंखें एक पल के लिए भी मेरे ऊपर से नहीं हटीं। ये सब तो काफी हॉट होता जा रहा है।
“एनेस्टेसिया! हिलो मत।” उसने चेताया
फिर उसने वे गोलियां मेरे मुंह से निकाल लीं और पलंग के छोर पर जा बैठा।
“यहां आओ।”
“अब मुड़ो और नीचे झुक कर अपने टखने पकड़ लो।”
मैंने उसे देखकर पलकें झपकाईं और उसके चेहरे के भाव गहरा गए।
“संकोच मत करो।” उसने मुझे प्यार से लताड़ा। फिर वे गोलियां उसने अपने मुंह में डाल लीं और उन्हें लार में तर करने लगा। ओह! ये सब तो एक टूथब्रश इस्तेमाल करने से भी ज्यादा सेक्सी होता जा रहा है।
मैं हैरान हूं कि मेरे शरीर में इतनी लोच है? उसने धीरे से वे गोलियां मेरे भीतर सरका दीं। एक के बाद एक करके भीतर जा रही उन गोलियों का तापमान हमारे मुंह की लार के कारण गर्म हो गया था। अब मैं उन्हें महसूस तो नहीं कर पा रही पर जानती हूं कि वे मेरे अंदर हैं।
उसने हुक्म दिया।” खड़ी हो जाओ “
ओह! अब मैं उन्हें महसूस कर सकती हूं।
“तुम ठीक हो “
“हां “
“मुड़ो “
मेरे मुड़ते ही उन गोलियों की हरकत महसूस हुई और मैंने उन्हें अंदर ही अंदर भींच लिया।
“कैसा लग रहा है?”
“अजीब “
“अच्छा अजीब या बुरा-सा अजीब?”
“अच्छा पर अजीब।” मैंने शरमाते हुए कहा।
“जाओ! मेरे लिए एक गिलास पानी ले आओ “
ओह!
“तुम आओगी तो हम आगे की कारवाई करेंगे।”
“पानी? वह मुझसे इस समय पानी क्यों मंगा रहा है?
कमरे से निकलते ही समझ आ गया कि उसने पानी क्यों मांगा था। मैं चलने लगी तो वे गोलियां मेरे जिस्म के अंदर मालिश सी करने लगीं। ये एक अजीब-सा एहसास था। हालांकि इसे पूरी तरह से बेकार भी नहीं कह सकते थे। कुछ ही देर में मुझे समझ आ गया कि उन्हें रखने के बाद मेरे भीतर की प्यास बढ़ती जा रही थी। बेशक उनका मकसद यही था कि शरीर को सेक्स के लिए तैयार किया जा सके।
मैं लौटी तो उसने मुझे ध्यान से देखा।
“धन्यवाद!” उसने मुझसे गिलास लेते हुए कहा।
फिर धीरे से एक घूंट भरा और उसे मेज पर रख दिया। वहां एक फॉयल पैकेट पड़ा दिखा, वह भी मेरे जैसे पूरी तरह तैयार था। मैं जानती थी कि उस प्यास को और जगाने के लिए ही यह देर की जा रही थी। उसने मुझे अपनी भूरी आंखों से देखा तो दिल जैसे धड़कना ही भूल गया।
“आओ! मेरे पास बैठो। जैसे पहले बैठी थीं।”
इस बार तो मेरी उत्तेजना का अंत नहीं है। मेरा पूरा शरीर उसके इंतज़ार में है।
“मुझसे कहो।”
मैंने त्योरी चढ़ाई- “क्या कहूं?”
“मुझसे कहो।” इस बार आवाज़ में कड़ाई थी।
क्या? पानी ठीक था? या वह चाहता क्या है?
“एनेस्टेसिया, मुझसे पूछो। मैं दोबारा नहीं कहूंगा।” उसके शब्दों की धमकी ने मुझ पर सीधा असर दिखाया। वह चाहता है कि मैं उसे कहूं कि वह मुझे मारे।
हाय! ये क्या? वह मुझे उम्मीद भरी निगाहों से देख रहा है।
“सर! प्लीज! मेरी पिटाई लगाएं।” मैं हौले से बोली।
उसने एक पल के लिए आंखें बंद कीं और मेरे शब्दों का स्वाद लिया। फिर अपने बाएं हाथ के झटके से मुझे गोद में गिरा लिया। फिर उसके हाथ मुझे सहलाने लगे। इस बार उसने मुझे अपनी टांगों के नीचे दबाया नहीं है। उसने मेरे बाल कानों के पीछे किए। उन्हें गर्दन पर इकट्ठा कर हाथ से पकड़ा और सिर ऊंचा करते हुए कहा। मैं चाहता हूं कि जब मैं तुम्हें मारूं तो तुम्हारा चेहरा दिखाई दे।”
“एनेस्टेसिया! यह सब मेरे और तुम्हारे आनंद के लिए है।”
उसके हाथ मेरे शरीर से खेलने लगे। फिर उसने अचानक मुझे जोर से चपत दे मारी। मैं दोनों तरह के भावों के बीच झूल रही हूं। उसके हाथों का सहलाना और मारना…उसने मुझे इस बार पिछली बार की तरह तेज़ी से नहीं मारा। उसने मुझे सहलाया और फिर से पीछ दे मारा।
उसने एक तरह का ढांचा सा बना लिया। पहले बांए से दांए और फिर नीचे की ओर इस दौरान वह मुझे बार-बार सहला भी रहा था। गोलियों की सनसनाहट ही काफी नहीं थी कि यह सब अपना असर दिखाने लगा। बेशक यह तो कामोत्तेजक है। चूंकि यह सब मेरी मर्जी से हो रहा था इसलिए मैंने थोड़े-बहुत दर्द की परवाह भी नहीं की। दर्द तो है पर सहन किया जा सकता है। हां, मैं उसका साथ दे सकती हूं। उसकी छुअन से मेरा पूरा शरीर कांप रहा है।
“एनेस्टेसिया! तुम अच्छी लड़की हो।” उसकी सांसें उथली हो आईं हैं।
उसने मुझे दो बार और मारा और वे गोलियां धागे से बाहर खींच लीं। यह एहसास शब्दों में नहीं कहा जा सकता। हमारे शारीरिक संबंधों के दौरान दोनों को ही सुख की चरम सीमा तक पहुंचने में देर नहीं लगी। उसने बड़े ही दुलार से मेरा नाम लिया।
“एना!”
वह चुपचाप मेरे साथ लेटा हांफ रहा था।
मुझे अच्छा लगा।” उसने हौले से कहा और मेरा माथा चूम लिया।
उसने मुझे कंबल से ढका और बाथरूम में चला गया। जब वह आया तो उसके हाथ में एक सफेद लोशन की बोतल थी। वह मेरे पास पलंग पर बैठ गया।
“घूम जाओ।” मैंने वही किया जो कहा गया था।
“तुम्हारे नितंबों का रंग देखने लायक है।” उसने कहा और उस ठंडे से लोशन से मालिश करने लगा।
“मुझे नींद आ रही है पर अपनी शर्त पूरी करो “
“ओह मिस स्टील! तुमसे तो पार पाना मुश्किल है।”
उसने आह भरी और मुझे बांहों में ले लिया। एक बार फिर से मैं उसकी ओर पीठ करके लेटी हूं। उसे इसी तरह पसंद है। उसने मेरे कान के पास चूमकर कहा।
“एनेस्टेसिया! जो औरत मुझे इस जिंदगी में लाई वह एक वेश्या थी। तुम सो जाओ।” हैं? वह कहना क्या चाहता है?
“थी?”
“वह मर चुकी है।”
“कब?”
उसने आह भरी।
“जब मैं चार साल का था। मुझे उसके बारे में कुछ याद नहीं। कैरिक ने ही थोड़ा-बहुत बताया था। बस कुछ खास बातें ही याद हैं। तुम सो जाओ।”
“गुडनाइट क्रिस्टियन!”
“गुडनाइट एना!”
मैं जल्द ही गहरी नींद में खो गई और भूरी आंखों वाले चार साल के बच्चे को सपने में देखा, जो किसी अंधेरी, डरावनी और भयंकर जगह में खड़ा था।
