ग़ालिब हवेली और संग्रहालय क्यों है ख़ास, पूरी जानकारी : Ghalib ki Haveli
ग़ालिब संग्रहालय का सबसे बड़ा आकर्षण ग़ालिब के घरों की तस्वीरें हैं। इसमें उनके पसंदीदा खाने और पहनावे को दर्शाया गया है।
Ghalib ki Haveli: ग़ालिब एक ऐसा नाम है जिसके बारे में बच्चा-बच्चा जानता है। यही वजह है कि इनसे जुड़ी चीज़ों के प्रति लोगों की बहुत ही ज़्यादा आस्था है। ग़ालिब अकादमी की स्थापना ही इसी उद्देश्य के लिए की गई है कि इनसे जुड़े साहित्य और तमाम महत्व की चीज़ों के बारे में लोग जान सके और इसी अकादमी के परिसर में ग़ालिब संग्रहालय स्थित है। इस संग्रहालय में ग़ालिब के समय की बहुत सारी अनोखी चीज़ें और झलकियाँ देखने को मिलती हैं। इस जगह पर जकार आपको ग़ालिब हवेली और संग्रहालय देखना चाहिए। ग़ालिब संग्रहालय का सबसे बड़ा आकर्षण ग़ालिब के घरों की तस्वीरें हैं। इसमें उनके पसंदीदा खाने और पहनावे को दर्शाया गया है।
इस जगह का इतिहास

ग़ालिब को यह हवेली एक स्थानीय हकीम से उपहार के रूप में मिली थी। वह हाकिम ग़ालिब के काम का बहुत बड़ा प्रशंसक था। हवेली के मालिक ग़ालिब की मृत्यु के बाद, हकीम हर शाम हवेली में आता था, और किसी और को हवेली में रहने नहीं देता था। बताया जाता है कि उनकी मृत्यु के बाद इस हवेली का कोई कानूनी मालिक नहीं था। जिसकी वजह से इस हवेली में बहुत से अस्थायी निवासी रहे। बाद में हवेली को भारत सरकार ने भी अधिग्रहित कर लिया और इसे ग़ालिब के जीवन से आधारित चीज़ों के लिए विकसित किया गया।
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ग़ालिब संग्रहालय की ख़ास बात
बल्लीमारान की व्यस्त गलियों के बीच स्थित हवेली में कभी भारत के सबसे बेहतरीन शायर मिर्जा असदुल्लाह खान रहा करते थे जिन्हें मिर्जा गालिब के नाम से भी जाना जाता था। ग़ालिब संग्रहालय में रखी गई ग़ालिब की मूर्तियाँ दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देती हैं। इस संग्रहालय में रखे तमाम सिक्के, मुहरें, डाक टिकट और हस्तलिपि के नमूने लोगों को उस समय में ले जाने के साथ ग़ालिब पर शोध करने वालों का मार्गदर्शन भी करते हैं। इस संग्रहालय में ग़ालिब की नज़्मों पर एम.एफ. हुसैन, सतीअते जुगुलर, अनीस फ़ारूक़ी जैसे प्रसिद्ध चित्रकारों की बनाई पेंटिंग देखने लायक हैं। मिर्जा गालिब ने वर्ष 1869 में अपनी मृत्यु से पहले अपने अंतिम दिन हवेली में बिताए थे।
ग़ालिब हवेली की ख़ास बात

यह हवेली पुरानी दिल्ली के हेरिटेज इलाके में स्थित है। जिसकी वजह से इस जगह पर देश और दुनिया के कोने कोने से देशी और विदेशी सैलानी आते हैं। इस जगह पर आकर आप इस हवेली को देखने के साथ साथ आप लाल किला और जामा मस्जिद जैसे ख़ूबसूरत स्मारकों का भी दीदार कर सकते हैं। यदि आप घूमने के साथ पुरानी दिल्ली में खरीदारी का लुत्फ़ उठाना चाहते हैं, तो चांदनी चौक और आस-पास के इलाकों में कई बाज़ार हैं। यह जगह अपने स्ट्रीट फ़ूड और परांठे वाली गली जैसे खाने के लिए भी मशहूर है। चांदनी चौक में एक राष्ट्रीय पुस्तकालय भी है जहां पर जकार आप तरह तरह की किताबें पढ़ सकते हैं।
ग़ालिब हवेली घूमने का सबसे अच्छा समय
इस जगह पर आप किसी भी समय आ सकते हैं। यह पूरे वर्ष खुला रहता है लेकिन यहां आने का सबसे अच्छा समय सर्दियों का होता है। सर्दियों के दौरान इस जगह के ख़ुशनुमा मौसम में घुलकर यह जगह और भी ख़ूबसूरत हो जाती है। इस जगह पर आकर आपको अच्छा लगेगा।
