anokha super computer
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कहते-कहते निक्का रुका, जैसे अपनी उत्तेजना पर काबू पाने की कोशिश कर रहा हो। उसने एक लंबी सी साँस ली, और फिर आगे चल पड़ी कहानी…

यों अभी तक तो अंकल, ऐसे किसी भी कंप्यूटर के बारे में मैंने कुछ ज्यादा नहीं पढ़ा-सुना था। बस, एक विज्ञान पत्रिका में जो एक आर्टिकल पढ़ा था, वही दिमाग पर बार-बार लहर पर लहर मचाए हुए था। पर उस आर्टिकल में भी जो खास बात कही गई थी, वह यह कि कुछ वैज्ञानिक मन के इच्छा-संसार तक पहुँचने वाले कंप्यूटर की खोज कर रहे हैं, जो एकदम मनुष्य के मस्तिष्क की तरह काम करे! उन्होंने ऐसा कोई कंप्यूटर खोज लिया है, इसका जिक्र उस आर्टिकल में नहीं था!

अलबत्ता उस सुपर चोर के बारे में जितनी भी खबरें इधर-उधर से पढ़ने-जानने को मिलीं, उसके बाद खुद-ब-खुद वही एक आर्टिकल मेरे मन में तैरने लगा। उस पत्रिका में ऐसे कंप्यूटर के बारे में जो बातें कही गई थीं और जो क्लू दिए गए थे, वे सारे के सारे मस्तिष्क में ताजा हो गए।…मुझे लगा, दुनिया इतनी तेजी से आगे बढ़ रही है। वह आर्टिकल मैंने डेढ़-दो वर्ष पहले पढ़ा था, तो क्या इन दो-डेढ़ वर्षों में उस माइंड कंट्रोलर कंप्यूटर की कल्पना साकार न हो गई होगी? जरूर उस शख्स ने, जिसे हम ‘शरीफ चोर’ कह रहे हैं, मस्तिष्क को कंट्रोल करने वाला वह सुपर कंप्यूटर बना लिया है! मगर क्या उस सुपर कंप्यूटर को मैं पकड़ नहीं सकता? उस सुपर कंप्यूटर से बढ़कर क्या कोई और चीज नहीं हो सकती?…

और एक दूसरा विचार मन में यह आया कि वह सुपर कंप्यूटर, जो चोर के हाथ में है, अगर किसी तरह मेरे हाथ में आ जाए तो उस चोर को पकड़ना क्या बहुत मुश्किल काम रह जाएगा? जिस तरह वह चोर औरों के मस्तिष्क को पढ़ता और अपनी गिरफ्त में लेता है, उसी तरह क्या मैं उस चोर और उसके मस्तिष्क को कीलित नहीं कर सकता?

असल में अंकल, थोड़ा-सा मैं आपको इस मस्तिष्क कंट्रोलर कंप्यूटर और इसके काम करने की तकनीक के बारे में बताता हूँ। आप जरा गौर से सुनें।…होता यह है कि हमारे-आपके सबके मस्तिष्क में हमेशा हर घड़ी विचारों की लहरें चलती रहती हैं। कहते हैं कि मस्तिष्क में चलने वाली विचारों की ये लहरें इतनी तेज होती हैं कि इन्हें बड़े से बड़ा होशियार दिमाग भी समझ नहीं सकता। मगर किसी बहुत शक्तिशाली सुपर कंप्यूटर के साथ अगर उसका तालमेल हो जाए, तो फिर कंप्यूटर द्वारा मानव-मन को कंट्रोल करना असंभव न रहेगा।

सच तो यह है अंकल कि यह मशीन और आदमी की लड़ाई है और कंप्यूटर भले ही आदमी द्वारा बनाई गई मशीन हो, पर उसमें कुछ ऐसी विलक्षणताएँ हैं कि वह आदमी के मस्तिष्क पर भी राज कर सकती है और उसे काबू कर सकती है या अपने प्रभाव की गिरफ्त में ले सकती है।

और यों मानव-मस्तिष्क से निकलने वाली तरंगों और कंप्यूटर से निकलने वाले कुछ खास रेडिएशंस का अगर सही तालमेल हो जाए, तो कंप्यूटर द्वारा आदमी के मस्तिष्क को कंट्रोल करने की कल्पना केवल कल्पना न रहेगी। वह असलियत में बदली जा सकती है। और उस हाईटेक चोर ने असल में यही किया। बिल्कुल यही!…

एक तरह से उस कंप्यूटर स्क्रीन के ‘कर्सर’ को हम ‘माइंड डायरेक्टर’ कह सकते हैं। यानी सूई को एक खास जगह सेट करने पर फिर मानव-मन पूरी तरह कंप्यूटर विशेषज्ञ के हाथ में आ जाता है। वह मन को जहाँ चाहे, वहाँ ले जा सकता है।…अगर आप चाहते हैं कि आदमी अपने छिपाकर रखे हुए धन के बारे में सोचे, तो वह उस क्षण एकदम वही सोचने लगता है। और फिर यदि उससे पूछा जाए कि वह धन उसने कहाँ-कहाँ छिपाकर रखा है—किस तिजोरी या अलमारी में और उसकी चाबियाँ कहाँ रखी गई हैं, तो वह वही सोचने लगता है।…

इसके बाद चोर महाशय को सिर्फ इतना कहना होता, “मुझे पता है महाशय, कि आपका धन फलाँ-फलाँ कमरे में इस तिजोरी में है, जिसकी चाबी आपने यहाँ रखी हुई है। अब आप बताइए कि उसकी चाबी आप खुद लाकर देंगे या मैं ले लूँ?…”

एक-दो बार ऐसा भी हुआ कि जिसके यहाँ वह चोर चोरी करने गया, उस सेठ या व्यापारी ने खुद-ब-खुद सही चाबी ढूँढ़कर चोर के हाथ में दे दी और कहा कि भैया, खुद खोलकर सामान ले लो!…यह एक ऐसा अजूबा था, जिसके बारे मे सोचना भी कठिन है। लेकिन यह सच था एकदम सच, क्योंकि ऐसा एक-दो नहीं, कई लोगों ने बताया…कि चोर ने चाबी ली, सामान निकाला और फिर चाबी सौंपकर वापस चला गया। लेकिन इतनी सावधानी उसने जरूर बरती कि चाबी पर कहीं कोई निशान नहीं पड़ा। शायद वह हाथों पर दस्ताने पहनकर ही घर से आता था।

यानी वह चोर बहुत होशियार है। चालाक आप कह सकते हैं! पर मुझे तो लगता है कि वह चोर नए जमाने का चोर है, हमारे इलेक्ट्राॅनिक जमाने का एक नया इलेक्ट्राॅनिक चोर।…आप समझ गए न अंकल?

ये उपन्यास ‘बच्चों के 7 रोचक उपन्यास’ किताब से ली गई है, इसकी और उपन्यास पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएंBachchon Ke Saat Rochak Upanyaas (बच्चों के 7 रोचक उपन्यास)