रेन वॉटर हार्वेस्टिंग - बचाओ बूंद-बूंद को: Rain Water Harvesting
Rain Water Harvesting

Rain Water Harvesting: रेन वॉटर हार्वेस्टिंग जल-संकट का एक बहुत बड़ा समाधान साबित हो सकता है। ज़रूरत है सिफ़र् थोड़ी-सी जागरुकता और थोड़े-से प्रयास की। पेश है, इसी विषय को समझने के लिए की गई एक पहल-

बारिश के मौसम में भी पानी के लिए परेशान लोगों की लंबी लाइनें देखकर ये एहसास होता है कि लापरवाही से होते पानी के दुरुपयोग ने इस धरती को कितना सूखा कर दिया है। कहीं पानी इस तरह बहाया जाता है कि किसी की कार भी पानी की बौछारों से धुलेगी और कहीं पीने के पानी के लिए भी लोग तरस कर रह जाते हैं। जिन इलाकों में भरपूर बारिश होती है, वहां भी जागरुकता की कमी के चलते बारिश का यह सारा पानी सीधा गटर में चला जाता है। ख़ासतौर पर मॉनसून में तो हालत ये हो जाती है कि किसी स्थान पर बाढ़ ऌ उ$फान पर होती है तो दूसरे स्थान पर सूखा पड़ जाता है। ऐसे में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग, यानी वर्षा ऌके जल का संरक्षण जल-संकट के एक बड़े समाधान के रूप में देखा जाता है। अहमियत तो इसकी पूरी दुनिया में एक समान रूप से है, लेकिन शहरी क्षेत्रों में इसकी ज़रूरत बहुत ही अधिक बढ़ जाती है, क्योंकि दुनिया के तमाम बड़े शहर इस समय गहरे जल-संकट से जूझ रहे हैं।

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आज पूरी दुनिया में होते जल-संकट के प्रति जागरुकता पैदा करने के साथ-साथ इन भीषण समस्याओं के समाधान की दिशा में भी बहुत-से प्रयास किए जा रहे हैं। रेन वॉटर हार्वेस्टिंग, यानी वर्षा जल संचयन ऐसा ही एक प्रयास है, जिसके अंतर्गत बारिश के बेकार बह जाने वाले पानी को इका कर लिया जाता है और फिर उसे फिल्टर करके कई कामों में उसका उपयोग होता है, जैसे- नहाना, कपड़े धोना, बर्तन धोना, कार की धुलाई, पालतू पशुओं को नहलाना, पौधों को पानी देना वगैरह। इसके अतिरिक्त इससे गिरते भू-जल स्तर को भी रोका जा सकता है।

रेन वॉटर हार्वेस्टिंग दो तरीकों से की जा सकती है। पहला, छत के बरसाती पानी को गड्ढे या खाई के ज़रिये सीधे ज़मीन के भीतर उतारना और दूसरा, छत पर इका हो गए पानी को किसी टैंक में इका करके फिल्टर होने के बाद सीधा उपयोग में ले लेना। जिन मकानों की छत एक हज़ार फुट तक की, यानी छोटी है, उन मकानों के लिए यह तरीका बहुत ही कारगर हो सकता है। बरसाती मौसम में एक छोटी से छोटी छत से भी लगभग एक लाख लीटर पानी ज़मीन के अंदर उतारा जा सकता है। ऐसा करने के लिए ज़मीन में तीन से पांच फुट चौड़ा और पांच से दस फुट गहरा गड्ढा बनाना होता है। छत से पानी को एक पाइप के ज़रिये इस गड्ढे में उतारा जाता है। पहले इस सिस्टम में खुदाई के बाद गड्ढे में सबसे नीचे मोटे पत्थर, कंकड़, बीच में मध्यम आकार के पत्थर-रोड़ी और सबसे ऊपर रेत या फिर बजरी बिछा दी जाती थी। पानी को फिल्टर करने का यह बहुत ही पुराना तरीका रहा है। अब इसके नए सेट्अप में ऑटोमेटिक उपकरण लगे हैं, जो इस काम को और भी प्रभावशाली रूप से करते हैं।

रेन वॉटर हार्वेस्टिंग शहरों में गहरा चुकी जल-समस्या का एक बड़ा समाधान है। ख़ासतौर पर बड़ी कॉलोनिज़ में छतों पर बारिश का हज़ारों गैलन पानी बेकार बह जाता है, लेकिन फिर भी पानी की समस्या सदाबहार बनी रहती है। यही वजह है कि अब लगातार बड़े पैमाने पर ये प्रयास हो रहे हैं कि न केवल हर तरीके से पानी की बर्बादी को रोका जा सके, बल्कि रेन वॉटर या वेस्ट वॉटर, यानी बेकार बह गए पानी को भी रीसाइकिल करके दोबारा प्रयोग में लाया जा सकता है। इसमें टॉयलेट में फ्लैश कर दिया गया पानी तक शामिल है, जो फिल्टर होकर कई कामों में इस्तेमाल हो सकता है। इस दिशा में जागरूक लोग अपने स्तर पर भी प्रयास कर रहे हैं। सरकारी स्तर पर भी कई काम होने के साथ-साथ लोगों को जागरूक बनाने के लिए कई योजनाएं तैयार की गई हैं। इनमें रेन वॉटर हार्वेस्टिंग प्लांट लगाने के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाना भी शामिल है।
जो नए कंस्ट्रक्शन हो रहे हैं, उनमें भी इस बात पर ध्यान दिया जा रहा है।
जल को जीवन कहा गया है। इसे बनाया नहीं जा सकता, सिर्फ़ बचाया जा सकता है। यही कोशिश ज़िंदगी को बचाने की कोशिश होगी, जो हमें अपने लिए करनी है और अपनों के लिए करनी है।