चुनमुन की श्यामला मैडम ने क्लास में सब बच्चों को निबंध लिखने के लिए कहा। सबको अपनी-अपनी पसंद का विषय और शीर्षक खुद चुनना था। चुनमुन बोला, ”मैडम, मैं जो निबंध लिखूँगा, उसका शीर्षक होगा, ”बड़ी दूर जाना है!’
मैडम हैरान। सोचने लगीं, भला इस पर क्या लिखेगा चुनमुन?
पर चुनमुन ने लिखना शुरू किया, तो एकदम अपने में डूबकर लिखता चला गया। उनका पैन ऐसे सरपट दौड़ा जा रहा था, जैसे कभी रुकेगा ही नहीं। और बच्चों ने अपने-अपने निबंध लिखकर दे दिए थे, पर चुनमुन का पैन तो अब भी उसी तरह चलता जा रहा था। जैसे उसके भीतर विचारों का सिलसिला थमने का नाम ही नहीं ले रहा।
कुछ देर बाद चुनमुन ने निबंध पूरा करके दिया, तो मैडम और भी हैरान हुईं। इसलिए कि चुनमुन ने तो बड़ा अनोखा लेख लिखा था। उसने अपने एक सपने का जिक्र किया था, जब चंदा मामा खुद उससे मिलने आए थे और उसे अपने साथ चंद्रलोक ले गए थे। उसी को याद करते हुए उसने लिखा था कि मुझे बहुत दूर जाना है—चाँद के पास।
फिर अपनी बात साफ करते हुए चुनमुन ने लिखा था कि बड़ा होकर वह अंतरिक्ष-यात्री बनेगा और सारी दुनिया में भारत के नाम का झंडा लहराएगा।
पढ़कर श्यामला मैडम इतनी खुश हुईं कि उन्होंने उसी समय चुनमुन को बुलाकर उसकी पीठ थपथपाई। कहा, ”चुनमुन, मुझे पक्का यकीन है कि तुम बड़े होकर कुछ बड़ा काम करोगे।”
सुनकर चुनमुन का चेहरा खिल गया। उसने मुसकराकर कहा, ”धन्यवाद मैम, बहुत-बहुत धन्यवाद!”
फिर निबंध-प्रतियोगिता में विजेताओं के नाम घोषित किए गए। चुनमुन को पहला इनाम मिला था।
उसे एक सुंदर प्रमाण-पत्र भी मिला। उस पर खुद श्यामला मैडम ने सुंदर राइटिंग में लिखा, ”दूर के सपने देखो, तो आगे बढ़ने के लिए बहुत चुनौतियाँ मिलती हैं और हिम्मत से आगे बढ़ने का हौसला भी। मुझे खुशी हे कि चुनमुन, तुम बड़े सपने देखते हो!’
चुनमुन का यह निबंध स्कूल की पत्रिका में भी छपा। प्रिंसिपल हंसा मैडम ने यह पत्रिका डॉ. अब्दुल कलाम के पास भिजवाई। उन्हें चुनमुन के निबंध ने सबसे अधिक प्रभावित किया। जवाब में उनका पत्र आया, ”शाबाश चुनमुन!”
