Overview: शिव जी के सामने ताली बजाने का महत्व
माना जाता है कि ताली बजाने से शिवजी का ध्यान आकर्षित होता है। ताली बजाने से भगवान शिव भक्तों की प्रार्थना सुनते हैं और उनके प्रसाद को स्वीकार करते हैं।
Shiv Temple Rules: हिंदू धर्म में पूजा-पाठ का विशेष महत्व है। पूजा पाठ से जुड़े कई नियमों के बारे में बताया जाता है। हिंदू धर्म में हर देवी-देवताओं के अलग-अलग मंदिर होते हैं, हर देवी देवताओं को पूजने का तरीका और उनके नियम भी अलग होते हैं।
आप भी कभी भगवान शिव के मंदिर गए होंगे, पूजा के दौरान आपने कुछ लोगों को शिवलिंग के सामने तीन बार ताली बजाते हुए जरूर देखा होगा। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर शिव जी के सामने पूजा के दौरान ताली क्यों बजाई जाती है, अगर नहीं तो आज हम आपको इस लेख के द्वारा इसके बारे में विस्तार से बताएंगे तो चलिए जानते हैं।
शिव जी के सामने ताली बजाने का महत्व

हिंदू धर्म में शिव भगवान को देवों के देव महादेव और भोलेनाथ के रूप में पूजा जाता है। इतना ही नहीं भगवान शिव को सभी देवताओं का स्वामी माना जाता है। शिव भगवान की पूजा में ताली बजाने का विशेष महत्व है।
यह एक धार्मिक परंपरा है, ऐसा माना जाता है कि ताली बजाने से शिवजी का ध्यान आकर्षित होता है। ताली बजाने से भगवान शिव भक्तों की प्रार्थना सुनते हैं और उनके प्रसाद को स्वीकार करते हैं। ताली बजाने से भक्तों के घर में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है।
तीन ताली बजाने का अर्थ
पहली ताली का महत्व: भगवान शिव को अपनी उपस्थिति जताने के लिए पहले ताली बजाई जाती है। इस ताली से भगवान शिव का ध्यान भक्त की ओर आकर्षित होता है और इस प्रकार भक्तों की पूजा का शुभ फल प्राप्त होता है।
दूसरी ताली का महत्व: दूसरी ताली से भक्तों की प्रार्थना भगवान तक पहुंचती है। दूसरी ताली बजाने से भक्तों के घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।
तीसरी ताली का महत्व: तीसरी ताली का यह मतलब होता है कि भगवान से कहना कि हमें अपनी शरण में रखें और अपनी चरणों में जगह दें। इस प्रकार तीन ताली बजाने से भक्तजनों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती है और भगवान शिव का आशीर्वाद हमेशा बना रहता है।
कैसे शुरू हुई ताली बजाने की परंपरा
ताली बजाने की परंपरा को लेकर ऐसा कहा जाता है कि लंका के राजा रावण की कथा से भगवान शिव के सामने तीन बार ताली बजाने की प्रथा चालू हुई है। दरअसल, रावण भगवान शिव का बहुत बड़ा भक्त था। रावण ने भगवान शिव जी का आशीर्वाद पाने के लिए कठोर तपस्या की थी, इसके बाद भगवान शिव से रावण को वरदान प्राप्त हुआ था।
जिससे उसे शक्ति और लंका का प्रभुत्व प्राप्त हुआ। भगवान को आभार व्यक्त करने और धन्यवाद देने के लिए रावण ने भगवान शिव की पूजा के बाद तीन बार ताली बजाना शुरू किया। तब से लेकर आज तक यह प्रथा भगवान शिव के भक्तों के लिए एक परंपरा बन गई है।
