चिकित्सा-शास्त्र में भी शंख ध्वनि के विभिन्न उपयोग के प्रयोग जारी है। घाव, नेत्रविकार, स्नायुदोष दमा, सन्निपात, हृदयरोग, मधुमेह, मस्तिष्क की कोशिकाओं को पुनर्जिवित करने सद्रश उपचारों में शंख ध्वनि और भस्म के प्रयोगों पर काम जारी है। यहां हम आपको बता रहे हैं शंख से रोग-निवारण व कष्ट-मुक्ति के उपाय –

रातभर शंख में रखें जल को रोज सेवन करने पर अनेक रोगों से मुक्ति मिल जाती है। शंख की उपयोगिता इस बात पर निर्भर है कि शंख कितना शुद्ध व गुणवत्ता युक्त है।

शंख घिस कर नेत्र में लगाने से आंख की सूजन दूर होती है। शंख भस्म उचित अनुपात में सेवन करने से गुल्म, शूल पित्त, कफ, रूधिर प्लीहा आदि के विकार नष्ट हो जाते हैं।

अनाज उत्पादन में वृद्धि फसलों को पानी देते समय किसी शुभ-मूहर्त में 108 शंखोंदक भी मिला लें फसल बढ़ेगी, अनाज बढ़ेगा। अनाज भंडार को कीड़े-मकोड़ों से बचाने के लिए मंगलवार को शंखानाद करना चाहिए।

गर्भवती महिला के लिए यदि विष्णु शंख में गंगाजल भरकर रोहिणी, चित्रा व स्वाती नक्षत्रों में गर्भवती को पान कराएं तो प्रसव में कोई कष्ट नहीं होगा, संतान भी स्वस्थ व पुष्ट होगी।

स्वास्थ्य की साधारण देखभाल के लिए अन्नपूर्णा शंख में गंगाजल भरकर सुबह सवेरे पीने से स्वास्थ्य के विकार दूर होते हैं।

वास्तव में शंख एक बहुत गुणी यंत्र है, उसे सदा घर में रखें। यदि शंख की पूजा नित्य तुलसी से ही करें तो घर में क्लेश, दुख-दरिद्र, बीमारी का प्रवेश नहीं होता।

शंख का पानी यदि थोड़ा-थोड़ा पिया जाए तो हकलाना दूर होता है।

गूंगे व्यक्तियों को नित्य दो घंटे शंख बजाना चाहिए। इस तरह का अभ्यास नित्य करते 24 घंटों शंख डूबा जल सेवन करते रहें। शंख भस्म का प्रयोग भी गूंगों के लिए लाभदायक है।

 

शंख बजाने से योग की तीन क्रियाएं-

  1. यथापूरक, कुंभक और प्राणायाम एक साथ संपन्न होती है। उससे स्वास्थ्य में विकास होता है तथा कोई आसुरी शक्तियां एंव दुरात्माएं परेशान नहीं करतीं। शंख वामावर्ती ही होते हैं।
  2. प्रगाढ़ दाम्पत्य जीवन शीशे के बने एक कटोरे में लघु मोती शंख रखकर उसे अपने बिस्तर के नजदीक रख दें, इससे नकारात्मक उर्जा दूर होकर प्रगाढ़ दाम्पत्य सुख की अनुभूति होगी। पति-पत्नी द्वारा इससे जल आचमन से अपने माथे पर अभिषेक करने से वैमनस्यता दूर होती है।
  3. लक्ष्मी की कृपा जिस घर में दक्षिणावर्ती शंख का वास होता है। वहां लक्ष्मी का स्थायी निवास होता है। दक्षिणावर्ती शंख का विद्यापूर्वक पूजन करें तथा अपने व्यवसाय स्थल पर रखें तो आप सदैव ऋण मुक्त रहेंगे।

विदेश यात्रा में रूकावट- माता द्वारा चावल से भरा एक मोती शंख आप प्राप्त करें तथा उसे वहां जहां विदेशा यात्रा के कागजात रखें हों, तो अन्य कारणवश आपके विघ्न-रूकावट दूर हो जाएंगे।

व्यापार में उन्नति – एक दक्षिणवर्ती शंख व्यापार स्थान में भगवान विष्णु की मूर्ति के नीचे रखें। रोज इस शंख से पूजन करके गंगाजल अपने कार्यालय पर छिड़कें। बाधाएं समाप्त होकर व्यापार में उन्नति होने लगेगीं।

कब्ज मुक्ति – रात्रि को भोजनोपरांत शंखोदक का पान करें। एक शंख में पानी भरकर रख लें और फिर आधा घंटे बाद उस पानी को ग्रहण कर लें। ऐसा 3 दिन करने से पुराने कब्ज से भी मुक्ति मिल जाती है।

मधुमेह से रक्षार्थ- यदि शंख भस्म के साथ करेले का रस और गाय का दूध सुबह सेवन किया जाए तो मधुमेह का रोग ठीक होता है।

शरीर शक्ति व स्मरण – शुद्ध शिलाजित गर्म दूध में अच्छी तरह मिला लें। फिर इस मिश्रण का रोज को सोने के पूर्व शंख के जरिए पीएं। स्मरण व शारीरिक क्षमता में वृद्धि होगी।

(साभार – साधनापथ)

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