मैं सजने-संवरने के मामले में बहुत ही शौकीन हूं। शादी को छ: माह ही हुए थे। पति से जब कुछ मांगती तो वह मना नहीं करते। उस दिन परिवार के सभी लोग एक फंक्शन में जा रहे थे। मैं पति के आने का बेसब्री से इंतजार कर रही थी। वह लेट-लतीफ घर पहुंचे तो मैं बोली़ सब लोग तैयार हो गए हैं। और तुम अब आ रहे हो। तुम तो कम से कम तैयार हो गई होती। मुझे तैयार होने में कितनी देर लगेगी। बस शर्ट बदलना है।
वह लिपस्टिक ले आए ? मेरे यह कहते ही वह बोले, मुझे तो ध्यान ही नहीं रहा। तुम कोई दूसरी लिपस्टिक लगा लो। मैं नहीं लगाती मेरे मुंह से यह निकलते ही पति खीझ गए, फैशन की भी एक हद होती है। महीने में डेढ़-दो किलो तो तुम लिपस्टिक ही खा लेती हो। मैं गुस्से से जोर से चीख पड़ी क्यों झूठ बोलते हो? पौना किलो तो तुम्हारे पेट में भी जाती होगी। मेरा इतना बोलना था कि वहां मौजूद सभी लोग हंस पडे़ और मैं अपने शब्दों का अर्थ समझते ही शर्मशार हो गई।
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