भिखारी के एक हाथ में पहले से ही मांगी गई, रोटियों से भरी एक बड़ी पॉलिथीन की थैली मौजूद थी। एक बार तो मुझे लगा कि इसने इतनी रोटियाँ मांग रखी हैं फिर ये, अब क्यों मांग रहा है? मैंने बेमन भिखारी को एक परांठा दे दिया। वह फिर सामने खाना खा रहे एक दम्पति के पास जाकर खड़ा हो गया। दम्पति ने उसे कहा-‘यहाँ आके क्यों खड़े हुए हो, खाना खाने दो, आ जाते हैं, ना जाने कहाँ-कहां से।’ वह भिखारी फिर, किसी तीसरे के पास जा कर खड़ा हो गया भीख माँगने।
इस बीच मेरा खाना पूरा हुआ। मैं स्टेशन के बाहर प्याऊ पर ठण्डा पानी पीने गया तो मैं क्या देखता हूँ कि वही भिखारी कुत्तों, सुअरों को मांगी हुई रोटियां समभाव से खिला रहा है और वे सभी जानवर पूंछ हिला-हिला कर उस भिखारी के प्रति कृतज्ञता प्रकट कर रहे हैं। इस दृश्य को देखकर कुछ देर के लिये तो मैं पानी पीना ही भूल गया। फिर मैंने पानी पिया और वापस स्टेशन पर ट्रेन की प्रतीक्षा में आके बैठ गया। थोड़ी देर बाद वही भिखारी, मुझसे कुछ दूरी पर एक सवारी के पास खड़ा दिखाई दिया जो खाना खा रही थी। ..
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