Chandra Grahan 2022: 8 नवंबर यानी देव दिवाली 2022 के पर्व पर कार्तिक पूर्णिमा के दिन चंद्र ग्रहण लगने वाला है। भारत के पूर्वी भागों में जहां पूर्ण चंद्र ग्रहण नजर आएगा, तो वहीं अधिकतर जगहों पर साल का अंतिम चंद्र ग्रहण आंशिक होगा। कोलकाता, सिलीगुड़ी, पटना, रांची और गुवाहाटी समेत आसापास के शहरों में ग्रहण देखा जा सकेगा। इसका प्रभाव सभी जातकों पर राशि के अनुरूप होता है।
क्या होता है चंद्र ग्रहण दोष?
जब चंद्र का राहू और केतु के साथ नकारात्मक तरीके से मिलान होता है, जो वो चंद्र ग्रहण दोष कहलाता है। ग्रहण का प्रभाव राशियों पर ग्रहों की स्थिति के अनुसार पड़ता है। प्राचीन काल से ही ग्रहण को शुभ घड़ी माना जाता है और लोगों के जीवन पर इसका मंगल प्रभाव पड़ने की कामना की जाती रही है। मगर बहुत बार ये ग्रहण, व्यक्ति के जीवन में भयानक दोष लेकर आ जाते हैं।
चंद्र ग्रहण दोष 2022 तिथि और समय

ये साल 2022 का दूसरा चंद्र ग्रहण है, जो 8 नवंबर को लगने वाला है। भारतीय समय के मुताबिक 8 नवंबर, दिन मंगलवार को शाम बाद 5 बजकर 32 मिनट पर आरंभ होगा, जो 6 बजकर 18 मिनट पर जाकर समाप्त होगा। इसका मोक्षकाल शाम 7 बजकर 27 बजे तक रहेगा।
चंद्र ग्रहण दोष के लक्षण
व्यक्ति का चिंतित रहना
चंद्र ग्रहण दोष के कारण जातक हर वक्त चिंता से घिरा रहता है और उसके बनते बनते काम भी रह जाते हैं। इसके अलावा व्यक्ति का मन भी किसी काम में नहीं टिकता, जिसके चलते वे जीवन में अपने कार्यों में सफलता हासिल नहीं कर पाता है।
दूसरों पर दोष लगाता रहता है
ऐसे लोग अपने हर कार्य के लिए अन्य लोगों को दोषी करार देने लगते है। जीवन में असमान तरीके से आने वाले परिवर्तन इन्हें रास नहीं आते हैं, जिसके कारण वे मायूस रहते हैं और दूसरों से ईर्ष्यालु व्यवहार करने लगते हैं।
प्रतिष्ठा की हानि
समाज में अपने काम के लिए मशहूर और प्रतिष्ठावान लोगों के मान-सम्मान की हानि होने का भय रहता है। वे हर काम के लिए निंदा का शिकार हो जाते है, जो उनके मनोबल को तोड़ने का काम करता है। हर प्रकार से उस व्यक्ति पर भारी समस्याएं आ जाती है जिनके पीछे सिर्फ वही दोषी होता है। साथ ही स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें भी आती हैं।
चंद्र ग्रहण दोष के उपाय
चंद्र मूल मंत्र जपें- वो जातक खासतौर से बच्चे, जिनकी भी कुण्डली में चंद्र ग्रहण दोष पाया जाता है, वे 108 बार चंद्र मूल मंत्र जपें। इससे बच्चे के जीवन में आने वाली दुविधाओं और पेरशानी खुद-ब-खुद दूर हो जाती है। इससे बच्चे का मन पढ़ाई में लगने लगता है और आगे चलकर नौकरी या व्यापार के क्षेत्र में भी उन्हें खूब तरक्की हासिल होती है।
दान अवश्य करें- ऐसी मान्यता है कि ग्रहण के बाद दान करने से सभी पापों का नाश हो जाता है और प्रभु की असीम कृपा बनी रहती है। ग्रहण के उपरांत द्वार पर ग्रहण दान के लिए आने वाले किसी भी व्यक्ति को खाली हाथ न लौटाएं और दान-पुण्य अवश्य करें। दान में किसी गरीब को उसकी जरूरत की सामग्री या अन्न का दान करें। इससे आपको ग्रहण चंद्र दोष मुक्ति में मदद मिलेगी।
ग्रहण के बाद गंगाजल से स्नान करना न भूलें- शास्त्रों में ग्रहण के उपरांत स्नान करने का विधान है। ऐसी मान्यता है कि अगर ग्रहण के बाद आप गंगाजल से स्नान करते हैं, तो सभी पापों और दोषों से मुक्त हो जाते हैं।
हनुमान चालीसा का करें पाठ – ऐसा कहा जाता है कि अगी आप चंद्र ग्रहण दोष से गुज़र रहे हैं और इससे मुक्ति का रास्ता खोज रहे हैं, तो हनुमान चालीसा का पाठ अवश्य करें। इसके अलावा आप मंगलवार और शनिवार के दिन सुंदरकांड का पाठ भी करें। इस उपाय से आपको किसी भी चंद्र ग्रहण दोष से मुक्ति मिल सकती है। इसके अलावा चंद्र ग्रहण दोष से मुक्ति के लिए नियमित रूप से महामृत्युंजय मंत्र जपें और सभी चिंताओं से दूर हो जाएं।
चंद्र ग्रहण में खुद का रखें इस तरह से ख्याल
- चंद्र ग्रहण में कुछ भी खाने-पीने से परहेज करना चाहिए।
- चंद्र ग्रहण के दौरान खासतौर से गर्भवती महिलाओं को घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए। वे घर में ही रहें, ताकि चंद्र ग्रहण का गर्भ पर बुरा असर न हो पाए। ऐसा माना जाता है कि ग्रहण के प्रभाव से बच्चों में शारीरिक या मानसिक विकलांगता हो सकती है।
- इसके अलावा ग्रहण काल के दौरान सोना उचित नहीं माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि अगर आप ग्रहण काल में सो जाते हैं, तो इसका असर मस्तिष्क पर पड़ता है।
- इस दौरान पेड़ और पौधों को नहीं छूना चाहिए। अन्यथा इसका अशुभ फल मिलता है।
- इसके अलावा ग्रहण से पहले भोजन में तुलसी की पत्तियांं को डाल दें, ताकि भोजन पर ग्रहण का असर न हो।
- चंद्रग्रहण के समय श्रीराम के नाम का जप किया जा सकता, जो आपको हर दुविधा से बचाते हैं।
- ग्रहण के समय घर की साफ सफाई करने से बचें। ऐसा माना जाता है कि ग्रहण के समय की गई सफाई से लक्ष्मी मां रूष्ठ होकर घर से चली जाती है।
- सूतक काल का विशेष ख्याल रखें और उस दौरान कोई भी मांगलिक कार्य करने से बचें।
- पौराणिक मान्यताओं के अनुसार माना जाता है कि घर में सुख शांति और समृद्धि बनाए रखने के लिए जब पूर्ण ग्रहण लगता है तो उस स्थिति में ही सूतक के नियमों का पूरी तरह से पालन किया जाता है। जबकि आंशिक यां खंडग्रास वाले ग्रहण में सूतक काल प्रभावी नहीं होता है।
