Summary: जानें अफ़गानिस्तान से भागकर कैसे बनी बॉडीबिल्डर रोया करीमी
अफगानिस्तान में 15 साल की उम्र में मां बनी रोया करीमी आज यूरोप की टॉप बॉडीबिल्डिंग एथलीट्स में शामिल हैं। संघर्ष, धमकियों और चुनौतियों के बीच उन्होंने अपनी फिटनेस जर्नी से दुनिया को हैरान कर दिया।
Who is Roya Karimi: स्पेन के बार्सिलोना में हो रही वर्ल्ड बॉडीबिल्डिंग चैंपियनशिप में नॉर्वे की एथलीट रोया करीमी सबका ध्यान आकर्षित कर रही हैं। उनकी लोकप्रियता का कारण सिर्फ उनका शानदार प्रदर्शन नहीं है, बल्कि उनका वो अद्भुत सफर है जो अफगानिस्तान की कठिन परिस्थितियों से शुरू होकर यूरोप की टॉप बॉडीबिल्डर्स की सूची तक पहुंचा है। 30 साल की रोया करीमी, एक बेटे की मां हैं और आज यूरोप की प्रमुख वेलनेस कैटेगरी एथलीट्स में शामिल हैं।
यूरोप में गोल्ड जीतकर वर्ल्ड चैंपियनशिप का टिकट
रोया ने अप्रैल में “स्टोपेरिएट ओपन” बॉडीबिल्डिंग चैंपियनशिप में वेलनेस कैटेगरी में गोल्ड मेडल जीता। इस कैटेगरी में फिटनेस, हेल्दी लुक और नेचुरल बॉडी लाइन को महत्व दिया जाता है। इसके बाद उन्होंने “नॉर्वे क्लासिक 2025” में भी जीत हासिल की, जिसमें स्कैंडिनेविया के कई बड़े एथलीट हिस्सा लेते हैं। फिर उन्होंने यूरोपियन चैंपियनशिप में हिस्सा लिया, वहीं से उन्होंने वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए क्वालिफाई किया।

15 की उम्र में बनी थीं मां
रोया का जन्म काबुल, अफगानिस्तान में हुआ। सिर्फ 14 साल की उम्र में उनकी शादी कर दी गई और 15 साल की उम्र में वे मां बन चुकी थीं। 2011 में रोया अपने बेटे और माँ के साथ अफ़ग़ानिस्तान से नार्वे भाग गयीं और वहाँ एक नई जिंदगी की शुरुआत की।
नर्सिंग से शुरुआत, जिम ने बदला जीवन
नॉर्वे पहुँचकर रोया ने अपनी पढ़ाई जारी रखी और नर्सिंग की डिग्री ली। कई सालों तक वह हेल्थ सेक्टर में नर्स के रूप में काम करती रहीं। भागदौड़ भरी ज़िंदगी के बावजूद उन्होंने व्यायाम, योग और रनिंग को अपनी दिनचर्या में शामिल रखा। शुरुआत में यह सिर्फ फिटनेस का हिस्सा था, लेकिन धीरे-धीरे इसे करना उन्हें मानसिक शांति देने लगा। यहीं से उनकी बॉडीबिल्डिंग की ओर रुचि बढ़ने लगी।
कोच कमल जलालुद्दीन बने जीवनसाथी
नॉर्वे में रोया की मुलाकात बॉडीबिल्डिंग कोच और एथलीट कमल जलालुद्दीन से हुई।
कमल ने रोया की क्षमता और उनके जुनून को पहचान लिया। उन्होंने न सिर्फ ट्रेनिंग दी, बल्कि भावनात्मक रूप से भी रोया का साथ दिया। कुछ समय बाद दोनों ने शादी कर ली और खेल उनके जीवन का केंद्र बन गया। 2024 की शुरुआत में, रोया ने नर्सिंग करियर छोड़कर पूरी तरह से प्रोफेशनल बॉडीबिल्डिंग को समर्पित होने का फैसला किया। सिर्फ 18 महीनों की कड़ी मेहनत में उन्होंने यूरोप में कई मेडल जीत लिए और विश्वस्तरीय मंच पर नॉर्वे का प्रतिनिधित्व करने का अवसर प्राप्त किया।
बिकिनी पहनने पर मिली धमकियाँ
रोया बताती हैं कि एक मुस्लिम देश से आने वाली महिला के लिए स्टेज पर बिकिनी पहनना आसान नहीं था। जैसे ही उनकी प्रतियोगिता की तस्वीरें सोशल मीडिया पर फैलीं, रूढ़िवादी समुदायों ने उन्हें निशाना बनाना शुरू कर दिया। लोगों ने उन्हें “गैर-इस्लामी” कहा, उनकी मातृत्व पर सवाल उठाए और उनकी इज्जत पर टिप्पणी की। धीरे-धीरे आलोचना ने जान से मारने की धमकियों का रूप ले लिया। लेकिन, उन्होंने इन सबका सामना करते हुए सिर्फ़ अपने काम पर ध्यान दिया और आज इस मुक़ाम तक पहुंच सकीं।
