Research highlights an alarming rise in childhood high blood pressure over 20 years, linking the surge to unhealthy routines and weight gain.

Summary: 20 साल में बच्चों का बीपी क्यों बढ़ा दोगुना? शोध में सामने आई चौंकाने वाली सच्चाई

तेजी से बदलती लाइफस्टाइल, गलत खान-पान और बढ़ते मोटापे ने बच्चों की सेहत पर गंभीर असर डालना शुरू कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि हाई ब्लड प्रेशर, जिसे पहले सिर्फ बड़ों की बीमारी माना जाता था, अब कम उम्र के बच्चों में भी तेजी से बढ़ रहा है।

High BP In Children: आज की भाग-दौड़ भरी लाइफस्टाइल बच्चों और युवाओं के स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल रही है। जो हाई ब्लड प्रेशर कभी बुजुर्गों की बीमारी माना जाता था, अब कम उम्र के लोगों में भी तेजी से बढ़ रहा है। बढ़ा हुआ बीपी धीरे-धीरे हार्ट की धमनियों पर दबाव डालता है, जिससे हार्ट अटैक, स्ट्रोक और किडनी डैमेज का खतरा बढ़ जाता है। हाल ही में आई एक नई स्टडी में खुलासा हुआ है कि बच्चों में हाई बीपी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। आइए जानते हैं इस रिसर्च के बारे में और इसके पीछे की वजहें क्या हैं।

Children’s high blood pressure cases have doubled in the last 20 years, with new research revealing lifestyle-related causes behind the rise.
High BP In children

द लैंसेट चाइल्ड एंड एडोलसेंट हेल्थ जर्नल में छपे एक बड़े अध्ययन ने बताया कि पिछले दो दशकों में बच्चों में हाई ब्लड प्रेशर के मामले लगभग दोगुने हो चुके हैं। 2000 में जहां बच्चों में हाई बीपी का आंकड़ा करीब 3.2% था, वही 2020 तक यह बढ़कर 6% से भी ज्यादा हो गया। यह बढ़ोतरी सिर्फ एक संख्या नहीं है, बल्कि उस दिशा की ओर इशारा करती है जहां बचपन की बीमारियां बढ़कर बड़े होने पर गंभीर रूप ले सकती हैं। कम उम्र में बढ़ रहा बीपी आगे चलकर युवाओं में हार्ट की बीमारी, डायबिटीज और किडनी समस्याओं का खतरा भी कई गुना बढ़ा सकता है।

A global study shows a sharp increase in hypertension among children over two decades, identifying obesity and poor diet as major contributors.
Main cause of high bp in children

इस रिसर्च में पाया गया है कि दुनिया भर में हर पांचवां ओवरवेट बच्चा हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित है। मोटापा केवल वजन बढ़ने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह शरीर के अंदर कई बदलाव लाता हैजैसे इंसुलिन रेजिस्टेंस, ब्लड वेसल्स की सख्ती और हार्मोनल गड़बड़ी। ये सभी चीजें मिलकर ब्लड प्रेशर को बढ़ाती हैं। खास बात यह है कि सामान्य वजन वाले बच्चों की तुलना में मोटापे वाले बच्चों को हाई बीपी होने का खतरा आठ गुना अधिक होता है।

कई बार बच्चों का ब्लड प्रेशर सामान्य जांच में ठीक दिखाई देता है, लेकिन असल में उनका बीपी हाई लेवल पर होता है। इसे हिडन हाइपरटेंशन कहा जाता है, जिसमें सही स्थिति का पता केवल अस्पताल में की गई जांच से ही चलता है। यह स्थिति अधिक खतरनाक इसलिए है क्योंकि माता-पिता को इसका पता भी नहीं चलता और बीपी धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचाता रहता है। विशेषज्ञों का मानना है कि 9% से ज्यादा बच्चों में इस तरह का छिपा हुआ ब्लड प्रेशर हो सकता है, जो भविष्य में गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है।

हाई ब्लड प्रेशर से बचने का सबसे आसान तरीका है बचपन से ही सही आदतें अपनाना। बच्चों को ज्यादा नमक वाला खाना न दें, पैकेट फूड और जंक फूड कम करवाएं, और ताजे फल-सब्जियों की मात्रा बढ़ाएं। रोजाना कम से कम 30–40 मिनट की फिजिकल एक्टिविटी, अच्छी नींद और तनाव से दूर रहना भी जरूरी है। टीवी और मोबाइल स्क्रीन का समय सीमित करना और बच्चों को आउटडोर खेलों के लिए प्रोत्साहित करना ब्लड प्रेशर नियंत्रित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

स्वाति कुमारी एक अनुभवी डिजिटल कंटेंट क्रिएटर हैं, जो वर्तमान में गृहलक्ष्मी में फ्रीलांसर के रूप में काम कर रही हैं। चार वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाली स्वाति को खासतौर पर लाइफस्टाइल विषयों पर लेखन में दक्षता हासिल है। खाली समय...