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प्रभु श्रीराम जब केवट की नाव में विराजे फिर क्या हुआ, जानिए कथा

श्री राम ने केवट से नाव मांगी, पर वो नहीं लाए। वह कहने लगे मैंने आपका भेद जान लिया। आपके चरण कमलों की धूल के लिए सब लोग कहते हैं कि वह मनुष्य बना देने वाली कोई जड़ी बूटी है। जिसके छूते ही पत्थर की शिला सुंदरी स्त्री हो गई ;मेरी नाव तो काठ की है। हे नाथ! मैं चरण कमल धोकर आप लोगों को नाव पर चढ़ा लूँगा, मैं आपसे कुछ उतराई नहीं चाहता। हे राम! मुझे आपकी दुहाई और दशरथजी की सौगंध है, मैं सब सच.सच कहता हूँ। लक्ष्मण भले ही मुझे तीर मारें, पर जब तक मैं पैरों को पखार न लूँगा, तब तक हे हे कृपालु! मैं पार नहीं उतारूँगा।

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