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नीलकंठ-गुलशन नन्दा भाग-35

आनन्द फरामजी नर्सिंग होम की बालकनी में खड़ा रात के फैलते हुए अंधकार को देख रहा था। यों तो नर्सिंग होम में चारों ओर बिजली के लट्टू जगमगा रहे थे, किंतु आनन्द की दृष्टि रात की कालिमा को चीर रही थी। आज की रात उसके लिए जीवन या मरण की रात थी। आज बेला का […]

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