गुरु पूर्णिमा वेद व पुराणों के रचयिता महर्षि वेदव्यास जी को समर्पित होती है। सनातन धर्म में महर्षि वेदव्यास जी को प्रथम गुरु माना जाता है। इस दिन को व्यास जयंती के रूप में भी मनाया जाता है।
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व्यास पूर्णिमा-गुरु पूर्णिमा
कहा जाता है”गुरु के बिना ज्ञान कहाँ?”अतः जीवन के हर पड़ाव में गुरु का सान्निध्य अनिवार्य होता है.गुरु की सेवा और भक्ति करने से व्यक्ति को सदबुद्धि और शक्ति प्राप्त होती है,मार्ग प्रशस्त होता है
गुरु पूर्णिमा का महत्त्व
गुरु के समक्ष नतमस्तक होकर उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का सर्वोत्तम दिन है गुरु पूर्णिमा। इस दिन गुरु पूजा करने का नियम है। प्राचीन गुरुकुल व्यवस्था के तहत शिष्य इसी दिन श्रद्घा भाव से प्रेरित होकर अपनी सामर्थ्यानुसार दक्षिणा देकर गुरु के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते थे। इसी दिन चारों वेदों के व्याख्याता वेद व्यास जी की प्रमुख रूप से पूजा की जाती है।
जानें चंद्र ग्रहण का क्या होगा आप पर असर, शुभता के लिए अपनाएं आसान उपाय
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर ग्रहण पड़ रहा है। यह जीवन में एक नई शुरुआत लाता है जो कि अच्छा या बुरा हो सकता है। ग्रहण का सबसे ज़्यादा असर 1,2,4,7, 9 और 5 मूलांक पर विशेष रूप से पड़ेगा।
