गर्भावस्था के दौरान गर्भवती को लगता है कि उनका वजन इतना कैसे बढ़ गया। कई बार ऐसा खानपान की वजह से भी होता है पर इस वजन से घबराने की जरूरत नहीं है। वैसे आप थोड़ी सावधानी बरत कर इसे धीमा कर सकती हैं।
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गर्भावस्था के दौरान कितना सुरक्षित है टैटू आर्ट How Safe Is Tattoo Art During Pregnancy
कई बार ऐसा भी होता है कि गर्भावस्था के दौरान बना टैटू, डिलीवरी के बाद अजीब सा लगने लगता है इसलिए बॉडी आर्ट करने से पहले थोड़ा इंतजार करें। अपने शिशु को इस दुनिया में आने दें।
आपके वजन पर निर्भर है शिशु का विकास Weight Gain In Pregnancy
गर्भावस्था में सभी महिलाओं का वजन बढ़ता है और यह काफी हद तक जरूरी भी है क्योंकि सही तरह से वजन बढ़ने से, शिशु का विकास भी पूरी तरह होता है लेकिन वजन की सही मात्रा क्या हो? ये पता नहीं होता ।
पेल्विक (योनि) की सूजन कंजेशन सिंड्रोम हो सकती है
वैरीकोज वेन्स आपके रैक्टम के आसपास भी हो सकती हैं, यहां इन्हें ‘हीमोरायड्स’ कहते हैं।लगता है कि आपको भी वही समस्या हो गई है।इसे पेल्विक कंजेशन सिंड्रोम कहते हैं।
गर्भावस्था में कायम रहे दांतों की चमक
जिस तरह महिलाएं गर्भावस्था में अपनी देखभाल का खास ध्यान रखती हैं उसी तरह से गर्भावस्था के दौरान दांतों और मसूड़ों की देखभाल करना भी अत्यंत जरूरी है। अगर इस समय कुछ बातों का ध्यान रखें तो गर्भावस्था में दांतों की विभिन्न समस्या से निपटा जा सकता है।
प्रसव में आसानी के लिए दिनभर में 8 गिलास पानी अवश्य पीएं
गर्भावस्था के दिनों शरीर को तरल पदार्थों की काफी जरूरत है, इसलिए अगर आप कम पानी पीती हैं तो जरा संभल जाएं और दिनभर में काम से कम 8 गिलास पानी अवश्य पीएं।
वसा से डरने की बजाए गुड फैट अपनाएं
सारी वसा बुरी नहीं होती। कुछ वसा तो गर्भावस्था में बहुत ही फायदेमंद होती है; जैसे ओमेगा 3 फैटी एसिड! आपको अपने आहार में इसे अवश्य शामिल करना चाहिए। डीएचए से भ्रूण व शिशुओं के मस्तिष्क व आंखों का संपूर्ण विकास होता है।
अगर कोई समस्या हो तो डॉक्टर की सलाह लें
कई बार ऐसा होता है कि जब पता चलता है कि आने वाला शिशु स्वस्थ व सामान्य नहीं है और इसके लिए वो मानसिक रूप से तैयार नहीं होते ऐसी, स्थिति में बहुत जरूरी है कि आने वाले समय के लिए आप डॉक्टर की सलाह लें।
दूसरी तिमाही-अल्ट्रासाउंड में जानें भ्रूण के विकास व अंगों की संरचना
गर्भधारण के दूसरी तिमाही में यह अल्ट्रासाउंड करवाना होता है, क्योंकि इससे भ्रूण के विकास व अंगों की संरचना का पता चलता है। इससे भ्रूण के विकास का भी अनुमान लगाया जा सकता है। इसमें आपके शिशु की ज्यादा बेहतर तस्वीर दिखने लगती है।
