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Hindi Story: अनोखेलाल का बटुआ

Hindi Story: अनोखेलाल कभी कोई काम नहीं करता था, पर उसका बटुआ तंबाकू की सप्लाई का काम करता था। बटुए की सी.आर. में लिखते, प्लस। रिटायर होने के बाद उसने कहा था, ‘मेरे बिना काम नहीं चल पाएगा।’  वह कहना चाह रहा होगा, ‘मेरे बटुए की तंबाकू के बिना ऑफिस के स्टॉफ को कैंसर हो […]

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सपना – एक लघुकथा

वह मुझसे कैंपस बिल्डिंग की लिफ्ट में मिली। सालों बाद, मैंने उसे पहचान लिया। उसकी आँखों में आँसू थे। हाँ, वह रो रही थी। मुझे याद है कि वह अपने माता-पिता की इकलौती संतान थी। मैंने उससे बात की।

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जवानी मस्तानी दीवानी – राजेन्द्र पाण्डेय भाग-4

Hot hindi Story – जवानी मस्तानी दीवानी Hot hindi Story : युवक का व्यक्तित्व काफी प्रभावशाली था। चौड़ी छाती, भुजाएं गठी हुई, आंखों में गजब का यौन-आमंत्रण था। पुरुषोचित सौंदर्य से वह पूरी तरह लदा हुआ था। मैं उसके बारे में ही सोचती हुई सो गई। रात के कोई दो बजे बाहर घूम रही पुलिस […]

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एक हसीन चाहत – राजेन्द्र पाण्डेय भाग- 3

Hot Story Hindi – एक हसीन चाहत Hot Story Hindi : दूसरे दिन मैं स्कूल आई तो माधुरी गेट पर ही मिल गई। वह एक लड़के से हंस-हंसकर बातें कर रही थी। ‘मेरे संस्कार ही ऐसे थे, कि मैं जिस किसी स्त्री-पुरुष या लड़का-लड़की को हंसते बोलते देखती तो मैं उनके संबंधों को लेकर सशंकित […]

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प्रेम की प्यासी – राजेन्द्र पाण्डेय

Hindi Hot story : पराए पुरूष से लगाव Hindi Hot story : मेरा गोरा रंग, बोलती आंखें, कंधों तक बलखाते बाल, चौड़ी छाती, पतली कमर और चिकनी सुडौल जांघे सभी को लुभाती थी। पुरुष मेरे सौंदर्य को देखकर कहते-‘यह लड़की तो किसी रसगुल्ले से कम मुलायम और रसदार नहीं है। इसे देखने मात्र से ही […]

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प्यार की खुशबू – राजेन्द्र पाण्डेय भाग- 2

Hot Story in Hindi- प्यार की खुशबू – राजेन्द्र पाण्डेय Hot Story in Hindi : दूसरे दिन पापा घर आ गए। उनके आते ही मम्मी ने मायके जाने का मन बना लिया। वह मुझे भी अपने साथ ले जाएगी, यह सोचकर मैं मन ही मन खुश हो रही थी। लेकिन वह मुझे अपने साथ नहीं […]

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समीकरण – गृहलक्ष्मी कहानियां

आसमां से विधाता भी अपनी इस कृति (इंसान) को देख निहाल हो रहा था। ‘विपरीत से विपरीत परिस्थिति में भी सकारात्मक और आशावादी बने रहकर तू विजयी हो ही जाता है। धन्य है तू!

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अवसरवाद की महिमा – गृहलक्ष्मी कहानियां

समाजवादी कहते हैं कि वे समाजवाद के समर्थक हैं। पूंजीवादी कहते हैं कि वे पूंजीवाद के समर्थक हैं। यदि अवसरवाद के कोई संस्थापक होंगे तो उन्हें जान कर अफसोस होगा कि अवसरवाद के कट्टर समर्थक भी यह मानने के लिए तैयार नहीं होते कि वे अवसरवादी हैं।

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पिंजरे के उस पार – गृहलक्ष्मी की कहानियां

‘सुरीला मिट्ठू’ नाम था उसका। आज मेले में उसके मालिक ने उसको एक नए मालिक को बेच दिया था। उसे आज एक नया घर मिलने वाला था, लेकिन पिंजरा वही पुराना था, यहां उसे लौट कर रोज़ वहीं कैद हो जाना था।

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