सिनेमा के पर्दे पर भले ही अक्षय कुमार ‘पैडमैन’ की हैसियत रखते हैं, लेकिन उनका ये रोल जिन लोगों से प्रेरित था, उन्हीं सा एक चेहरा हैं- डॉ. अमित सक्सेना, जिन्हें आज सभी ‘लखनऊ के पैडमैन’ के रूप में पहचानते हैं। डॉ. अमित इस बात का सबूत हैं कि जिन्हें कुछ करना होता है, उन्हें प्रेरणा कहीं से भी मिल जाती है। इसके अलावा डॉ. अमित हमारे समाज का एक ऐसा चेहरा भी हैं, जो ये विश्वास दिलाता है कि ऐसे पुरुषों की भी कोई कमी नहीं है, जो औरतों के उस दर्द को भी इतनी गहराई से समझते हैं, जिनके बारे में खुद औरतें तक बात करने से कतराती हैं।
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अधूरा-अधूरा सा है महिला सशक्तीकरण!
यूं तो भारतीय धार्मिक ग्रंथ से लेकर मुगल काल, अंग्रेजी सत्ता और अब आधुनिक भारत में अनेकों सशक्त महिलाओं के प्रतीक इतिहास में दर्ज़ हैं, लेकिन वास्तविकता में ज़मीन की कलई खुलती है तो यह सब प्रतीकात्मक ज़्यादा नज़र आता है।
