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विडंबना – गृहलक्ष्मी कहानियां

ये एक स्त्री के लिए विडंबना ही तो है कि घर-बाहर हर जगह उसका अपना ही वजूद सुरक्षित नहीं। नरपिशाचों से खुद को बचाते हुए लक्ष्मी का भाग्य भी ऐसी ही परिस्थितियों से गुज़र रहा था।

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एक ऐसी जगह जहां मर्दों के लिए होगी नो इंट्री…!

जी हां, यह सच है कि पूरी दुनिया में आपको कई ऐसी जगह मिल जाएगी जहां पर महिलाओं के लिए नो इंट्री यानि की उनका प्रवेश निषेध है।

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ईर्ष्या की आग से जलना क्यों?

‘उसकी साड़ी मेरी साड़ी से सफेद क्यों?’ ‘देखो तो क्या बन-ठन कर रहती है? सब ब्यूटी पार्लर का कमाल है, वरना है क्या इसमें।’ ‘चार अक्षर क्या पढ़ लिया, जाने क्या समझती है अपने-आपको?’ ‘देखो तो क्या फैशन से रहती है। कुछ काम- धाम तो है नहीं, बस फैशन ही तो करना है।’
महिलाओं के बीच आमतौर पर प्रचलित वार्तालाप के ये अंश और कुछ नहीं, बल्कि उनके भीतर पनप रही ईर्ष्या के अंकुर हैं, जो वक्त बेवक्त फूट पड़ते हैं।

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ये वो बदनाम गलियां हैं जहां बिस्तर तो नसीब होता है लेकिन नींद नहीं..

    ये वो बदनाम गलियां हैं  जहाँ किस्मत भी अपना रुख करने से पहले  सौ दफ़े दम तोड़ती है।    जहाँ सूरज रोज़ उगता तो है मगर  सिर्फ धूप लाकर छोड़ देता है,  पर कोई सुबह नहीं लाता।   यहाँ दिन में कई बार रात होती है  और रात भी वो, जिसमें बिस्तर तो […]

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अपनी हिम्मत हैं कि हम फिर भी जीये जा रहे हैं..

    कोख में आई जब मैं माँ के .. दादी ने दुआ दी पोते के लिए,बुआ ने मन्नत मांगी भतीजे के लिए पापा ने कहा मेरा लाल आ रहा हैं,मेरे वंश का चिराग आ रहा हैं …… तब माँ ने मुझसे हौले से कहाडर मत मेरी रानी !हर अबला की हैं यही कहानीफिर भी […]

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