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दिव्य जीवन, चिरस्थायी अनुभव है – स्वामी चिन्मयानंद

दिव्य जीवन स्वयं ही एक चिरस्थायी अनुभव है जिसमें जीवन को सदा सुख मिलता है और वह सच्चिदानन्द की परम सत्ता में विलीन होने के लिए आगे बढ़ता है। यही परम सत्ता है और जीवन का परम लक्ष्य है।

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दिव्य जीवन कैसे जियें? – स्वामी चिन्मयानंद

दिव्य जीवन पर तुम्हारा अधिकार अवश्य होगा, भले ही तुम अनेक गलतियों के बीच भी इस जीवन का श्रीगणेश कर देते हो तथा प्रत्येक पतन के पश्चात् पुन: प्रयास जारी रखते हो।

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