प्रिया और नवल की शादी को पूरे पांच बरस हो गये थे। वे अपने पारिवारिक जीवन से बहुत खुश थे। काम की अधिकता और जीवन का आनंद उठाने के लिये शादी के शुरुआती दो बरस तक तो उन्होंने परिवार बढ़ाने के बारे में सोचा तक नहीं। अपनी सास माया के दबाव के आगे प्रिया इस बारे में सोचने के लिये मजबूर हो गयी।
Tag: हिंदी कथाएं
ठहरिए, आगे हेलमेट चेकिंग चालू आहे! – गृहलक्ष्मी कहानियां
दोपहिया वाहन चलाने वालों को अगर यह समाचार मिल जाए कि आगे हेलमेट चेकिंग चल रही है तो चालक रास्ता बदल देता। कुछ अपनी डिक्की में रखे हेलमेट को पहन लेते हैं। यह सब चालक केवल चालान से बचने के लिए करते हैं। इन दोपहिया वाहन चालकों को एक्सीडेंट से मौत का डर नहीं लगता, इसलिए हेलमेट नहीं लगाते।
तेज़ाब – गृहलक्ष्मी कहानियां
तेज़ाब से किसी चेहरे को बिगाड़ देने जैसी हरकत वे लोग करते हैं, जो कभी भी अपनी शख्सियत को संवार नहीं पाते। क्या वाकई तेज़ाब का असर किसी के बुलंद हौसलों से ज़्यादा होता है, जानिए इस सशक्त कहानी द्वारा-
आजकल की लड़कियों की पहली पसंद – गृहलक्ष्मी कहानियां
हमें आज दर्द का एहसास तभी क्यों होता है, जब वह खुद हमें ही या हमारे अपनों को ही होता है? जब एक अपराधी सज़ा से बचता है, उसी पल सौ अपराधों की पृष्ठभूमि तैयार हो जाती है। प्रस्तुत है ऐसी ही एक सटीक-सशक्त और प्रासंगिक कहानी-
दूसरी पारी – गृहलक्ष्मी कहानियां
मई महीने की ढेर गर्म दोपहरी में इंसानों के साथ- साथ इमारतें भी भट्टी बन गई थीं। मौसम की तल्खी यथावत जारी थी। दो-चार लोगों से पता पूछने के लिए गाड़ी का शीशा नीचे किया ही था उसी में विवेक के माथे का पसीना किसी बंद नल से रिसते पानी की बूंदो की तरह टप-टप […]
मूछों वाली देवरानी – गृहलक्ष्मी कहानियां
अरे! कविता बेटा, जरा मेहमानों के लिए चाय नाश्ता तो ला। जी अम्मा, अभी लाई। मैं मेहमानों के सामने चाय और पकौड़े रख कर आ गई। वैसे तो अम्मा कभी मुझसे बहुत खास खुश नहीं रहती पर आज बहुत खुश है। देवरजी का रिश्ता जो आया है। मेरी परिवार में मैं हूं, मेरे पति जो कि एक अध्यापक हैं, मेरी प्यारी सासू मां जिन्हें मैं प्यार से अम्मा कहती हूं और मेरे देवर जी। देवरजी पढ़ने में बहुत अच्छे थे। थोड़े ही प्रयास में उन्हें अमेरिका में नौकरी मिल गई। जब से वह बाहर गए हैं मां के तो पैर ही जमीन पर नहीं रहते।
कोरोना के कमाल – गृहलक्ष्मी कहानियां
इस कोरोना नाम के छोटे से वायरस ने ढेर सारे कमाल के काम किए हैं। अब इतने हजार संक्रमित हुए, इतनों की जांच हुई, इतने ठीक हो गए, मास्क, 2 गज की दूरी…
फोन की घंटी लगातार बज रही थी – गृहलक्ष्मी कहानियां
फोन की घंटी लगातार बज रही थी। आज एकता ने सोच लिया था कि फोन नहीं उठाना है। सारा दिन फोन के ताने सुन-सुनकर उसके कान पक गए। जब मैं काम करती हूं तो कोई नहीं देखता मुझे।
उधार वाले खिस्को – गृहलक्ष्मी कहानियां
आज भोगीलाल जी मिले तो उनके रंग-ढंग निराले थे। हाथ में गोल्डन घड़ी। गले में गोल्डन चेन। आंखों पर गोल्डन चश्मा। गोल्डन मोबाइल। गोल्डन चेन से बंधा गोल्डन पट्टे वाला गोल्डन रिट्रीवर। छोटे-मोटे बप्पी लाहड़ी नज़र आ रहे थे अपने भोगी भाई। मैं चौंक गया। सामान्य सी नौकरी करने वाला व्यक्ति अचानक इस भेष में? और आज वो मुझसे मिले बिना ही निकले जा रहे थे। मुझे आवाज़ देकर बुलाना पड़ा।
एक तरफ उसका घर – गृहलक्ष्मी कहानियां
कान में इयरफोन लगाना, दुनिया को सुनने से इनकार कर देना है। तमाम अनपेक्षित, अवांछित आवाज़ों से खुद को काट लेना है।
