Independent, confident, and beautifully single
Better single than stuck in a half-hearted love

Summary: सिंगल होना अब डर नहीं, एक शक्ति है

आज की महिलाएँ सिंगलहुड को कमी नहीं, बल्कि आत्मसम्मान, स्वतंत्रता और मानसिक शांति के रूप में देख रही हैं। वे उन रिश्तों से दूर रहकर खुश हैं जो उनके विकास, पहचान और भावनात्मक संतुलन को सीमित करते हैं।

Singlehood Trend Among Women: आज की महिलाएँ पहले से कहीं अधिक जागरूक हैं और समाज की बनायीं हुई अपनी सीमाओं से बाहर निकल कर एक अच्छी और बेहतर जिंदगी चुन रही हैं। वे जान चुकी हैं कि उनकी पहचान किसी रिश्ते की परिभाषा तक सीमित नहीं है। काफी लंबे समय तक समाज ने एक मान्यता बनाई हुई थी की कि महिला की सुरक्षा, खुशी और भविष्य किसी पुरुष साथी पर निर्भर है। लेकिन नई सोच की महिला इस विचारधारा को बेझिझक होकर पूरी तरह से चुनौती दे रहीं हैं। अब वह समझने लगी हैं कि सिंगल होना कमी नहीं, बल्कि एक तरह की सफलता है। कई बार अकेली रहकर ही वह अपने असली स्वरूप में खिली हुई नज़र आती हैं,और खुद

को नए रूप में ढालती हैं। आइये जानते हैं आज की महिलाएँ आखिर क्यों इतनी स्थिरता और गर्व के साथ सिंगलहुड चुन रही हैं।

Singlehood isn’t loneliness, it’s self-respect
Today’s woman chooses peace over pressure

ना जाने कितनी ही महिलाएँ रिश्तों में अपने सपनों, भावनाओं और इच्छाओं को हमेशा दूसरे स्थान पर रखती आई हैं। लेकिन अब वे समझ चुकी हैं कि जो रिश्ता आपके अस्तित्व को मिटा दे, वह रिश्ता नहीं, एक बोझ है। इसलिए आज की महिला पहले खुद को प्राथमिकता देती है, और वही बंधन चुनती है जो उसके आत्मविकास के लिए बेहतर हैं।

पहले के समय में महिलाओं को कम या जो भी हैं उसी में खुश रहना सिखाया जाता था,कम सम्मान, कम समय, कम प्यार और कम समझ इसके आम उदाहरण हैं। लेकिन नई पीढ़ी की महिला बिना हिचक अपनी इच्छा सामने रखती हैं। वह जानती है कि उसकी अपेक्षाएँ किसी तरह की मांग नहीं बल्कि उसके आत्म-सम्मान का हिस्सा हैं।

अब महिलाएँ ऐसे रिश्ते की तलाश में नहीं हैं जो सुविधानुसार मिला हो या जिसमें उन्हें सिर्फ ज़रूरत पड़ने पर ही महत्व मिले। वे दृढ़ता से कहती हैं, अगर मुझे पूरे मन से नहीं चाहा जाता हैं , तो अकेले हो कर खुश रहना ही बेहतर है। वे आधे-अधूरे, असंतुलित और मतलब से जुड़े प्रेम को स्वीकारने से इनकार कर चुकी हैं।

अब महिलाओं को एहसास हो चुका है कि सुरक्षा, शांति, आत्म-संतुष्टि और सम्मान सिर्फ एक रिश्ते पर निर्भर नहीं होते। उनका घर करियर, आपसी दोस्ती,  मेहनत और मानसिक शांति से भी बनता है। प्यार अब भी ज़रूरी है, लेकिन सिर्फ प्यार ही एकमात्र सहारा’ नहीं हैं।

Self-worth above every relationship.
Her silence, her strength, her single journey

आज की महिलाएँ किसी ऐसे माहौल का हिस्सा बनना ही नहीं चाहतीं जहाँ उन्हें लगातार खुद को साबित करना पड़े। उन्होंने समझ लिया है कि जीवन में तकरार या बहस में जीतने से बेहतर है अपने मन का सुकून जीतना। मन की शांति से उनके जीवन में एक स्थिरता आती हैं।

आत्मनिर्भरता ने महिलाओं को सबसे बड़ी शक्ति दी है। अब रिश्ता उनकी मजबूरी नहीं, बल्कि एक विकल्प है।आजकल की महिला वही छोड़ती और स्वीकार करती हैं जो उनके मानसिक स्वास्थ्य और सम्मान के लिए बेहतर हो। आर्थिक स्वतंत्रता मिलने पर वह अपना जीवन अपने हिसाब से जीती हैं।

महिलाएँ अब पूरी स्पष्टता के साथ मानती हैं, अकेलापन बुरा नहीं हैं बल्कि गलत रिश्ता बुरा होता है। वे मानसिक शांति को किसी भी रिश्ते से ऊपर रखने लगी हैं और किसी भी प्रकार की भावनात्मक थकावट से दूरी बनाती नज़र आ रहीं हैं।

उत्तराखंड से ताल्लुक रखने वाली तरूणा ने 2020 में यूट्यूब चैनल के ज़रिए अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद इंडिया टीवी के लिए आर्टिकल्स लिखे और नीलेश मिश्रा की वेबसाइट पर कहानियाँ प्रकाशित हुईं। वर्तमान में देश की अग्रणी महिला पत्रिका...