दुनिया भर में ढेरों पुण्य के काम है। इन्हीं कामों में से एक है अनाथ बच्चों को पनाह देना, उन्हें गोद लेना। नाम देना और परवरिश करना। अब तो ढेरों नामी गिरामी लोग बच्चे गोद ले रहे हैं और दूसरों को ऐसा करने के लिए प्रेरित भी कर रहे हैं। मगर ये परवरिश अपने जन्में बच्चे की परवरिश से थोड़ी अलग होती है। उनको अधिकार वाला, परिवार वाला और सहयोग वाला एहसास थोड़ा ज्यादा कराना होता है। उन्हें बताना होता है कि आपके लिए वो उतने ही जरूरी हैं, जितने आम बच्चे अपने पेरेंट्स के लिए जरूरी होते हैं। इस एक एहसास के लिए आपको परवरिश के कई सारे पाठ अलग तरह से पढ़ने होते हैं। ताकि वो बच्चा खून का रिश्ता न होते हुए भी खुद को आपके परिवार का हिस्सा महसूस कर सके। बच्चे को ये एहसास कराने के लिए आपको कई सारी बातें याद रखनी होंगी। गोद लिए हुए बच्चे की परवरिश से जुड़े इन कामगर टिप्स पर आइए नजर डालें-
जानकारी है जरूरी-
बच्चा अगर दूधमुंहा नहीं है तो याद रखिए आपसे मिलने से पहले उसका अपना एक जीवन था। उनकी जिंदगी में कई लोग थे, उसका अपना रहन-सहन का एक तरीका था और कई मुद्दों पर अपनी राय भी हो सकती है। इन सारी चीजों को जानने के बाद आपके लिए उसकी परवरिश करना और आसान हो जाएगा। उसकी पसंद-नापसंद पता चलने के बाद आप भी अपना व्यवहार उसके हिसाब से ही बदल पाएंगे। मगर ये सब आपको पता कैसे चलेगा? आपको इसके लिए बच्चे के साथ रहने वाले लोगों से बात करनी होगी। ये उसके माता-पिता भी हो सकते हैं और अनाथालय के अधिकारी भी। इन लोगों से बात करने के बाद आपको जो जानकारी मिलेगी, उसके साथ आपके लिए बच्चे को अपने परिवार में आरामदायक महसूस करवाना आसान हो जाएगा। वो जल्दी आपके परिवार के साथ घुलमिल सकेगा। 
अकेलापन रहे दूर-
आप जिस बच्चे को घर ला रही हैं, अगर वो अनाथालय में रहता था तो समझ लीजिए कि कभी अकेला नहीं रहा होगा। खाना खाते समय, सोते समय या फिर खेलते समय, उस जैसे कई बच्चे उसके आस-पास रहा करते थे। इसलिए जरूरी है कि अचानक से उसे अकेला न लगे, इसका ध्यान रखा जाए। इसके लिए आपको उसका कमरा अलग करने से बचना होगा। कमरा भले ही अलग कर दें लेकिन रात को सोते समय उसे अकेला बिलकुल ना छोड़ें। ध्यान दीजिए इससे पहले वो जब भी सोता था तो अकेला नहीं होता था। ऐसे में इस वक्त उसे अकेला छोड़ने का उस पर गलत असर भी हो सकता है। इसलिए जब तक बच्चा आपके घर में एडजस्ट ना हो जाए, आपको उसे खाते और सोते समय तो अकेला बिलकुल नहीं छोड़ना है। 
पसंद का खाना-
अनाथालय में रहते हुए बच्चे को अक्सर खाने के मामले में अपनी इच्छाएं दबानी ही पड़ती हैं। उन्हें कई बार पेटभर कर खाना मिल ही नहीं पाता है। ऐसे में उनके लिए खाने के स्वाद से भी जरूरी उसकी मात्रा होती है। अब जब बच्चा इतनी दिक्कत देख चुका है तो सोचिए जब उसे पेटभर कर स्वादिष्ट खाना मिलेगा तो दिल कितना खुश हो जाएगा। आपको भी गोद लिए हुए बच्चे को यही खुशी देनी है। उसको उसकी पसंद के हिसाब से या फिर खुद ही नई से नई डिश सर्व करके आप उसे अपने करीब लाने की कोशिश कीजिए। यकीनन बच्चे को आपकी ये बात बहुत अच्छी लगेगी। 
बच्चे का परिवार-
बच्चे का पहला परिवार कैसा था? इसके बारे में बात करने से हमेशा बचना चाहिए। दूसरों को ये बातें बताने से हमेशा बचना, बच्चे के लिए अच्छा होता है। दरअसल अगर बच्चा अपने माता-पिता के साथ नहीं है तो जरूर कोई ऐसी दिक्कत होगी, जो मानवीय तौर पर अच्छी नहीं होगी। अब ऐसी किसी बात को बच्चे के सामने बार-बार लाने का कोई फायदा नहीं है। ये बातें बच्चे को दुख पहुंचाएंगी। उसको ये बात पता चलेगी कि उसके नए परिवार के आस-पास सभी लोग ये बात जानते हैं तो उसे और भी ज्यादा दिक्कत होगी। वो नए परिवार में एडजस्ट करने में भी परेशानी महसूस करेगा। हां, ये बात भी सही है कि लोग आपसे बच्चे की पिछली जिंदगी के बारे में पूछेंगे जरूर। इस वक्त आपको बहुत सोच समझ कर इस बात का जवाब देना होगा। जवाब ऐसा होना चाहिए, जो जानने वालों को भी संतुष्ट कर दे और बच्चे के बारे में भी बहुत ज्यादा बातें ना बतानी पड़ें। 
बच्चों के माता-पिता-
बच्चे के पेरेंट्स कैसे भी रहे हों? भले ही वो अपराधी हों या फिर माता-पिता की आपसी लड़ाई की वजह से ऐसा हुआ हो, आपको ध्यान ये रखना है कि गोद लिए बच्चे के सामने कभी भी उसके पेरेंट्स की बुराई नहीं करनी है। माता-पिता कैसे भी हों, दूसरे के मुंह से उनकी बुराई सुनना किसी को भी अच्छा नहीं लगता है। इसलिए जरूरी है कि उसके माता-पिता को लेकर हमेशा ही सम्मानपूर्वक माहौल बना कर रखा जाए। इस तरह बच्चा भी आपको ज्यादा इज्जत और सम्मान जरूर देगा। इससे आप और बच्चे का रिश्ता थोड़ा और मजबूत भी होगा। 
जिंदगी में प्यार-
गोद लिए हुए बच्चे की जिंदगी में अभी तक एक चीज की कमी थी, कमी थी प्यार की। प्यार उन्हें उतना नहीं मिला जो आमतौर पर बच्चों को मिलता है। वो प्यार जो उन्हें सुरक्षात्मक घेरा भी देता है। अब जब ये बच्चा आपके पास है तो आपकी जिम्मदारी है कि आप उस बच्चे को प्यार का मतलब समझाएं, उसे बताएं कि वो खूब सारे प्यार के काबिल है। ऐसा करने के लिए आपको हर छोटी-छोटी बातों का ध्यान भी रखना होगा। आपको देखना होगा कि बच्चे को क्या करना अच्छा लगता है। आप उसको वही चीजें अनुभव कराने की कोशिश कर सकती हैं। इसके साथ दिनभर के कई कामों के दौरान भी उसे याद दिलाती रहें कि वो आपके लिए कितना जरूरी है। जैसे खाना देते समय बोलें, ‘मेरे प्यारे बच्चे के लिए टेस्टी खाना’। ऐसी बातें बच्चे का आपके लिए व्यवहार सुधारने और रिश्ता बनाने में मदद भी करेंगी। 
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