सोशल एंजाइटी एक ऐसी स्थिति का नाम होता है जिसमें कोई व्यक्ति किसी अन्य या किसी अंजान आदमी से बात करने से, उसके पास जाने से डरे और आम तौर पर उसके डर का कारण जज होना या लोग उसके बारे में क्या कहेंगे, उसे कहीं रिजेक्ट तो नहीं कर देंगे, यह सब होते हैं। इस स्थिति में व्यक्ति अपने साथ काम करने वाले लोगों और यहां तक की सभी अनजान लोगों से बात करने से डरने लगता है और हर जगह अकेला पाया जाता है। एंजायटी के कारण कोई भी व्यक्ति सोशल लाइफ को आगे नहीं बढ़ा पाता है। अगर आपकी एंजायटी हद से अधिक बढ़ जाती है तो यह आपके लिए बहुत तरह से नुकसानदायक हो सकती है। इसलिए आपको इसका जल्दी से जल्दी समाधान निकालना पड़ेगा। आप आज की कुछ टिप्स के माध्यम से एंजाइटी को कंट्रोल कर सकते है।

सोशल एंजाइटी के लक्षण

  • ब्लशिंग 

  • नोज़िया 

  • जरूरत से ज्यादा पसीना आना 

  • बोलने में कठिनाई 

  • शरीर कंपकंपाना 

  • हार्ट रेट का तेज होना

  • चक्कर आना

साइकोलॉजिकल लक्षण

  • बहुत ज्यादा सोशल परिस्थितियों की चिंता

  • किसी भी इवेंट से फौरन पहले चिंता करना

  • किसी भी परिस्थिति को फेस करने से भागना

  • दूसरे क्या सोचेंगे उसकी चिंता करना

  • सामाजिक परिस्थितियों का सामना करने के लिए अल्कोहल का सहारा लेना

  • काम ना करना

सोशल एंजाइटी का कारण

सोशल एंजायटी का असल में कारण क्या है यह बताना बहुत मुश्किल है लेकिन कुछ रिसर्च बताते हैं कि आपके आसपास का माहौल और आपके जेनेटिक्स इस बात पर असर करते हैं। साथ ही अगर आपके साथ कुछ नकारात्मक परिस्थितियां रही हैं जैसे कि बुलींग, पारिवारिक झगड़े, या सेक्सुअल एब्यूज़ तो भी आप एंजायटी डिसऑर्डर का शिकार हो सकती हैं।

सोशल एंजायटी डिसऑर्डर का कैसे पता करें

हालांकि इस फोबिया को पता करने के लिए कोई मेडिकल टेस्ट नहीं है। लेकिन कुछ व्यवहारिक पैटर्न को चेक करके आपका एक्सपर्ट सोशल एंजायटी डिसऑर्डर का मालूम कर सकता है। वह आपसे कारण जाने की कोशिश करेंगे और उस कारणों को मापने के लिए मापदंड सेट करेंगे। जैसे कि 

  • आप लगातार किसी डर में है तो उसकी वजह शर्मिंदगी या आपके साथ कोई दुर्व्यवहार है।

  • किसी से भी मिलने से पहले क्या आप बहुत ज्यादा घबराहट या चिंता महसूस करती हैं

  • आपको यह एहसास होना कि यह डर बेवजह है

  • बहुत अधिक चिंता जो आपकी डेली लाइफ को असर कर रही है

थेरेपिस्ट के साथ बात करें:अगर आपसे किसी अनजान या नए व्यक्ति से बात नहीं हो पाती है, तो आपको किसी थेरेपिस्ट से बात करनी चाहिए। वह आपको यह जानने में मदद करेंगे की यह सब आपको शरमाने की वजह से हो रहा है या आपको सच में ही सोशल एंजाइटी की समस्या है। वह आपकी एंजाइटी के ट्रिगर्स के बारे में जानने में मदद करते हैं और उससे आप किस प्रकार बच सकते हैं या मदद करते हैं। आपको सोशल स्किल्स सीखाने में मदद करते हैं। जिन विचारों से आपका दिमाग नेगेटिव होता है उनसे बचने में मदद करते हैं।

जिनसे आपकी एंजाइटी ट्रिगर होती है:बहुत से लोगों को केवल कुछ ही स्थितियों में एंजाइटी होती है। वह चाहे कुछ लंच ऑर्डर करते समय हो, इंटरव्यू के समय या किसी से मदद मांगते समय। आपको यह लगता है की लोग आपको जज कर रहे हैं लेकिन आपको इस विषय के ऊपर किसी से बात करनी ही होगी। अगर आप इसे अपने अंदर दबा कर बैठ जायेंगे तो आपकी किसी तरह से मदद नहीं हो पाएगी। इसलिए एक कदम खुद से भी उठाएं।

नेगेटिव विचारों को किस प्रकार से रोकें:सोशल एंजाइटी के दौरान आपको दूसरों के लेकर हमेशा नेगेटिव विचार ही आते हैं कि क्या होगा अगर वह आपको रिजेक्ट कर देते हैं या क्या होगा अगर आप किसी के ऊपर कोई चीज गिरा देंगे। वह आपकी पब्लिक में बेइज्जती कर देंगे। यह कुछ ही समय के लिए होते हैं। यदि आप एक बार आप इसे ओवर कम कर लेते हैं तो आगे ऐसा बहुत कम होता है। अगर आप एक बार खुद पर विश्वास रख कर कोई काम करते हैं तो कुछ भी गलत नहीं होता है और खुद के बारे में पॉजिटिव ही सोचें।

छोटे छोटे स्टेप्स लें:सोशल एंजाइटी से उभरने में आपको छोटे छोटे स्टेप्स लेने की आवश्यकता होती है। आप किसी नए व्यक्ति से बात करके देख सकते हैं। पूरी क्लास में कोई प्रश्न पूछने या जवाब देने के लिए हाथ उठा सकते हैं। सामने से किसी सह कर्मी की तारीफ कर सकते हैं। कभी कभार केवल कुछ ही दोस्तों के बीच एक पार्टी या गैदरिंग कर सकते हैं जिससे आपको बोलने का मौका मिले। यह छोटे छोटे स्टेप्स अगर आप लेते जायेंगे तो आपका कॉन्फिडेंस भी बढ़ता जायेगा।

अपने विश्वास के लोगों के साथ ट्राई करके देखें:अगर आप किसी नए व्यक्ति के साथ बात करने में या अपनी टीचर से प्रश्न पूछने पर या इंटरव्यू के दौरान अधिक नर्वस हो जाते हैं या आपको एंजाइटी होने लगती है तो आप उनके एक दिन पहले अपने मन में ही अभ्यास कर सकते हैं।  या फिर आप अपने क्लोज फ्रेंड या जानकारों में भी ऐसा अभ्यास कर सकते हैं।

इन सब चीजों के साथ आपको कुछ रिलैक्सिंग तकनीकों का भी प्रयोग करना है जिनसे आपका मस्तिष्क स्टेबल रह सके और उसमें नेगेटिव विचार न आने पाए। इसके लिए आप डीप ब्रीथिंग, मेडिटेशन आदि चीजों को ट्राई कर सकते हैं या ऐसी किताबें पढ़ सकते हैं जिनसे आपके अंदर कॉन्फिडेंस आए।

यह भी पढ़ें- 4 प्रकार के परवरिश तरीके और उनका आप के बच्चों पर प्रभावजब रिश्ते आपस में होने लगे खट्टे