आज के समय में भी हर किसी से जुड़ा कुछ ना कुछ ऐसा काला दिन होता है, जो पूरी जिंदगी के लिए अपनी गहरी छाप छोड़ देता है और भुलाए नहीं भूलता। उनमें से एक है यौन उत्पीड़न। यौन उत्पीड़न ना सिर्फ शरीर को बल्कि आत्मा को भी झंकझोर कर रख देता है। अगर कभी कोई यौन उत्पीड़न से गुजरा है तो उसके शरीर की प्राकृतिक प्रतिक्रियाओं के चलते उस पर लम्बे समय तक नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। आज कल यौन उत्पीड़न का शिकार ना सिर्फ लड़कियां बल्कि लड़के भी हो रहे हैं। अगर कोई यौन उत्पीड़न से जूझ रहा है तो ये समय उसकी जिंदगी का सबसे मुश्किल समय होता है। जिससे वो चाहकर भी नहीं उबर पाते। उसे सामाजिक बहिष्कार का सामना तो करना ही पड़ता है साथ में शारीरिक स्वास्थ्य भी बुरी तरह से प्रभावित होता है। जिससे अच्छी खासी जिंदगी एक संघर्ष में तब्दील हो जाती है। क्या आप भी यौन उत्पीड़न का शिकार का कभी ना कभी शिकार हुई हैं तो आपके लिए इससे उबरना बेहद जरूरी है। 

1. यौन उत्पीड़न से हेल्थ होती है प्रभावित- शोध के मुताबिक यौन उत्पीड़न से शरीर से जुड़ी ऐसी बीमारियाँ घेरने लगती हैं, जिससे समय पर नहीं निपटा जाए तो, बड़ी मुश्किल खड़ी हो सकती है। हेल्थ से जुड़ी ऐसी कई समस्याएं हो जाती हैं, जो मानसिक रूप से भी काफी असर डालती है। आइये एक नजर डालते हैं, यौन उत्पीड़न से स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ता है।

• यौन उत्पीड़न के शिकार लोगों के लिए हाई ब्लडप्रेशर, हाई ट्राइग्लिसराइड्स, नींद की कमी से जूझना आम हो जाता है।

• यौन उत्पीड़न के शिकार लोगों में ज्यादातर चिंता में वृद्धि क साथ साथ कई तरह के विकारों में वृद्धि हो जाती है।

• यौन उत्पीड़न का सामना करने वालों के दिमाग में हमेशा नकारात्मक ख्याल आते हैं, और खुद को हानि पहुंचाने के बारे में सोचते हैं। 

• शोध के मुताबिक यौन उत्पीड़न का शिकार होने वाले लोग किसी पर भी विश्वास नहीं कर पाते और उनका व्यवहार किसी के प्रति भी नकारात्मक हो सकता है।

• यौन उत्पीड़न के शिकार लोगों की मानसिक स्थिति भी खराब होने लगती है, इसलिए सही समय में उन्हें इस सब चीजों से उबरने की नसीहत डी जाती है।

2. क्या कहते हैं आंकड़े?- हमारे देश में उम्र कोई भी हो, वो बच्चा हो या युवा, कोई भी कभी भी यौन उत्पीड़न का शिकार हो सकता है। सरल शब्दों में देखा जाए तो यौन उत्पीड़न से गुजरना लोगों के लिए आम बात है। लेकिन जो इससे जूझता है वो ही इसकी मनोदशा को समझ सकता है। यौन उत्पीड़न के बढ़ते मामले इस बात के गवाह हैं कि, हम ऐसे देश का हिस्सा हैं, जहां आज भी कोई सुरक्षित नहीं है। अगर आंकड़ों की बात करें तो यौन उत्पीड़न के ज्यादातर मामले ऑफिस या अन्य किसी कार्य स्थल पर ही होते हैं। बात इससे जूझने वालों की करें तो लगभग 22 से 25 फीसदी लोगों ने इसका समाना अपने कार्यस्थल पर ही किया है।

3.बढ़ रहा #Me Too का ट्रेंड– बदलते दौर में लोग भले ही ट्रेंड बदला हो लेकिन नहीं बदले हैं तो यौन उत्पीड़न के मामले। अब महिलाएं खुलकर आगे आ रही हैं, लोगों को #Me Too के जरिये नया रास्ता मिला है, खुद के साथ कभी न कभी हुए यौन उत्पीड़न के बारे में बात करती हैं। जैसा की हम सब इस बात को अच्छे से जानते हैं कि यौन उत्पीड़न महिलाओं के साथ कहीं भी और कभी भी हो सकता है। इसी बात की गवाही आंकड़े भी दे रहे हैं। जहां लगभग 80 से 90 प्रतिशत महिलाएं अपपनी पूरी लाइफ में कभी ना कभी इस मुश्किल दौर से जरुर गुजरती हैं।

उदाहरण के लिए अभी हाल फिलहाल तारक मेहता की एक नायिका, बबीता जिनका असल में नाम मुनमुन दत्ता है ने भी मी टू के अंतर्गत सोशल मीडिया पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने अपने साथ हुई एक बेहद झकझोर देने वाले अतीत के उन कड़वे किस्सों को सबके सामने बयां किया, जो उनके साथ घटित हुये। उन्होंने लिखा कि #Me Too मूवमेंट पर पोस्ट सांझा करने का उद्देश्य दुनिया भर की महिलाओं को यौन हमलों के लिए वैश्विक रूप से जागरूक करना है। उन्होंने यह भी कहा कि , “जब मैं पड़ोस के चाचा और उनकी चुभती आंखों से डर गई थी, जो मुझे परेशान करेगा और मुझे धमकी देगा कि मैं इस बारे में किसी से बात न करूं या मेरे बहुत बड़े चचेरे भाई, जो मुझे अपनी बेटियों की तुलना में अलग नजर से देखते हैं या वह आदमी जिसने मुझे पैदा होने पर अस्पताल में देखा था और 13 साल बाद उसने सोचा कि मेरे शरीर को छूना उसके लिए उचित है, क्योंकि मैं एक बढ़ती हुई किशोरी थी और मेरा शरीर बदल गया था या मेरा ट्यूशन टीचर जिसने मेरे अंडरपैंट में हाथ डाला था या वो दूसरा टीचर जिसे मैंने राखी बांधी थी. जो लड़कियों को क्लास में डांटने के लिए ब्रा की स्ट्रैप खींचता था और उनके स्तनों पर थप्पड़ मारता था या फिर वो ट्रेन स्टेशन का आदमी जो यूं ही छू लेता है. क्यों? क्योंकि आप बहुत छोटे होते हो और ये सब बताने से डरते हो।”

4. हिंसा भी नहीं हो रही कम– महिलाओं में बढ़ते अत्याचार, घरेलू हिंसा और यौन उत्पीड़न उनके स्वास्थ्य को सबसे ज्यादा प्रभावित कर रहे हैं। शोध के मुताबिक आज के समय में हर पांच में से एक महिला के साथ बलात्कार हो रहा है। फिर वो राह चलते हो या उसके अपने घर में। वहीं हर तीन में से एक महिला किसी न किसी रूप से यौन हिंसा का सामना करती ही है। जिसमें कालेज और स्कूल जाने वाली छात्राएं भी शामिल हैं।

उदाहरण– शिखा का कहना है कि वह पिछले 13 वर्षों से थेरेपी में है, उस रात उसके साथ क्या हुआ, इससे निपटने की कोशिश कर रही है और वह आज भी एंजाइटी से परेशान है। “मुझे ऐसा महसूस नहीं हो रहा है जैसे मैं चीजों के नियंत्रण में हूं और मैं उन लोगों के समूहों में रहना पसंद नहीं करती, जो शराब पी रहे हों या रात में अकेले कहीं नहीं जाना चाहती। मुझे अजनबियों पर अत्यधिक संदेह होता है, इससे भी अधिक कि अब मेरी दो बेटियाँ हैं, मैं उनके लिए भी डरती हूं।”

5. क्या कहते हैं विशेषज्ञ– मनोचिकित्सकों की मानें तो यौन उत्पीड़न शरीर के साथ मन को भी धक्का पहुंचाता है। जब भी ऐसे में शरीर को धक्का पहुंचता है तो इस दौरान शरीर हार्मोन रिलीज करता है। जिससे शरीर में दर्द और सूजन से बचने के लिए कोर्टिसोल जारी होता है। कई लोगों के शरीर में यौन उत्पीड़न और हमले से लम्बे समय तक बनी रहती हैं। जिससे हेल्थ और भी खराब होती चली जाती है और गम्भीर बीमारी तक हो सकती है।

6. जब चाहिए हो मदद– अगर किसी भी महिला के साथ यौन उत्पीड़न हुआ है तो उसका अनुभव किसी से भी शेयर नहीं किया जा सकता। ये एक ऐसा एहसास होता है, जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। ऐसे में मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य भी खराब होने लगता है। ऐसे में सही सलाह और सही समय में उपचार की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। आप सही सलाह ले सकती हैं। इसके लिए आपकी मदद कोई अच्छा विशेषज्ञ, जानकार या डॉक्टर ही कर सकता है।

7. ये सुझाव आएंगे काम- यौन उत्पीड़न का सामना करने वाली महिलाओं को एक सही सुझाव की जरूरत होती है। अगर आप या आपके आस पास कोई यौन उत्पीड़न से संघर्ष कर रहा है तो आप उसकी मदद करें। आप एक बेहतर मनोचिकित्सक की तलाश करें। आप अपनी बातें उनसे बोले जिनपर आपको विश्वास हो। आप उन्हें बताएं की आप कैसा महसूस कर रही हैं। इस स्थिति में अपनी मनोदशा को कभी भी खुद पर हावी ना होने दें। आप इस स्थिति में जितना अपने करीबियों के सम्पर्क में रहेंगी, खुद को उतना ही गहरी खाई में गिरने से बचा पाएंगी।

यौन उत्पीड़न आम है, लेकिन इसकी चोट आम नहीं होती। इस कारण न सिर्फ जीने का तरीका बदल जाता है बल्कि सोच भी बदलने लगती है। नकारात्मकता इस कदर हावी होने लगती है, जिससे सेहत पर भी असर पड़ता है। आपको ऐसे में ज्यादा कुछ भी करने की जरूरत नहीं है। बस जरूरत है तो सही सलाह और मार्गदर्शन की। जरूरत है तो सिर्फ इस बात की कि आपको ये पता होना चाहिए इस स्थिति से कैसे इसका डटकर सामना किया जाए।

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