Love Lesson From Radha Krishna: जब भी निःस्वार्थ व विशुद्ध प्रेम की बात होती है तो सबसे पहले श्रीराधाकृष्ण का नाम ही लिया जाता है। राधारानी और श्रीकृष्ण की प्रेम कहानी एक गहन और दिव्य कहानी है जो प्रेम की सामान्य समझ से परे है। उनके रिश्ते को आध्यात्मिक प्रेम का प्रतीक माना जाता है, जो शारीरिक मिलन से परे आध्यात्मिक व भावनात्मक अंतरंगता के बारे में बताता है।
राधा और कृष्ण की प्रेम कहानी प्रेम की मानवीय समझ से परे है, यह सिखाती है कि सच्चा प्यार निःस्वार्थ, बिना शर्त और शाश्वत है। ऐसा प्रेम सर्वोच्च है, जहां आत्मा लालायित रहती है और अंततः परमात्मा से मिल जाती है। आज के समय में अक्सर लोग दूसरों से प्रेम करने का दावा करते हैं और अगर उनके अनुकूल कुछ भी नहीं होता है तो वे रिश्ता तोड़ने में तनिकभर भी विचार नहीं करते हैं। इसे प्रेम का नाम नहीं दिया जा सकता। प्रेम तो वो अथाह सागर है, जिसका जल कभी भी खत्म हो ही नहीं सकता। तो चलिए कृष्ण जन्माष्टमी के विशेष अवसर पर हम आपको राधा-कृष्ण के प्रेम के कुछ ऐसे ही सबक के बारे में बता रहे हैं, जिन्हें हर किसी को जानना, समझना व सीखना चाहिए-
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शारीरिक नहीं, पारलौकिक प्रेम

आज के समय में लोग प्रेम को किसी बाहरी या शारीरिक आकर्षण से जोड़कर देखते हैं। लेकिन वास्वत में, राधा और कृष्ण का प्रेम का यह दर्शाता है कि प्रेम एक दिव्य संबंध है, शारीरिक आकर्षण या सांसारिक इच्छाओं पर आधारित नहीं है। शारीरिक मिलन से परेः सांसारिक प्रेम के विपरीत, उनका प्रेम विवाह या शारीरिक मिलन के बारे में नहीं है। कृष्ण, राधा से गहराई से जुड़े होने के बावजूद, रुक्मिणी और अन्य से विवाह करते हैं, फिर भी राधा शाश्वत प्रेमी बनी रहती हैं। यह इस बात का प्रतीक है कि सच्चा प्यार सामाजिक मानदंडों से बंधा नहीं है और भौतिकता से परे है।
निस्वार्थता और त्याग ही है प्रेम का स्वरूप
वर्तमान में, जब लोग किसी को पसंद करते हैं या किसी से प्रेम का दावा करते हैं, तो उसके सामने कई तरह की शर्तें रख देते हैं। लेकिन श्रीराधा का कृष्ण के लिए प्यार बिना शर्त है। वह बदले में कुछ भी उम्मीद किए बिना उससे प्यार करती है, यह जानते हुए भी कि कृष्ण उसे छोड़ देंगे, यह सिखाता है कि सच्चा प्यार बिना किसी अपेक्षा के देना और त्याग करना है। इतना ही नहीं, प्रेम हमेशा अहंकार-रहित होता है। राधारानी का प्रेम भी अहंकार से मुक्त है। वह खुद को कृष्ण से अलग नहीं देखती है। यह प्रेम के उस दिव्य रूप के बारे में बताता है, जहां प्रेमी और प्रेमिका दो ना होकर एक ही बन जाते हैं।
विरह नहीं है प्रेम खत्म होने का संकेत

अधिकतर लोगों की यह मान्यता है कि जब दो लोग एक-दूसरे से प्रेम करते हैं तो उन्हें हमेशा साथ रहना चाहिए। अगर वे किसी ना किसी कारणवश एक-दूसरे से दूर होते हैं तो ऐसे में उनका प्रेम धीरे-धीरे कम होने लगता है। लेकिन राधा-कृष्ण का प्रेम यह बताता है कि विरह का दर्द प्रेम और भक्ति को और भी अधिक प्रगाढ़ करता है। कृष्ण के लिए राधा की लालसा, विशेषकर उनके वृन्दावन छोड़ने के बाद, आत्मा की परमात्मा से मिलन की लालसा को दर्शाती है। इस अलगाव को नकारात्मक नहीं बल्कि आध्यात्मिक विकास के मार्ग के रूप में देखा जाता है। कृष्ण के लिए तीव्र चाहत राधा को परमात्मा के करीब लाती है, जो इस बात का प्रतीक है कि कभी-कभी दूरी प्रेम और भक्ति को गहरा कर सकती है।
सामाजिक मानदंडों से परे होता है प्यार
राधा और कृष्ण के बीच के प्रेम ने अपने समय के सामाजिक मानदंडों को खारिज कर दिया। राधा, एक विवाहित महिला और कृष्ण, जिनके कई रिश्ते थे, ने एक ऐसा बंधन साझा किया जो सामान्य समाज की समझ से परे था संसार का लेकिन एक दिव्य संबंध था। यह हमें प्यार को सामाजिक निर्णयों और मानदंडों से परे देखने का अवसर देता है। आपको उनके सच्चे प्रेम को देखकर यह सीखना व समझना चाहिए कि सच्चा प्यार हमेशा पारंपरिक मानकों के अनुरूप नहीं होता है। इतना ही नहीं, उसमें साथी से भौतिक या शारीरिक सुख की लालसा भी नहीं होती है। सच्चा प्रेम आपकी आत्मा से जुड़ता है और इस बंधन को किसी को तरह की सामाजिक स्वीकार्य की आवश्यकता नहीं होती है। ऐसे प्रेमी चाहे कहीं पर भी हों, लेकिन आत्मा से वे हमेशा एक-दूसरे से जुड़े हुए होते हैं।
बिना शर्त होता है प्रेम

राधा और कृष्ण का प्रेम हमें बिना शर्त प्रेम करना सिखाता है। राधा और कृष्ण को सामाजिक मानदंडों और दूरियों का सामना करना पड़ा, जो उन्हें अक्सर अलग करती थी। लेकिन फिर भी राधा और कृष्ण का प्रेम शुद्ध, निस्वार्थ और बिना किसी अपेक्षा के था। इसलिए, उनका प्रेम बहुत अधिक पवित्र व पूजनीय है। यह हमें बिना किसी शर्त या अपेक्षा के प्यार करना सिखाता है और प्रेम के वास्तविक सार को अपनाना सिखाता है जो भौतिक इच्छाओं और अहंकार से परे है। हालांकि, आज के समय में लोग किसी से भी कोई ना कोई अपेक्षा के साथ ही जुड़ते हैं और अपेक्षाओं के पूरा ना होने की स्थिति में एक-दूसरे से अलग होने में बिल्कुल भी समय नहीं लगाते हैं।
