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रिश्ते में अब स्टेटस, जॉब सिक्योरिटी, इनकम, बैकग्राउंड सभी बातें काफी मायने रखती हैं। इन्हीं सब बातों से आ गया है डेटिंग की दुनिया में नया ट्रेंड, जिसे कहा जाता है 'थ्रोनिंग'। क्या है थ्रोनिंग डेटिंग ट्रेंड और क्या है इसके फायदे-नुकसान यह जानना हर किसी के लिए जरूरी है।
Throning Dating Trend: एक समय था जब कहा जाता था कि ‘प्यार अंधा होता है।’ यानी जब आप किसी से प्यार करते हैं या किसी के साथ रिलेशनशिप में आते हैं तो बिना कुछ सोचे समझे उसके हो जाते हैं। लेकिन आज का दौर कुछ अलग है। अब युवक हो या युवती, दोनों ही रिश्ते काफी सोच समझकर कर बनाते हैं। रिश्ते में अब स्टेटस, जॉब सिक्योरिटी, इनकम, बैकग्राउंड सभी बातें काफी मायने रखती हैं। इन्हीं सब बातों से आ गया है डेटिंग की दुनिया में नया ट्रेंड, जिसे कहा जाता है ‘थ्रोनिंग’। क्या है थ्रोनिंग डेटिंग ट्रेंड और क्या है इसके फायदे-नुकसान यह जानना हर किसी के लिए जरूरी है। इतना ही नहीं इस नई टर्म की कई चुनौतियां भी हैं।
जानिए आखिर क्या है थ्रोनिंग

अगर आप किसी को डेट कर रहे हैं, किसी के साथ रिलेशनशिप में हैं या फिर किसी को अपनी जिंदगी में शामिल करने की सोच रहे हैं तो आपको थ्रोनिंग डेटिंग ट्रेंड के बारे में जानकारी होना बहुत जरूरी है। दरअसल, थ्रोनिंग रिलेशनशिप प्यार नहीं पैसों और स्टेटस के अनुसार बनाए जाते हैं। यानी इसमें सामने वाले शख्स के सोशल स्टेटस पर ज्यादा फोकस किया जाता है। ऐसे में यह एक मतलबी रिश्ता है, जिसमें प्यार और भावनाओं की जगह स्वार्थ और रुपयों को अहमियत दी जाती है। ऐसे रिश्ते आमतौर पर समाज में खुद को ऊंचा दिखाने और अपनी जगह बनाने के लिए ही बनाए जाते हैं। इसमें पार्टनर सिर्फ अपना फायदा देखता है।
इसलिए बन रहे हैं ऐसे रिश्ते
आज के समय में थ्रोनिंग डेटिंग मेट्रो सिटीज में काफी कॉमन है। लोग अब अपनी जिंदगी में काफी व्यवहारिक होते जा रहे हैं। ऐसे में उन्हें थ्रोनिंग डेटिंग के जरिए आगे बढ़ने का एक मौका मिल जाता है। जिससे उन्हें आगे के रास्ते आसानी से मिल जाते हैं। समाज में उनका स्टेटस बढ़ जाता है। हालांकि अक्सर ऐसे रिश्ते में किसी एक का घाटा होना तय होता है। लेकिन मॉर्डन जमाने में इसे ‘प्रैक्टिकल रिलेशनशिप’ बताया जा रहा है।
कमजोर नींव, मतलबी रिश्ता
थ्रोनिंग डेटिंग भले ही कुछ लोगों को शुरुआत में काफी आकर्षित करती है और अच्छी लगती है। लेकिन इसके कई नुकसान भी हैं, जिनका एहसास देरी से होता है। दरअसल, इन रिश्तों की नींव ही मतलब पर डाली जाती है। ऐसे में यह रिश्ते ज्यादा समय तक नहीं चल पाते हैं। अक्सर मतलब पूरा हो जाने के बाद यह रिश्ता भी खत्म हो जाता है।
तनाव का कारण
एक ऐसा रिश्ता जहां दो लोग सिर्फ स्वार्थ से जुड़े हैं, उनमें भावनात्मक बॉन्ड नहीं बन पाता है। अगर आगे चलकर किसी एक पार्टनर के दिल में सच्ची भावनाएं आ भी जाएं तो दूसरा उसपर विश्वास नहीं कर पाता है। थ्रोनिंग डेटिंग का एक नुकसान यह भी है इसमें एक पार्टनर दूसरे से हमेशा कमतर ही रहता है, जो तनाव का कारण बन जाता है। ऐसे में रिलेशनशिप में समानता की भावना नहीं होती। कुल मिलाकर यह एक खोखला रिश्ता होता है, जो मतलब की डोर बंधा होता है। हालांकि दुनियाभर में इसका चलन तेजी से बढ़ रहा है।
